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यौन संचारित रोग – sexually transmitted disease std in hindi

यौन संचारित रोग – sexually transmitted disease std in hindi

इस लेख में आप जानेंगे यौन संचारित रोग या रतिरोग क्या होता है, पुरूषों और महिलाओं में इसके लक्षण, प्रकार, प्रेगनेंसी के दौरान एसटीडी, निदान, उपचार और बचाव –

एसटीडी क्या होता है – what is std in hindi

  • यौन संपर्क (सेक्स) के कारण एक से दूसरे व्यक्ति में फैलने को सेक्सुअली ट्रांसमेटिड रोग (एसटीडी) कहा जाता है.
  • एसटीडी होने का कारण गैर सुरक्षित योनि, एनल या ओरल सेक्स हो सकता है.
  • इसके अलावा यौन संचारित रोग से ग्रसित व्यक्ति के साथ सेक्स करने से भी यह आपको हो सकता है.
  • एसटीडी को सेक्सुअली ट्रांसमेटिड इंफेक्शन (एसटीआई) या रतिरोग (वीडी) भी कहा जाता है.
  • ध्यान रहें सिर्फ सेक्स ही नही, एसटीडी के एक से दूसरे व्यक्ति में फैलने के अन्य कारण जैसे एक ही सुई का उपयोग और ब्रेस्टफीडिंग भी हो सकती है.

पुरूष और महिलाओं में एसटीडी के लक्षण – std symptoms in men and women in hindi

काफी सारे मामलों में लक्षण दिखाई नही देते है लेकिन जब होते है तो निम्न लक्षण दिखाई पड़ते है –

पुरूषों में एसटीडी के लक्षण

  • पेशाब या सेक्स के दौरान असहजता या दर्द होना
  • पेनिस से ब्लीडिंग या डिस्चार्ज होना
  • पेनिस, टेस्टिकल, एनस, नितम्बू, जांघ या मुँह के आसपास छाले, बम्प, रैश आदि
  • टेस्टिकल्स की सूजन

महिलाओं में एसटीडी के लक्षण

  • योनि में खुजली या असहजता
  • योनि से ब्लीडिंग और डिस्चार्ज
  • सेक्स के दौरान परेशानी आना
  • पेशाब करने में दर्द या जलन होना
  • योनि, एनस, जांघ या मुंह के आसापास छाले, रैश आदि होना

एसटीडी के प्रकार – types of std in hindi

कई प्रकार के कैंसर सेक्स के दौरान संचारित हो सकते है जिसमें सबसे आम है –

क्लैमाइडिया

  • इसके होने पर सेक्स के दौरान असहजता या दर्द
  • पेट के निचले हिस्से में दर्द
  • पेनिस या योनि से हरा या पीला डिस्चार्ज होना
  • पेशाब के दौरान कठिनाई या दर्द हो सकता है. 

क्लैमाइडिया का इलाज न मिलने पर

  • यूरेथरा, प्रोस्टेट ग्लैंड या टेस्टिकल्स का इंफेक्शन
  • इनफर्टिलिटी
  • पेल्विक इंफ्लामेटरी रोग

प्रेगनेंसी में क्लैमाइडिया होने पर यह जन्म के दौरान यह शिशु को विकसित हो सकता है जिसमें निमोनिया, आंखों का इंफेक्शन या अंधापन हो सकता है. जबकि एंटीबायोटिक्स से इसका इलाज संभव है.

एचपीवी

  • यह एक से दूसरे व्यक्ति में सेक्स संपर्क या प्यूबिक स्किन के जरिए हो सकता है.
  • वायरस के काफी सारे रूप हो सकते है जिसमें से कुछ ज्यादा खतरनाक होते है.
  • सबसे सामान्य एचपीवी में जनानंग, मुंह या गले के वार्ट हो सकते है.

एचपीवी इंफेक्शन के कुछ रूप कैंसर हो सकते है जिसमें –

  • रेक्टल कैंसर
  • पीनाइल कैंसर
  • वुल्वर कैंसर
  • सर्वाइकल कैंसर
  • ओरल कैंसर

अधिकतर मामलों में एचपीवी कैंसर नही बनती है. साथ ही इसका कोई इलाज नही है एचपीवी इंफेक्शन अपने आप ठीक हो जाते है. हालांकि एचपीवी होने पर टेस्ट और जांच होना जरूरी होता है.

उपदंश (सिफलिस)

  • इसके शुरूआती स्टेज में अधिकतर लोग इसे नोटिस नही करते है.
  • पहला लक्षण होता है एक छोटा छाला जो जनानंग, एनस या माउथ में हो सकता है.
  • इनमें दर्द नही होता है लेकिन यह बहुत संक्रमित होता है.

सिफलिस के लक्षणों में –

  • रैश
  • थकान
  • सिरदर्द
  • जोड़ों में दर्द
  • हेयर लॉस
  • वजन कम होना
  • बुखार

उपचार न मिलने पर सिफलिस के आखिरी स्टेज में –

  • याद्दाश्त भूल जाना
  • मानसिक रोग
  • हार्ट रोग
  • मौत
  • सुनने, देखने की क्षमता का नुकसान
  • दिमाग या स्पाइनल कोर्ड का इंफेक्शन

जबकि शुरूआत में पता लगने पर उपदंश (सिफलिस) का इलाज एंटीबायोटिक्स से किया जा सकता है. वहीं नवजात शिशुओं के लिए सिफलिस का इंफेक्शन जान पर बन सकता है. इसलिए गर्भवती महिलाओं की उपदंश (सिफलिस) जांच की जानी चाहिए.

एचआईवी

  • इसके दौरान हमारा इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है.
  • जिसके कारण अन्य बैक्टीरिया और कैंसर का रिस्क बढ़ जाता है.
  • उपचार न मिलने पर एचआईवी स्टेज 3 तक जा सकता है जिसे एड्स कहा जाता है.
  • लेकिन आज के समय में ऐसे काफी लोग है जो एचआईवी के साथ जी रहे है लेकिन उन्हें एड्स नही है.
  • शुरूआत में एचआईवी के लक्षण फ्लू के जैसे लगते है जैसे बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मतली, रैश, गले की खराश, ऐंठन, दर्द आदि.
  • यह लक्षण अपने आप महीने में चले जाते है लेकिन काफी सालों के बाद सिरदर्द, पेट की समस्याएं, बुखार, थकान आदि हो सकते है.
  • एचआईवी का कोई इलाज नही है लेकिन उपचार से इसे मैनेज कर आगे बढ़ने से रोका जा सकता है.
  • सही उपचार मिलने पर अपने पार्टनर को एचआईवी ट्रांसमिट करने के मौके कम हो जाते है.

गोनोरिया

काफी सारे लोगों को कोई लक्षण नही होते है लेकिन जिनको होते है उनमें निम्न लक्षण देखने को मिलते है –

  • पेनिस या योनि से सफेद, पीला या हरे रंग का डिस्चार्ज
  • सेक्स के दौरान परेशानी
  • पेशाब करने में दर्द या जलन
  • जनानंगों के आसपास खुजली
  • पेशाब अधिक आना
  • गले की खराश

गोनोरिया का उपचार न मिलने पर

  • बांझपन
  • पेल्विक इंफ्लामेटरी रोग
  • यूरेथरा, प्रोस्टेट ग्लैंड या टेस्टिकल का इंफेक्शन हो सकता है.

इसके अलावा जन्म के समय गर्भवती मां से यह शिशु में भी जा सकता है जिससे शिशु को स्वास्थ समस्याएं हो सकती है. साथ ही इसका इलाज एंटीबायोटिक्स से किया जाता है.

प्यूबिक लाइस (जघन जूँ)

सिर, शरीर के जूँ की ही तरह यह प्यूबिक एरिया के बालों में भी हो सकती है. यह अपना भोजन मनुष्य खून से लेते है. इसके लक्षणों में –

  • एनर्जी न रहना
  • चिड़चिड़ापन
  • हल्का बुखार
  • जनानंग और एनस के आसपास खुजली और छोटे लाल, पिंक दाने
  • बालों की जड़ के आसपास जूँ के अंडे भी देखे जा सकते है.

प्यूबिक लाइस का उपचार न मिलने पर

  • यह कपड़े, स्किन संपर्क, टावल आदि से फैल सकता है.
  • इसके इलाज के लिए टॉपिकल ट्रीटमेंट सही रहता है.
  • जरूरी है कि आप अपने आसपास स्वच्छता रखें और हाइजिन बनाए रखें.

ट्राइकोमोनिएसिस

यह एक छोटा कीट होता है जो एक से दूसरे इंसान में जनानंग संपर्क से फैल जाता है. इसके लक्षणों में –

ट्राइकोमोनिएसिस का इलाज न मिलने पर

  • यूरेथरा इंफेक्शन
  • इनफर्टिलिटी
  • पेल्विक इंफ्लामेटरी रोग

जबकि इसका इलाज एंटीबयोटिक्स से किया जा सकता है.

हर्पीस

  • हर्पीस सींप्लैक्स वायरस को एचएसवी कहा जाता है. इसके दो प्रकार एचएसवी-1 और एचएसवी-2 होते है.
  • एचएसवी-1 को ओरल हर्पीस कहा जाता है जो एक से दूसरे व्यक्ति में जनानंग के माउथ में ओरल सेक्स के दौरान होती है.
  • एचएसवी-2 को जनानंग हर्पीस कहा जाता है जिसमें फुंसी होती है.
  • यह कुछ हफ्तों में अपने आप ठीक हो जाते है.
  • हालांकि छालों में दर्द काफी ज्यादा होता है.
  • प्रेगनेंट महिला को हर्पीस होने पर वह शिशु में जा सकता है जो शिशु के लिए बहुत गंभीर होता है.

अन्य एसटीडी

  • ल्यंफोंग्रानुलोमा वेनेरेउम
  • शैंक्रॉइड
  • ग्रैनूलमा इंग्यूनेल
  • मोल्लुसकम कंटेजियोसम
  • स्कैबीज

ओरल सेक्स से एसटीडी – stds from oral sex in hindi

  • योनि या एनल सेक्स ही एसटीडी के कारण नही होते है.
  • यह ओरल सेक्स से भी फैल सकती है.
  • आसान शब्दों में समझे तो पार्टनर का एक दूसरे के जनानंग मुँह में लेने जैसे ब्लोजॉब या योनि चाटने से मुंह और गले तक फैल सकते है.
  • इससे संबंधी अन्य जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें.

इलाज संभव वाली एसटीडी – curable stds in hindi

  • जघन जूँ
  • ट्राइकोमोनिएसिस
  • गोनोरिया
  • सिफलिस
  • क्लैमाइडिया

अन्य एसटीडी जिनका इलाज संभव है

अगर एसटीडी का इलाज नही होता है तो भी इसे मैनेज किया जा सकता है. साथ ही इसका शुरूआती निदान बहुत जरूरी होता है.

प्रेगनेंसी में एसटीडी – stds and pregnancy in hindi

  • गर्भवती महिला का अपने पेट में पल रहे शिशु को गर्भावस्था या जन्म के दौरान एसटीडी संचारित हो सकती है.
  • कुछ मामलों में यह शिशु की जान को खतरा हो सकता है.
  • नवजातों में एसटीडी का बचाव करने के लिए गर्भावस्था के दौरान टेस्ट आदि किए जाते है.
  • रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर डॉक्टर आपको एंटीबायोटिक्स, एंटावायरल दवाएं या अन्य उपचार दे सकते है.
  • कुछ मामलों में सी सेक्शन डिलीवरी की सलाह दी जाती है जिससे बच्चे में ट्रांसमीशन को रोका जा सके.

एसटीडी का निदान – Diagnosis of STDs in hindi

  • अधिकतर मामलों में एसटीडी का निदान सिर्फ लक्षणों के आधार पर नही होता है.
  • इसका अंदेशा होने पर डॉक्टर आपको टेस्ट कराने के लिए बोल सकते हैं.
  • सेक्स हिस्ट्री और टेस्टिंग के आधार पर डॉक्टर आपको बता पाते है कि आप संक्रमित है या नही.
  • स्थिति गंभीर लगने पर एचपीवी टेस्ट, पैप स्मीयर टेस्ट करवाएं जा सकते है.

एसटीडी का इलाज – treatment of std in hindi

इसका इलाज एसटीडी के प्रकार पर निर्भर करता है. इसलिए जरूरी है कि आप और आपके सेक्स पार्टनर सेक्स करने से पहले एसटीडी का इलाज करवा चुके हों. ऐसा न होने पर यह फैल सकती है.

  • बैक्टीरियल एसटीडी – एंटीबायोटिक्स से इसका इलाज किया जा सकता है. इसके लिए डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं जरूरी लें.
  • वायरल एसटीडी – एंटीबायोटिक्स से वायरल एसटीडी का इलाज किया जा सकता है लेकिन अधिकतर वायरस अपने आप साफ हो जाते है.
  • अन्य एसटीडी – जो छोटे कीटाणु के कारण होती है जैसे प्यूबिक लाइस (जूँ), स्कैबिज आदि के लिए क्रीम या ओरल दवाएं ली जा सकती है.

एसटीडी से बचाव – std prevention in hindi

  • सेक्स संपर्क न बनाना इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका है.
  • लेकिन अगर आप योनि, एनल या ओरल सेक्स करने चाहते है तो इसे सुरक्षित बनाया जा सकता है.
  • जिसके लिए किसी भी प्रकार के सेक्स के दौरान कंडोम का उपयोग करना जरूरी है.
  • ओरल सेक्स के लिए डैंटल डैम का इस्तेमाल किया जा सकता है.
  • खून, फ्लूइड या सीमेन के कारण होने वाली एसटीडी के लिए कंडोम काफी प्रभावी है.
  • जबकि कंडोम न होने पर आप और आपके पार्टनर के संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है.
  • सेक्सुअली सक्रिय होने पर नियमित एसटीडी जांच जरूरी है. खासकर नए या एक से अधिक पार्टनर होने पर ऐसा होता है.
  • किसी नए पार्टनर के साथ सेक्स करने से पहले उसकी सेक्सुअल हिस्ट्री जान लें.
  • कुछ एसटीडी के कोई लक्षण नही होते है ऐसे में टेस्टिंग करवा लें.
  • पॉजिटिव मामलों में डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचारों का पालन करना चाहिए. 

कुछ चीज़े सिर्फ प्रेगनेंसी से बचा सकती है लेकिन एसटीडी से नही, उदाहरण के लिए –

  • गर्भनिरोधक गोलियाँ
  • बर्थ कंट्रोल शॉट
  • बर्थ कंट्रोल इम्प्लांट
  • इंट्रायूटेरिन डिवाइस

अंत में

एसटीडी का टेस्ट पॉजिटिव आने पर इसका उपचार जल्द से जल्द शुरू कर देना चाहिए. संक्रमित होने पर दूसरे संपर्क में आने वाले पार्टनर के संक्रमित होने के मौके अधिक होते है. उपचार न किए जाने पर एसटीडी के परिणाम गंभीर हो सकते है. 

रेयर मालमों में एसटीडी के कारण जान को नुकसान भी हो सकता है. हालांकि अधिकतर एसटीडी का इलाज किया जा सकता है. कुछ मामलों में व्यक्ति पूरा ठीक हो जाता है. जबकि अन्य मामलों में लक्षणों से राहत के साथ जटिलताओं का रिस्क कम होना और अपने सेक्स पार्टनर का बचाव होता है.

एसटीडी के इलाज के लिए डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार को फॉलों किया जाना चाहिए. साथ ही जरूरी होने पर सेक्स आदतों में बदलाव भी बहुत जरूरी होता है.