Labour mistri story – हाल ही में मिस्त्री बने शक्स की कहानी

आज हम आपको बताने वाले है पैने शक्स “दिनेश चंद” बदला हुआ नाम वाले बकचोद की कहानी, वैसे तो ये इंसान अपने आप में बेहद ही विचित्र है. इसे लेकर कई तरह के अश्र्लील उपन्यास या सविता भाभी टाइप कहानियां लिखी जा सकती है. चूंकि यहा हम बात करने वाले है लॉकडाउन में परेशान होने वाले लोगों की कहानी तो हम मुद्दे से भटकेंगे नही.

कुछ महीने पहले तक दिनेश लिब्रेट नाम की एक कंपनी में काम करता था. जहां उसने शायद अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी मौज काटी, बकचोदी की, “ज़हर” किस्म के लोगों से मौज़ भी ली. मौके पड़ने पर दूसरों को भी मौज का अवसर दिया. वहां उसने कई प्रकार के “टेड़े” काम भी किए जो हम फिर कभी डिसकस करेंगे.

परंतु, तदापि-कदापि हुआ ये कि भईया एक दिन कंपनी के “शाकाल और मारियो” बाबू ने कंपनी का मॉडल बदलने की ठान ली. भला करते भी क्यों नही, बिजनेस का मतलब पैसा ही होता है. फिर चाहे दुनिया जाहा मर्जी जाए.

बीते साल अगस्त से हुआ लोगों को निकालने का सिलसिला शुरू हुआ जो हर 2 महीने की किस्तों की तरह जारी रहा. उसी 2 माही किस्त में दिनेश समेत कई लोगों का पत्ता कट गया. जिसके बाद दिनेश ने कई जगह ऐफर्ट मारे लेकिन उसे कुछ खास लगा नही.

मार्केट की हालत खराब थी, मन माफिक नौकरी और सैलरी न मिल पाना और उसे फैमिली बिजनेस की ओर ले गया.

उसका फैमिली बिजनेस कंस्ट्रक्शन का है, अगर पढ़ाई लिखाई की बात करें तो दिनेश पिछले दो साल से अपनी मेकैनिकल इंजीनियरिंग की सप्लीयां दे रहा है.

चूंकि इस प्रोफेशन में नया है तो इसे काम की समझ पाने के लिए बिल्कुल नीचे से शुरू करना था लेकिन उसमें भी उसे थोड़ा इज्जत वाला काम चाहिए था.

ऐसे में उसने कतर घूम के आना का फैसला लिया. जहां से आने के बाद उसे अहसास हुआ कि मिस्त्री का काम भी बहुत बढ़िया हो सकता है.

तो हुआ ये कि उसकी काफी सारी कंस्ट्रक्शन साइट चल रही थी उन्ही में से एक पर उसने मिस्त्री का काम शुरू कर दिया.

अब काम शुरू करें हुए मात्र हफ्ता – दस दिन हुए ही थे एक-आद महिला लेबर से बातचीत भी शुरू हुई थी कि रोज़ खाने कमाने वाले दिनेश के सामने लॉकडाउन आ गया.

अब दिनेश की पेमेंट भी फसी हुई है और क्योंकि वे इस प्रोफेशन में नया आया है. ऐसे में सरकार से यही सवाल है कि दिनेश जैसे लोगों के लिए उन्होनें क्या फैसला किया है?

अब कब से वे काम फिर से शुरू कर सकता है. साथ ही अगर लॉकडाउन के बारे में समय रहते बता दिया गया होता तो कम से कम महिला कर्मचारी के साथ बातचीत तो नही रूकती.

इसलिए जरूरी है कि ऐसे कर्मठ युवाओं के लिए फैसले जल्द से जल्द लिए जाए.

#Update

आगे इस कहानी में हुआ ये कि मॉडल बदल जाने वाली कंपनी ने 40 लाख का रेंट वाले ऑफिस खाली कर दिया है. सूत्रों के मुताबित शाकाल या मारियों में से किसी एक के घर पर सर्वर रखे गए है.

साथ ही कंपनी अपने पुराने मॉडल पर लौट गई है और डॉक्टरों को फ्री में प्लान बैच रही है. वहीं स्टाफ कितना बचा है इसकी कोई स्थिति साफ नही है.

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