कोविड-19 कोरोनावायरस के कारण हुए लॉकडाउन में लोगों को बहुत कुछ झेलना पड़ रहा है. लेकिन समझने वाली बात यह भी है कि अगर आप संक्रमित हो गए और कहीं आपके जीवन पर बात आ गई तो आप पैसे का क्या करेंगे? पैसा तो बाद में भी कमाया जा सकता है.

अब आते है मुद्दे की बात पर, आज हम आपको बताने वाले है कंपनियों की चाल के बारे में कि कैसे फायदे में चल रही कंपनियां अपने यहां काम कर रहे लोगों तक फायदा नही पहुंचा रही है. हालांकि, गौर करने वाली बात यह है कि ऐसा सभी कंपनियों के साथ नही है. 

इस लेख के माध्यम से हम आपके सामने दो तरह के पक्ष रखने वाले है. पहला वो, जो लॉकडाउन से सच में इफेक्ट होते नज़र आ रहे है और दूसरे वो जो लॉकडाउन का फायदा उठा रहे है.

पहला पक्ष

ट्रैवल कंपनी चलाने वाले “डोडो” (बदला हुआ नाम), बी2बी में डील करते है. टूर एंड ट्रैवल के बिज़नेस में होता ये है कि आप का बिज़नेस बहुत सारे फैक्टर से प्रभावित भी होता है और बहुत सारे फैक्टर का उसे फायदा भी मिलता है. सबसे जरूरी यहां कंपटीशन बहुत ज्यादा है. 

इस बार अधिक ठंड होने के कारण बिज़नेस थोड़ा डाउन रहा, जनवरी आते आते कोरोना वायरस का बवाल शुरू हो गया. 

जिसका असर ये हुआ कि अगले 8 महीनों की बुकिंगों पर भी असर हो गया. काफी लोगों ने पैसे वापस मांगने शुरू कर दिए. डोडो का कहना था कि बिज़नेस में आपको फायदे और नुकसान के लिए तैयार रहना चाहिए.

जब 31 मार्च तक लॉकडाउन का ऐलान हुआ तो “डोडो” ने अपने सभी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम दे दिया और सैलरी टाइम से मिलने की बात भी कहीं.

उसके बाद हुआ ये कि लॉकडाउन का समय बढ़ा दिया गया और अभी आगे बढ़ेगा ही, टूर एंड ट्रैवल में होता यह है कि आपको क्लाइंट से बात करके प्लान आदि बैचने होते है जो सेल्स से जुड़ा होता है.

अब चूंकि ये सैक्टर बिल्कुल ही खाली है और आगे कुछ महीने भी ऐसा ही रहेगा तो ऐसे में डोडो क्या कर सकता है? उसके सामने बहुत सारी समस्या है जैसे ऑफिस का रेंट, बिजली, पानी आदि. लोगों के पैसे वापस करने का दवाब, कर्मचारियों को कुछ सैलरी देना आदि.

दूसरा पक्ष

गूगल के लिए थर्ड पार्टी की तरह काम कर रही लोकलाइजेशन कंपनी, जिसका काम अनुवाद करना है. यहां कर्मचारियों से काम अच्छे से लिया जाता है. 

लॉकडाउन के कारण लोग इंटरनेट का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे है, ऐसे में आईटी सैक्टर में नौकरियाँ ज्यादा निकलनी चाहिए. लेकिन नही, बेशक यह एक एमएनसी है परंतु बिज़नेस का उसूल है कि पैसा पहले बाकि सबकुछ बाद में, तो हुआ ये कि टीम की मीटिंग ली गई.

मीटिंग जो बढ़ी साफगोई से कहा गया कि विश्व मंदी से गुज़र रहा है. लोगों की नौकरियाँ जा रही है. हम आपको बताना चाहते है कि आप लोगों की नौकरी पर कोई ख़तरा नही है.

आगे अभी और काम आने वाला है उसके लिए तैयार रहें आदि. मुद्दे की बात तो यह है कि जो लोग अप्रेज़ल की आस लगाए बैठे थे यह उनके लिए साफ तौर पर इशारा था कि अप्रेज़ल की आशा न रखें और नौकरी करनी है तो करते रहें वरना विश्व में मंदी है ऐसे में हमें और हज़ार लोग कम सैलरी में मिल जाएंगे.

सवाल सबसे बड़ा यही है कि ऐसी कंपनियों का क्या किया जा सकता है? क्योंकि ये एमएनसी है तो ये इस बात का पूरा पूरा फायदा उठा सकती है.

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