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हवा में फैलने वाले रोग – airborne disease in hindi

हवा में फैलने वाले रोग – airborne disease in hindi

इस लेख में आप जानेंगे हवा में फैलने वाले रोगों के बारे में, यह क्या होता है, इनके प्रकार, लक्षण, इलाज और बचाव –

हवा में फैलने वाले रोग क्या होते है – what are airborne disease in hindi

  • आप केवल सांस लेने से कुछ बीमारियों की पकड़ में आ सकते हैं. इन्हें वायुजनित रोग (हवा में फैलने वाली बीमारी) कहा जाता है.
  • हवा में फैलने वाले कुछ विशेष रोग खांसने, छीकने, बात करने, नाक सिनकने और थूकने के कारण छोटे कण हवा में फैल जाते है.
  • कुछ वायरस या बैक्टीरिया हवा में रहते है, वहीं कुछ अन्य लोगों या किसी वस्तु आदि पर रह जाते है.
  • जब आप रोगजनक जीवों वाली हवा में सांस लेते हैं, तो वे आपके अंदर आ जाते हैं.
  • सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद वस्तुओं पर ऐसा होना का खतरा ज्यादा होता है.
  • इंफेक्टिड स्थान या वस्तु को छूने के बाद अपनी आंख, नाक या मुंह को छूने से यह फैल जाती है.
  • इन रोगों को हवा में फैलने के कारण कंट्रोल कर पाना बहुत कठिन होता है.

वायुजनित रोगों के प्रकार – what are the types of airborne disease in hindi

कई रोग हवा में फैल सकते है जैसे –

कोविड-19 कोरोनावायरस

  • इसके लिए दो लोगों के बीच में 2 गज की दूरी जरूरी होती है.
  • पिछले कुछ महीनों में यह दुनियाभर में तेजी से फैला है.
  • इसके लक्षणों में बुखार, थकान, खांसी, सांस लेने में परेशानी आदि शामिल है.
  • लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क कर टेस्ट कर पता लगाया जाना चाहिए.

चिकनपॉक्स

  • चिकनपॉक्स वेरिसेला-जोस्टर वायरस के कारण होता है.
  • यदि आपके पास चिकनपॉक्स है, तो आप टेलटेल रैश होने से पहले एक या दो दिन के लिए इसे फैला सकते हैं.
  • बीमारी के विकास के लिए एक्सपोजर के बाद 21 दिनों तक का समय लगता है.
  • ज्यादातर लोगों को केवल एक बार चिकनपॉक्स होता है और फिर वायरस निष्क्रिय हो जाता है.
  • वायरस के जीवन में बाद में पुन: सक्रिय होने पर आपको दर्दनाक त्वचा की कंडीशन हो जाती है जिसे फुंसी कहा जाता है.
  • इन संक्रमित फुंसी के संपर्क में आने के कारण आपको चिकनपॉक्स हो सकता है.

सर्दी जुखाम

  • मौसम के बदलने के साथ यह फैलता है.
  • साल में कम से कम एक बार यह किसी न किसी को होता ही है.

टीबी

  • ट्यूबरक्लोसिस एक हवा में फैलने वाली बीमारी है.
  • यह बैक्टीरियल इंफेक्शन आसानी से नहीं फैलता है.
  • टीबी से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में लंबे समय तक रहने पर यह हो सकती है.
  • आप बिना बिमार पड़े या दूसरों को संक्रमित किए बिना इसके संपर्क में आ सकते है.
  • कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को इसके होने के मौके अधिक होते है.
  • लक्षण दिखने में कुछ दिन, जबकि कुछ लोगो में एक्टिव होने में महीने या सालों लग सकते है.

गलसुआ (मम्प्स)

  • गलसुआ एक बहुत ही संक्रामक वायरल रोग है. 
  • लक्षण प्रकट होने से पहले और 5 दिन बाद तक आप इसे फैला सकते हैं.
  • हालांकि, इसकी वैक्सीन भी उपलब्ध है.

इंफ्लूएंजा

  • हम में से अधिकतर लोगों को फ्लू का अनुभव होता है.
  • यह आसानी से फैल जाता है और 5 से 7 दिनों तक रहता है.
  • कमजोर इम्यून सिस्टम के मामलों में ठीक होने में समय लग सकता है.
  • फ्लू के कई प्रकार होते है जो बार बार बदलते रहते है जिस कारण इम्यूनिटी विकसित होने में कठिनाई होती है.

डिप्थीरिया

  • रोग आपके रेस्पिरेट्री सिस्टम को नुकसान पहुँचा देता है और आपके हृदय, किडनी और नसों को नुकसान पहुंचा सकता है.

खसरा

  • खासकर भीड़-भाड़ की स्थिति में खसरा एक बहुत ही संक्रामक बीमारी है.
  • खसरा पैदा करने वाला वायरस हवा में या सतहों पर 2 घंटे तक सक्रिय रह सकता है.
  • खसरा के दाने दिखने के 4 दिन पहले और 4 दिन पहले तक आप इसे दूसरों तक पहुंचा सकते हैं.
  • लोगों को खसरा जीवन में सिर्फ एक ही बार होता है.
  • इसकी भी वैक्सीन मौजूद है.

कुकर खांसी

  • सांस की यह बीमारी वायुमार्ग की सूजन का कारण बनती है जिससे लगातार खांसी होती है.
  • खांसी शुरू होने के बाद लगभग 2 सप्ताह तक यह संक्रामकता की ऊंचाई पर रहती है.

हवा में फैलने वाले रोगों के लक्षण क्या है – what are the symptoms of airborne disease in hindi

  • चिकनपॉक्स – रोगी को रैश होते है जो चेस्ट, चेहरे, कमर से शुरू होकर पूरे शरीर में फैल जाते है. जो कुछ दिनों में फ्लूइड से भर जाते है. इन्हें साफ होने में एक हफ्ते का समय लग सकता है.
  • खसरा – संपर्क में आने के बाद इसमें 7 से 18 दिन का समय लग सकता है. यह चेहरे या गर्दन से शुरू होकर कुछ दिनों में फैल जाता है. हफ्ते भर के भीतर साफ हो जाता है. खसरे के कारण कान में इंफेक्शन, डायरिया, अंधापन, दिमाग की सूजन, पानी की कमी, गंभीर रेस्पिरेट्री इंफेक्शन हो सकता है.
  • कुकुर खांसी – इसमें बहुत तेज खांसी होती है जिसमें जबरदस्ती तेजी से हवा जाती है.
  • टीबी – इसके लक्षण इससे प्रभावित अंग पर निर्भर करते है जिस कारण खांसने के दौरान ब्लड आना हो सकता है.
  • डिप्थीरिया – इस कंडीशन में गले में सूजन आ जाती है. जिससे निगलने या सांस लेने में परेशानी होती है.
  • हवा में फैलने वाली बीमारियों से जटिलताएं बहुत युवा, अधिक आयु वाले समेत कमजोर इम्यून सिस्टम वाले रोगियों को प्रभावित कर सकती है.

हाव में पैलने वाली बीमारियों के आम लक्षण में –

  • छींकना
  • गले में खराश
  • शरीर में दर्द
  • भूख कम लगना
  • सिरदर्द
  • बुखार
  • थकान
  • ग्रंथियों की सूजन
  • नाक बहना
  • कंजेशन
  • खांसी
  • नाक, गले, साइनस या फेंफड़ो की सूजन

सामान्य हवा में फैलने वाले रोगों का इलाज – what are the treatment for common airborne diseases in hindi

  • अधिकतर हवा में फैलने वाले बीमारियों में आपके शरीर को रेस्ट और फ्लूइड की जरूरत पड़ती है.
  • अन्य उपचार रोग की गंभीरता पर निर्भर करता है जो डॉक्टर द्वारा लक्षणों के आधार पर दिया जाता है.
  • कुछ वायुजनित रोग जैसे चिकनपॉक्स का कोई विशेष उपचार नहीं होता है.
  • हालांकि, चिकनपॉक्स में लक्षणों से राहत के लिए दवाएं और अन्य सहायक सावधानियों का जरूरत होती है.
  • फ्लू आदि का इलाज एंटीवायरल ड्रग के साथ किया जा सकता है.
  • बच्चों में कुकुर खांसी का इलाज करने के लिए एंटीबायोटिक्स की जरूरत पड़ सकती है.
  • टीबी की बात करें तो इसके इलाज में दवाओं की जरूरत पड़ती है.
  • टीबी के इलाज में कोर्स को पूरा करना जरूरी होता है जबकि टीबी के कुछ प्रकार ड्रग प्रतिरोधी है.
  • कोर्स पूरा न करने पर टीबी के लक्षण फिर से हो सकते है.
  • डिप्थीरिया का निदान जल्दी होने पर इलाज कामयाब होता है. इसके इलाज में एंटीबायोटिक्स और एंटीटॉक्सिन शामिल है.

हवा में फैलने वाले रोगों से बचाव कैसे होता है – what you can do to prevent spreading an air borne disease in hindi

  • संक्रमित रोगी से उचित दूरी बनाए रखें.
  • बीमार होने पर घर में रहें.
  • बाहर निकलते समय मास्क जरूर लगाएं, इससे न आप दूसरे संक्रमण के संपर्क में आते है और न ही फैलाते है.
  • खांसते या छींकते समय नाक को कवर रखें.
  • टिश्यू या कोहनी का इस्तेमाल करें.
  • खांसने या छींकने के बाद हाथों को कम से कम 20 सेकेंड तक धोएं.
  • बिना हाथ धोए हाथों को चेहरे पर लगाने से बचें.
  • काफी सारे वायुजनित रोगों की वैक्सीन मौजूद है जिससे इनको कम किया जा सकता है.

अंत में

हवा में फैलने वाले रोग पूरे विश्व में होते है. इसके लिए जरूरी है कि अपने आस पास स्वच्छता रखें. कुछ हवा में फैलने वाले रोग कुछ हफ्तों में चले जाते है. जबकि कुकुर खांसी जैसे रोग महीनों तक रहते है. कमजोर इम्यूनिटी होने पर गंभीर जटिलताएं और रिकवरी में लंबा समय लग सकता है. ऐसे में अच्छी मेडिकल सहायता की जरूरत होती है. कुछ मामलों में वायुजनित रोग जान की हानि भी कर सकते है.