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मलाशय (गुदा) कैंसर के बारे में सबकुछ – anal cancer in hindi

मलाशय (गुदा) कैंसर के बारे में सबकुछ – anal cancer in hindi

इस लेख में आप जानेंगे गुदा (एनल) कैंसर क्या होता है, इसके प्रकार, कारण, लक्षण, रिस्क फैक्टर, निदान, उपचार और बचाव –

गुदा कैंसर क्या होता है – what is anal cancer in hindi

  • जब गुदा के टिश्यू में सौम्य या कठोर ट्यूमर वाले कैंसर सेल्स बनने लगते है तो उसे गुदा कैंसर कहा जाता है.
  • गुदा हमारी आंतों के अंत में होता है जहां से मानव शरीर से मल बाहर आता है.
  • एनल कैंसर बहुत रेयर होता है लेकिन यह हो सकता है और साथ ही दूसरे भागों तक फैल सकता है.
  • कुछ मामलों में बिना कैंसर वाले एनल कैंसर भी समय के साथ कैंसर वाले हो जाते है.

गुदा कैंसर के प्रकार – what are the types of anal cancer in hindi

गुदा कैंसर के कई प्रकार होते है जिन्हें विकसित ट्यूमर के आधार पर बताया जाता है. शरीर में होने वाली असामान्य ग्रोथ को ट्यूमर (गांठ) कहा जाता है. यह गांठे सौम्य या कठोर हो सकती है. उपचार न मिलने पर समय के साथ कठोर ट्यूमर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल जाते है. ट्यूमर निम्न प्रकार के होते है –

  • सौम्य ट्यूमर – अधिकतर सौम्य ट्यूमर बिना कैंसर वाले होते है. एनस के अंदर यह पॉलीप्स, स्किन टैग, ग्रैनुलर सेल ट्यूमर और जेनिटल वॉर्ट्स में होते है.
  • बेसल सेल कार्सिनोमा – य़ह स्किन कैंसर का प्रकार है जो सूरज की रोशनी में खुले रहने वाली स्किन को प्रभावित करता है. इसलिए यह बहुत ही ज्यादा रेयर एनल कैंसर का प्रकार होता है.
  • कैंसर पूर्व कंडीशन – यह सौम्य ट्यूमर पर निर्भर करती है जो समय के साथ कठोर हो जाते है.
  • एडेनोकार्सिनोमा – यह एनस के आसापस मौजूद ग्लैंड से शुरू होने के अलावा बहुत ही रेयर होता है.
  • स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा – एन कैनाल को जोड़ना वाले सेल्स की असामान्य ग्रोथ के कारण कठोर ट्यूमर हो जाते है जिन्हें स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा कहा जाता है.
  • बोवेन रोग – इस कंडीशन के दौरान एनल टिश्यू पर असामान्य सेल ग्रोथ होने लगती है जिसकी लेयर गहरी नही होती है.

गुदा कैंसर के कारण – what are the causes of anal cancer in hindi

  • दूसरे कैंसर कारकों की ही तरह यह असामान्य सेल्स की ग्रोथ के कारण होता है.
  • इस तरह के असामान्य सेल्स बहुत तेज़ी से ट्यूमर के रूप में फैलते है.
  • साथ ही इनके दूसरे हिस्सों तक फैलने के आसार रहते है जिसके कारण शरीर के सामान्य फंक्शन प्रभावित हो सकते है.
  • इसके अलावा एचपीवी (सेक्सुअली ट्रांसमेटिड रोग) के कारण गुदा कैंसर हो सकता है.
  • इन सभी के अलावा दूसरे कैंसरों के एनल कैनाल तक फैलने पर भी गुदा कैंसर हो सकता है.
  • ऐसा तब होता है जब शरीर के दूसरे हिस्से में होने वाला कैंसर फैलते हुए गुदा तक पहुँच जाता है.

गुदा कैंसर के लक्षण – what are the symptoms of anal cancer in hindi

एनल कैंसर के लक्षण बवासीर, ईर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम समेत कई गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोग हो सकते है जिसमें –

  • पतले मल आना
  • रेक्टम से ब्लीडिंग
  • गुदा से डिस्चार्ज या खुजली
  • बाउल आदतों में बदलाव
  • गुदा के आसपास दर्द, प्रेशर या लम्प बनना 

अगर आपको नही पता कि इन लक्षणों का क्या कारण है तो ऐसे में आप डॉक्टर से बात करके पता लगा सकते है. जिसके बाद वह निदान करने के लिए टेस्ट कर सकते है.

गुदा कैंसर का रिस्क फैक्टर क्या होते है – what are the risk factors for anal cancer in hindi

एनल कैंसर किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों को इसके होने का रिस्क अधिक होता है –

स्मोकिंग

  • धुम्रपान करने वाले लोगों को गुदा कैंसर का हाई रिस्क रहता है.
  • स्मोकिंग छोड़ देने के बाद भी इसके आसार रहते है.

एचपीवी इंफेक्शन

  • यह वायरस का ग्रुप होते है जो सेक्स के जरिए ट्रांसमिट होने और इंफेक्शन के बाद शरीर में रहते है.
  • एनल कैंसर के अधिकतर मामलों में एचपीवी मौजूद होते है.
  • रूटीन पैप स्मीयर से पहले यह सर्वाइकल कैंसर का कारण होते है.

अधिक आयु

  • इसके अधिक मामले 50 साल से ज्यादा आयु वाले लोगों को होता है.

एचआईवी

  • इम्यून सिस्टम की कमजोरी के कारण एचआईवी वाले लोग गुदा कैंसर के हाई रिस्क पर होते है.

कमजोर इम्यून

  • इसके कारण शरीर रोगों को रोक पाने में असक्षम हो जाता है.
  • जिसके चलते रोगों का रिस्क बहुत अधिक हो जाता है.
  • अंग ट्रांसप्लांट और एचआईवी के कारण खराब इम्यूनिटी वाले लोगों में गुदा कैंसर आम है.

सेक्स करने

  • एक से अधिक सेक्स पार्टनर होने के अलावा एनल सेक्स करने से गुदा कैंसर का रिस्क बढ़ जाता है.
  • कंडोम आदि न पहनने के कारण एचपीवी के चलते एनल कैंसर का रिस्क बढ़ जाता है.

गुदा कैंसर का निदान कैसे होता है – how is anal cancer diagnosed in hindi

  • अधिकतर गुदा कैंसर के मामलों में रेक्टल ब्लीडिंग होती है.
  • जिन लोगों को गुदा में ब्लीडिंग, खुजली या दर्द होता है तो डॉक्टर के पास जाकर चेकअप करवा सकते है.
  • अन्य मामलों में रूटीन चेकअप के दौरान इसका पता लग जाता है.
  • पुरूषों में प्रोस्टेट जांच के दौरान एनल कार्सिनोमा का पता लगा सकते है.
  • पुरषों और महिलाओं दोनों में रेक्टल परीक्षा के दौरान डॉक्टर गुदा में फिंगर डालकर लम्प या किसी विकास का पता लगा लेते है.
  • एनल कैंसर का पता लगाने के लिए पैप स्मीयर टेस्ट किया जा सकता है.
  • कॉटन लेकर एनल लिनिंग से सेल्स को कलेक्ट किया जाता है जिसके बाद असामानता को देखा जाता है.
  • असमानता होने पर सेल की बायोप्सी की जा सकती है जिससे गुदा कैंसर का पता लगाया जा सकें.

गुदा कैंसर का इलाज – how is anal cancer treated in hindi

इसका कोई इलाज नही है लेकिन गुदा कैंसर निदान किए गए लोग हेल्दी लाइफ जी सकते है. आयु और कैंसर स्टेज के आधार पर डॉक्टर आपको कई उपचार दे सकते है जिसमें –

कीमोथेरेपी

  • इसका उपयोग कैंसर सेल्स को मारने और फिर से विकास को रोकने के लिए किया जाता है.
  • इसे शरीर में इंजेक्शन या ओरली भी दिया जा सकता है.
  • लक्षणों को कम करने के लिए दर्द निवारक दिए जा सकते है.

सर्जरी

  • गुदा से ट्यूमर को हटाने के लिए सर्जरी की जा सकती है जिसमें कुछ साथ के हेल्दी टिश्यू को भी निकाला जाता है.
  • गुदा के सबसे निचले भाग में होने वाला कैंसर जो फैलता नही है, ऐसे रोगियों में सर्जरी होना आम है.
  • कैंसर की शुरूआती स्टेज में यह सबसे बेहतर की जा सकती है.

वैकल्पिक थेरेपी

  • गुदा समेत कई प्रकार के कैंसर में रेडिएशन थेरेपी आम है.
  • एक्स-रे और अन्य रेडिएशन शरीर में कैंसर को मारते है जिसके साथ वह आसपास के टिश्यू को भी मार देते है.
  • इस इलाज में कोई चीरा आदि नही लगाया जाता है.

गुदा कैंसर की रोकथाम कैसे करें – what are the prevention of anal cancer in hindi

एनल कैंसर से बचाव करने का कोई ठोस तरीका नही है लेकिन इसके रिस्क को निम्न तरीकों से कम किया जा सकता है –

धुम्रपान न करने

  • स्मोकिंग न करें और साथ ही एक सिगरेट को अधिक लोग न पीएं. 

सुरक्षित सेक्स

एचपीवी टीका

  • एचपीवी के टीके लगवाए जा सकते है यह 9 से 26 साल की आयु वाले पुरूष और महिला दोनों के लिए है.
  • इससे एनल कैंसर के कारण वाली एचपीवी से बचाव होता है.

अंत में

गुदा कैंसर का निदान होने के बाद काफी सारे लोग लंबा और स्वस्थ जीवन जीते है. इसके लिए जरूरी है कि कैंसर की पहचान शुरूआत मे ही हो जाए. इसके अलावा अगर आपको फैमिली हिस्ट्री, आयु समेत अन्य मुद्दों के कारण एनल कैंसर का रिस्क है तो आपको अपने डॉक्टर से बात कर सलाह लेनी चाहिए.