एंटीबायोटिक्स डॉक्टर द्वारा प्रीस्क्राइब दवाएं होती हैं जो बैक्टीरिया के कारण होने वाले संक्रमण के इलाज में मदद करती हैं. एंटीबायोटिक्स का उपयोग कुछ कॉमन इंफेक्शन जैसे निमोनिया, ब्रोंकाइटिस और यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के इलाज में किया जाता है.

यह इंफेक्शन के कारण वाले बैक्टीरिया को मारकर या उसे विकसित होने से रोककर काम करते है.

एंटीबायोटिक्स का उपयोग बैक्टीरियल इंफेक्शन के इलाज में किया जाता रहा है. यह वायरस के कारण होने वाले इंफेक्शन पर असर नहीं करते है.

वायरस के कारण होने वाले इंफेक्शन में सर्दी जुकाम, फ्लू, नाक बहना आदि होता है.

इसका अलावा एंटीबायोटिक्स के कई ग्रुप, श्रेणी आदि होते है. जिनके अलग अलग साइड इफेक्ट होते है. दूसरों की तुलना में कुछ विशेष एंटीबायोटिक्स के साइड इफेक्ट विशेष होते है.

आज इस लेख में आप जानेंगे एंटीबायोटिक्स के आम और गंभीर साइड इफेक्ट्स के बारे में –

एंटीबायोटिक्स के आम साइड इफेक्ट – antibiotics side effects

बुखार

  • कई दवाओं के कारण बुखार होना सबसे आम साइड इफेक्ट है.
  • दवाओं के प्रति एलर्जिक रिएक्शन या खराब साइड इफेक्ट के कारण बुखार हो सकता है.
  • एंटीबायोटिक्स का सेवन करने पर बुखार आने पर वह अपने आप चला जाता है.
  • लेकिन बुखार के 1 से 2 दिन तक रहने, सांस लेने में परेशानी, स्किन रैश आदि होने पर डॉक्टर से मिलकर बात करनी चाहिए.

पेट खराब होना

  • कई एंटीबयोटिक्स के कारण यह हो सकता है.
  • जिसके कारण मतली, उल्टी, डायरिया, ऐंठन आदि हो सकते है.
  • ऐसे में डॉक्टर से पूछे कि एंटीबायोटिक्स को भोजन से पहले लेना है या बाद में.
  • कुछ विशेष एंटीबायोटिक्स का सेवन करने से पहले भोजन खाने से साइड इफेक्ट्स में कमी आती है.
  • हालांकि कुछ एंटीबायोटिक्स को खाली पेट ही लिया जाता है.
  • डॉक्टर द्वारा किसी भी एंटीबायोटिक्स के प्रीस्क्राइब किए जाने पर डॉक्टर से पूछ लें कि इन्हें भोजन के साथ या बिना लेना है. 

डॉक्टर से कब मिलें

  • एंटीबायोटिक्स को लेने के बाद हल्का डायरिया हो सकता है.
  • जबकि डायरिया गंभीर होने पर बुखार, मतली, पेट में दर्द, ऐंठन या मल में खून या म्यूकस दिख सकता है.
  • यह लक्षण आंतो में बैक्टीरिया के बहुत अधिक बढ़ जाने के कारण हो सकते है.

वेजाइनल यीस्ट इंफेक्शन

  • महिलाओं द्वारा एंटीबायोटिक के सेवन से योनि में अच्छे बैक्टीरिया की मात्रा कम हो सकती है.
  • जिस कारण इंफेक्शन होने का रिस्क बढ़ जाता है.
  • इसके लक्षणों में सेक्स के दौरान दर्द, रैश, सूजन, लाल होना, पेशाब के दौरान जलन, योनि में खुजली हो सकते है.
  • योनि से सफेद डिस्चार्ज आदि भी यीस्ट इंफेक्शन का अन्य संकेत है.
  • इसके लिए कई एंटीफंगल क्रीम आदि लगाई जा सकती है.

रोशनी के प्रति संवेदनशीलता

  • एंटीबायोटिक्स लेने पर आपको लाइट के प्रति संवेदनशीलता हो सकती है.
  • जिस कारण आपकी आंखों में लाइट अधिक ब्राइट दिख सकती है.
  • इसके अलावा आपकी स्किन सनबर्न के लिए भी संवेदनशील हो सकती है.
  • एंटीबायोटिक्स का सेवन बंद करने के बाद लाइट के प्रति संवेदनशीलता चली जाती है.
  • अगर आपको पता है कि आपको बाहर सूरज की रोशनी में निकलना है तो सावधानी बर्ते.
  • स्किन पर सनस्क्रीन लगाई जा सकती है.
  • आंखों पर चश्मा या सिर पर टोपी पहनी जा सकती है.

दांतो का रंग बदलना

  • टेट्रासाइक्लिन और डॉक्सीसाइक्लिन जैसे एंटीबायोटिक्स उन बच्चों में स्थायी दाँत की बदबू का कारण बन सकते हैं जिनके दाँत अभी भी विकसित हो रहे हैं. (जानें – मुंह की गंद को ठीक करने के उपाय)
  • यह प्रभाव 8 साल से छोटे बच्चों में अधिकांश देखने को मिलता है.
  • गर्भवती महिला द्वारा इन एंटीबायोटिक्स को लेने से बच्चे के पहले दांत ऐसे विकसित हो सकते है.
  • ऐसे में डॉक्टर से बात करके निर्देशानुसार दवाएं ली जानी चाहिए.

एंटीबायोटिक्स के गंभीर साइड इफेक्ट

ब्लड रिएक्शन

  • कुछ एंटीबयोटिक्स के कारण ब्लड में बदलाव आ सकते है.
  • उदाहरण के लिए वाइट ब्लड सेल्स के नंबर कम होना जिस कारण इंफेक्शन बढ़ जाता है.
  • इसके अलावा प्लेटलेट का लेवल कम हो सकता है जिस कारण ब्लीडिंग, धीमी ब्लड क्लोटिंग, कटाव आदि हो सकता है.
  • इन रिएक्शन से बचने के लिए और कमजोर इम्यून सिस्टम होने पर इन्हे लेने से पहले डॉक्टर से बात करें.
  • इसके अलावा गंभीर ब्लीडिंग जो रूकती नहीं है, रेक्टम से ब्लीडिंग आदि होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें.

टेंडोनाइटिस

  • टेंडन की इंफ्लामेशन या परेशानी को टेंडोनाइटिस कहा जाता है.
  • टेंडन पतले कॉर्डस होते है जो पूरे शरीर में हड्डी को मांसपेशी से जोड़ते है.
  • एक विषेश एंटीबायोटिक को टेंडोनाइटिस का कारण माना जाता है.
  • जिन लोगों को पहले से ही किडनी फेलियर है उनको इसका रिस्क अधिक होता है.
  • इसके अलावा किडनी, हार्ट या फेफड़ों के ट्रांसप्लांट, स्टेरॉइड लेने, 60 वर्ष से अधिक आयु होने या पहले से कोई टेंडन समस्या होने आदि पर रिस्क अधिक होता है.
  • दवा लेने से पहले डॉक्टर से बात करें और सवाल पूछें.
  • दवा लेने पर किसी लक्षण के खराब होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.

एलर्जिक रिएक्शन

  • यह किसी भी दवा के साथ हो सकते है.
  • कुछ रिएक्शन हल्के हो सकते है वहीं कुछ गंभीर भी होते है जिनमें मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ती है.
  • किसी एंटीबायोटिक्स से एलर्जी होने पर आपको लक्षण हो सकते है.
  • लक्षणों में सांस लेने में परेशानी, हाइव्स, जीभ और गले की सूजन हो सकती है.
  • वहीं हाइव्स के हो जाने, निगलने में परेशानी या सूजन होने पर दवा लेना बंद कर दें और डॉक्टर से बात करें.

दौरे

  • किसी एंटीबायोटिक्स के कारण दौरे पड़ने की समस्या होना रेयर है लेकिन यह हो सकता है.
  • दौरो का इतिहास होने आदि के मामलों में एंटीबायोटिक्स शुरू करने से पहले डॉक्टर को सूचित करें.

हार्ट की समस्या

  • रेयर मामलों में कुछ विशेष एंटीबायोटिक्स के कारण हार्ट समस्या जैसे अनियमित हार्टबीट या लो ब्लड प्रेशर हो सकता है.
  • पहले से किसी हार्ट कंडीशन होने पर डॉक्टर को सूचित कर दें जिससे वह सही दवा प्रीस्क्राइब करें.
  • हार्ट में दर्द होने, अनियमित दिल की धड़कन या सांस लेने में परेशानी होने पर डॉक्टर से बात जरूर करें.

स्टीवन जॉसन सिंड्रोम

  • यह काफी रेयर है लेकिन यह स्किन और म्यूकस मेमब्रेन का गंभीर डिसऑर्डर होता है.
  • म्यूकस मेमब्रेन आपके शरीर के कुछ हिस्सों जैसे आपकी नाक, मुंह, गले और फेफड़ों की नम परत होती है.
  • यह किसी दवा या एंटीबायोटिक्स के कारण रिएक्शन भी हो सकता है.
  • इस रोग में फ्लू जैसे लक्षण बुखार और गले में खराश होना होते है.
  • लक्षणों में फुंसी समेत दर्द वाले रैश जो पूरे शरीर पर फैलते है.
  • अन्य लक्षण में बुखार, खांसी, चेहेर और जीभ की सूजन, स्किन में दर्द, हाइव्स, मुंह और गले में दर्द हो सकते है.
  • आप इसे कंडीशन से बचाव नहीं कर सकते है लेकिन रिस्क को कम कर सकते है.
  • कमजोर इम्यून सिस्टम होने पर इस रोग का रिस्क अधिक रहता है.
  • पहले या परिवार में इस रोग की हिस्ट्री होने पर भी यह हो सकता है.
  • इस रोग का अंदेशा होने पर डॉक्टर से बात कर जानकारी लेनी चाहिए.

डॉक्टर से बात करें

यदि आपका डॉक्टर आपके लिए एंटीबायोटिक्स निर्धारित करता है, तो जान लें कि साइड इफेक्ट्स को प्रबंधित करने के तरीके हैं. पहले से किसी दवा के मामलों में डॉक्टर द्वारा पहले से ली जा रही दवाएं, साइड इफेक्ट्स के बारे में पूछ सकते है. जिसके आधार पर उनके द्वारा दवाएं लिखी जाएंगी.

References –

 

Share: