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रक्तदान करने के फायदे – benefits of donating blood in hindi

रक्तदान करने के फायदे – benefits of donating blood in hindi

वैसे तो जिन लोगों को खून की जरूरत होती है उनको रक्तदान करने के कई हेल्थ बेनेफिट्स होते है. किसी भी एक व्यक्ति के रक्तदान करने से कई सारी लोगों की लाइफ को बचाया जा सकता है. 

रक्तदान का फायदा न सिर्फ इसे लेने लेने वाले बल्कि ब्लड को दान करने वाले को भी होता है. आज इस लेख में हम आपको बताने वाले है ब्लड डोनेट करने के फायदे –

रक्तदान करने के फायदे – benefits of donating blood in hindi

ब्लड डोनेट करने के मानसिक और शारीरिक लाभ होते है. साथ ही इससे निम्न लाभ होते है –

फ्री हेल्थ चेकअप

  • रक्तदान करने से पहले हेल्थ स्क्रिनिंग के लिए जाने की जरूरत होती है. 
  • जिसमें नब्ज, ब्लड प्रेशर, हिमोग्लोबिन लेवल और शरीर का तापमान देखा जाता है.
  • इस प्रक्रिया से रोगों का पता लगाने में भी मदद मिलती है.
  • इसके अलावा ब्लड को कई रोगों के लिए टेस्ट किया जाता है जैसे हेपेटाइटिस सी, हेपेटाइटिस बी, एचआईवी, साइफिल्स, वेस्ट नाइल वायरस आदि.

रक्तदान के साइड इफेक्ट – side effects of donating blood in hindi

  • हेल्दी लोगों के लिए सुरक्षित होती है और इससे किसी रोग का खतरा नही होता है.
  • हर एक डोनर के लिए अलग किट इस्तेमाल होती है.
  • कुछ लोगों को रक्तदान के बाद चक्कर आना, मतली आदि का अनुभव हो सकता है. जो सिर्फ कुछ मिनटों तक रहता है.
  • नीडल लगाने वाली जगह पर आपको थोड़ा दर्द हो सकता है.
  • प्रेशर लगाने और हाथ को ऊपर करने से यह रूक जाता है.
  • सिर घूमना बने रहने या खाने पीने के बाद भी मतली होने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
  • नीडल वाले एरिया पर आपको बम्प आदि हो सकता है.
  • हाथ में दर्द, सुन्न होना या टिंगलिंग होने पर भी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

क्या रक्तदान से हार्ट रोग का रिस्क कम हो जाता है – does donating blood lower your risk of heart disease in hindi

  • रिसर्च में हार्ट रोग और हार्ट अटैक का रिस्क कम होने के परिणाम मिले जुले हैै.
  • जबकि 2017 के एक अध्ययन के अनुसार रेगुलर रक्तदान करने से बढ़े हुए कोलेस्ट्रोल लेवल के कारण हार्ट रोग का रिस्क बढ़ सकता है.
  • नियमित रक्तदान से आयरन को स्तर लो हो जाते है, 2013 में हुए अध्ययन के अनुसार इससे हार्ट अटैक का रिस्क कम होता है.
  • जबकि हाई आयरन लेवल से हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ जाता है.

रक्तदान के दौरान

इसके लिए आपको पहले रजिस्टर करना पड़ता है. जिसमें मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच आदि किए जाते है. इसकी प्रक्रिया के लिए –

  • आपको रिकालाइनिंग चेयर पर बैठाया जाता है, जहां पर आप लेटकर या बैठकर रक्तदान कर सकते है.
  • जहां पर नीडल लगानी होती है उस एरिया को साफ किया जाता है.
  • जिसके बाद उस जगह पर नीडल डाली जाती है.
  • आप बैठकर या लेटे रहकर ब्लड को थैली में जमा होते हुए देख सकते है.
  • इस प्रक्रिया में 8 से 10 मिनट का समय लगता है.
  • जब थैली में ब्लड भर जाता है तब मेडिकल स्टाफ उस नीडल को हटा देता है.
  • इसके बाद नीडल वाले स्थान पर बैंडडेज लगाया जाता है.

इसी प्रक्रिया के जरिए अन्य डोनेशन भी किए जाते है जिसमें –

  • प्लाजमा डोनेशन
  • डबल रेड सेल डोनेशन
  • प्लेटलेट डोनेशन शामिल है.

डोनेशन हो जाने के बाद आपको स्नैक या ड्रिंक आदि दी जाती है और 10 से 15 मिनट रेस्ट करने के लिए बोला जाता है. बेहोशी या मतली की स्थिति में लेटे रहना बेहतर होता है.

रक्तदान से पहले क्या पता होना चाहिए – what to know before you donate in hindi

  • 18 से अधिक आयु होने के अलावा अपना ब्लड ग्रुप पता होना.
  • 45 किलो से अधिक वजन होना.
  • किसी मेडिकल कंडीशन होने पर उसकी जानकारी.
  • हाल में ली जा रही किसी भी प्रकार की दवा की जानकारी.
  • एक के बाद दूसरी पूरी ब्लड डोनेशन करने में कम से कम 8 हफ्तों का समय होना चाहिए.
  • वही रेड सेल डोनेशन के लिए 16 हफ्तों का समय होना चाहिए.
  • प्लेटलेट काउंट हर 7 दिन में डोनेट किया जा सकता है.

ब्लड डोनेट करने से पहले

आपके लेटे होने पर मेडिकल स्टाफ आपके हाथ पर नीडल लगाएंगे जिसके दौरान आप बैठ या लेटे रह सकते है. इस दौरान आप गाना सुनने, पढ़ने या दूसरे से बात आदि कर सकते है इससे ब्लड डोनेशन प्रक्रिया में आसानी रहती है.