इस लेख में आप जानेंगे सर्वाइकल कैंसर क्या है, लक्षण, कारण, एचपीवी, निदान और बचाव –

सर्वाइकल कैंसर क्या होता है? – what is cervical cancer?

  • महिला शरीर में वेजाइना और यूट्रस के बीच एरिया को सर्विक्स कहा जाता है.
  • सर्विक्स में मौजूद सेल्स असामान्य रूप से कई गुना तेजी से बढ़ने लगते है तो उसे सर्वाइकल कैंसर विकसित होने के रूप में देखा जाता है. 
  • सर्वाइकल कैंसर का इलाज या निदान न होने पर इससे जान को खतरा हो सकता है.
  • एक विशेष प्रकार का वायरस जिसे एचपीवी कहा जाता है, लगभग सभी प्रकार के सर्वाइकल कैंसर मामलों का कारण बनता है. (जानें – एचपीवी टेस्ट के बारे में)
  • डॉक्टर द्वारा वायरस और प्रीकैंसर सेल्स का पता लगाकर उचित उपचार और फिर से होने से बचाव किया जा सकता है.

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण क्या होते है? – what are the symptoms of cervical cancer?

  • जब तक सर्वाइकल कैंसर एडवांस स्टेज तक नहीं पहुंचता है, अधिकांश रूप से तब तक लक्षण नहीं दिखते है.
  • महिलाओं द्वारा इसके लक्षण को दूसरी समस्या से भ्रमित किया जा सकता है जैसे मासिक धर्म चक्र, यीस्ट इंफेक्शन या यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन आदि.
  • विशेषज्ञों के अनुसार, सभी महिलाओं द्वारा नियमित रूप से सर्वाइक कैंसर की स्क्रीनिंग की जानी चाहिए.
  • नीचे बताए गए लक्षणों का अनुभव करने पर डॉक्टर से सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग के लिए बात करनी चाहिए.

सर्वाइकल कैंसर से जुड़े लक्षणों के उदाहरण –

सर्वाइकल कैंसर के कारण क्या होते है? What are the causes of cervical cancer?

  • एचपीवी को अधिकांश सर्वाइकल कैंसर के कारणों में से एक माना जाता है.
  • वायरस के कुछ विशेष स्ट्रेनों के कारण सामान्य सर्वाइकल सेल्स असामान्य हो जाते है.
  • कई सालों और दशकों के दौरान यह सेल्स कैंसर कारक बन जाते है.
  • जो महिलाएं माता के गर्भ में एक विशेष प्रकार की दवा डीईएस के एक्सपोज होने के कारण सर्वाइकल कैंसर का रिस्क बढ़ जाता है.
  • डॉक्टरों द्वारा यह दवा गर्भपात से बचाव करने के लिए दी जाती है जो एक प्रकार की एस्ट्रोजन होती है.
  • डीईएस को सर्विक्स और योनि में असामान्य सेल्स विकास से लिंक किया जाता रहा है.
  • आप अपनी मां से बात कर जानकारी ले सकती हैं कि गर्भावस्था के दौरान उन्होंने यह दवा ली थी या नहीं.

एचपीवी

  • एचपीवी को सर्वाइकल कैंसर के कारण समेत अधिकतर मामलों में जननांग दाद का कारण भी बनते है.
  • एचीपीवी सेक्सुअली ट्रांसमिट होती है जो एनल, ओरल या वेजाइनल सेक्स से फैल सकती है.
  • 200 से अधिक प्रकार की एचपीवी मौजूद है और सभी सर्वाइकल कैंसर का कारण नहीं बनती है.
  • डॉक्टरों के अनुसार, एचीपीव दो प्रकार के होते है.
  • जबकि एचपीवी प्रकार 6 और 11 के कारण जननांग दाद होते है. साथ ही यह प्रकार कैंसर के कारण से जुड़े नहीं होते है और इन्हें कम रिस्क वाला माना जाता है.
  • एचपीवी प्रकार 16 और 18 को हाई रिस्क माना जाता है. एचपीवी संबंधी कैंसर जैसे सर्वाइकल कैंसर के सर्वाधिक मामले इस प्रकार के होते है.
  • इस प्रकार की एचपीवी के कारण एनल कैंसर, वुल्वर कैंसर, गले का कैंसर, वेजाइनल कैंसर शामिल होता है.
  • एचपीवी वाली काफी महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर नहीं होता है.
  • बिना किसी इलाज के यह वायरस दो साल या उससे कम समय में ठीक हो जाता है.
  • हालांकि, कुछ लोग एक्सपोजर के बाद लंबे समय तक संक्रमित रह सकते हैं.
  • एचपीवी और शुरूआती सर्वाइल कैंसर हमेशा लक्षण नहीं दिखाते है.
  • हालांकि, डॉक्टर द्वारा पैप स्मीयर के जरिए सर्विक्स की असामान्य सेल्स ग्रोथ की मौजूदगी को देखा जाता है.

सर्वाइकल कैंसर का निदान कैसे होता है?

  • पैप टेस्ट के जरिए डॉक्टरों द्वारा सेल्स का असामान्यता और कैंसर सेल्स का पता लगाया जा सकता है.
  • इसके दौरान कॉटन के टुकड़े जैसे डिवाइस से सर्विक्स की स्वैबिंग की जाती है.
  • इस स्वैब को लैब में टेस्ट के लिए भेजकर जांचा जाता है जिसमें प्रीकैंसर या कैंसर सेल्स का पता लगाया जाता है.
  • एचपीवी टेस्ट और पैप टेस्ट एक जैसे होते है जिसमें डॉक्टर सर्विक्स से सेल्स को एक ही तरीके से कलेक्ट करते हैं.
  • जिसके बाद लैब में टेस्ट कर सेल्स की मौजूदगी का पता लगाया जाता है.
  • एचपीवी वैक्सीन लगे होने के मामलों में भी नियमित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग की जरूरत होती है.
  • पैप टेस्ट की टाइमिंग को लेकर डॉक्टर से बात करनी चाहिए.
  • स्थितियों के आधार पर टेस्ट एक से अधिक बार किए जा सकते है.
  • कमजोर इम्यून सिस्टम वाली महिलाओं को यह टेस्ट अधिक बार हो सकता है जिसका कारण – एचआईवी, लंबे समय तक स्टेरॉयड इस्तेमाल, अंगों का ट्रांसप्लांट आदि.

सर्वाइकल कैंसर से बचाव कैसे होता है? – cervical cancer prevention

  • एचपीवी के रिस्क को कम कर सर्वाइकल कैंसर के रिस्क को कम किया जा सकता है.
  • इसके लिए एचपीवी वैक्सीन लगवाई जा सकती है जो 9 से 45 साल की आयु के बीच लगवाई जा सकती है.
  • सेक्सुअली एक्टिव होने से पहले वैक्सीन लगवाने से लाभ मिलता है.

सर्वाइकल कैंसर से बचाव के अन्य तरीके

  • रूटीन पैप टेस्ट कराने.
  • आयु और मेडिकल कंडीशन के आधार पर नियमित पैप टेस्ट किए जा सकते है.
  • सेक्स के दौरान कंडोम या डेंटल डैम का उपयोग करना चाहिए.
  • स्मोकिंग करने से बचना चाहिए.
  • स्मोकिंग करने वाली महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर का रिस्क अधिक होता है.

अंत में

शुरूआती स्टेज में पता लगने पर सर्वाइकल कैंसर का इलाज आसानी से किया जा सकता है. नियमित रूप से पैप टेस्ट से प्रीकैंसर सेल्स का पता लगाकर बचाव किया जा सकता है. पैप टेस्ट और स्क्रीनिंग की मदद से सर्वाइकल कैंसर के रिस्क को कम किया जा सकता है.

References –

 

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