Select Page

आई फ्लोटर के लक्षण, कारण और उपचार – eye floaters in hindi

आई फ्लोटर के लक्षण, कारण और उपचार – eye floaters in hindi

आई फ्लोटर्स क्या होता है? – what is eye floaters in hindi

अगर आसान शब्दों में समझने की कोशिश करें, जब हम किसी चीज़ को देखते है और बीच में हमें कुछ काले, ग्रे या अजीब डिज़ाइन के धब्बे दिखने लगते है तो उन्हें आई फ्लोटर कहा जाता है.

आंखों में होने वाले यह जालीदार, स्पॉट या रिंग की शेप वाले दृष्टि में होने वाले धब्बे, भूरे या काले रंग और आंखों में घूमने वाले तारों की तरह महसूस हो सकते है. 

इनके होने पर ऐसा लगता है कि यह उस चीज़ के ऊपर है लेकिन असल में यह हमारी आंखों के अंदर होते है. हालांकि ऐसा होना बहुत आम है और इससे कोई हानि नही होती है.

लेकिन यह आंखों के अंदर होने वाली कोई कंडीशन या कोई हाल की समस्या के चलते हो सकते है. आई फ्लोटर के लक्षणों के निम्न कारण हो सकते है –

आंखों के फ्लोटर्स के लक्षण -eye floaters symptoms in hindi

  • आयु – 50 के बाद इनका होना आम है.
  • पास की दृष्टि की समस्या – होने पर व्यक्ति को आई फ्लोटर का अनुभव होता है.
  • इंफ्लामेशन – इंफेक्शन के कारण आंखों में सूजन और जलन के चलते आई फ्लोटर हो सकते है.
  • डायबिटीक न्यूरोपैथी – शुगर के कारण रेटिना तक जाने वाली आंखों को नुकसान होता है जिससे यह हो सकते है.
  • आई इंजरी – आंखों पर किसी चोट या कोई दुर्घटना के कारण भी आई फ्लोटर हो सकते है.

अन्य लक्षण

  • दृष्टि में स्पॉट जो तार,गोल या काले रूप के रूप में दिखाई देते हैं यह आंखों में पारदर्शी फ्लोट होते है.
  • इन्हें देखने की कोशिश करने पर यह दिखने लगते है अन्यथा जल्दी दृष्टि के क्षेत्र से दूर चले जाते है.
  • यह स्पॉट सफेद दीवार या नीले आकाश जैसे सादे पृष्ठभूमि को देखते समय सबसे अधिक देखे जाते है.

फ्लोटर किसी भी गंभीर दृष्टि की समस्या का लक्षण हो सकते है. इनका अनुभव होने पर आंखों के डॉक्टर से सलाह लेकर उन्हें समस्या से अवगत कराना बहुत जरूरी होता है. इससे वह आपको बेहतर जानकारी दे पाएंगे.

आंखों के फ्लोटर्स के कारण – eye floaters causes in hindi

आयु से संबंधित –

  • आंखों के फ्लोटर्स का सबसे आम कारण विट्रीस में आयु से संबंधित परिवर्तन है.
  • विट्रियस पदार्थ की तरह जेली है जो आंखों को भरता है और गोल आकार को बनाए रखने में मदद करता है.
  • आयु के साथ आंशिक रूप से विट्रीस तरल पदार्थ और इससे आंखों की आंतरिक सतह से दूर खींच लिया जाता है.
  • जो अलग अलग रूप में आंखों से गुज़रने वाली रोशनी को अवरुद्ध करते हैं और रेटिना पर छाया डालते हैं.

आंख के पीछे सूजन –

  • आंख के पिछड़े क्षेत्र में यूवीए की परतों की सूजन को पश्चवर्ती यूवेइटिस कहा जाता है.
  • यह आंखों के फ्लोटर्स को जन्म दे सकता है.
  • पोस्टरियर यूवेइटिस आमतौर पर सूजन की बीमारी या संक्रमण के कारण होता है.

आंखों में खून बहना –

  • आंखों के रक्तस्राव के कोई कारण हो सकते है. कुछ रक्त वाहिका की चोट या समस्या हो सकती है.

आई फ़्लोटर्स का इलाज – eye floaters treatment in hindi

किसी रोग के कारण होने वाले आई फ्लोटर का इलाज उस समस्या के इलाज के साथ किया जाता है. कुछ मामलों में यह कोई समस्या पैदा नही करते है. लेकिन गंभीर मामलों में यह आंखों की हेल्थ को प्रभावित कर सकता है.

अगर आई फ्लोटर के कारण आपको दृष्टि की समस्या हो रही है तो इसके लिए कई इलाज उपलब्ध है जिससे इन्हें हटाया या कम नोटिस किया जा सकता है.

आई फ्लोटर्स को नज़रअंदाज़ करें

  • काफी सारे मामलों यह अपने आप गायब हो जाते है.
  • अगर यह नही जाते है तो हमारा दिमाग इन्हें इग्नोर करना सीख लेता है.
  • जिससे हमारी दृष्टि इन्हें अपना लेती है और हम इन्हें इतना ज्यादा नोटिस नही करते हैं.
  • आंखों का बचाव करने के लिए इनके साथ रहना बेहतर होता है.
  • लेकिन इनके कारण आंखों में समस्या होने पर आंखों के डॉक्टर से सलाह जरूर ली जानी चाहिए.

विटरेक्टॉमी

  • यह एक प्रकार की सर्जरी होती है जिसमें आई फ्लोटर को दृष्टि की लाइन से हटा दिया जाता है.
  • इस प्रक्रिया में आंखों के डॉक्टर विट्रीयस में छोटा से चीरा लगाकर आई फ्लोटर को ठीक कर देते है.
  • विट्रीयस एक क्लीयर, जेल जैसा तत्व होता है जो आंखों की शेप को गोल रखता है.
  • सर्जरी के दौरान डॉक्टर इसे दूसरे सॉल्यूशन से बदल देते है इससे आंखों की शेप बनी रहती है.
  • हालांकि जरूरी नही कि इससे हमेशा ही आई फ्लोटर ठीक हो जाएं.
  • लेकिन ब्लीडिंग या ट्रामा होने पर आई फ्लोटर के फिर से बनने के आसार रहते है.
  • यह सर्जरी फ्लोटर के गंभीर लक्षण होने पर की जाती है.

लेज़र थेरेपी

  • इसमें आई फ्लोटर पर लेज़र की जाती है.
  • जिससे वह टूट कर कम हो जाते है.
  • लेजर के आई फ्लोटर पर ठीक से टारगेट न होने पर रेटिना को नुकसान हो सकता है.
  • हालांकि इस प्रक्रिया को प्राथमिकता नही दी जाती है.
  • इसे लेने से पहले डॉक्टर से चर्च जरूर करनी चाहिए.

आंखों की समस्या से बचाव के टिप्स – tips to protect your eye health in hindi

कुछ रोगों से बचाव नही किया जा सकता है. लेकिन कुछ आसान टिप्स से दृष्टि का बचाव और आंखों की हेल्थ को बेहतर किया जा सकता है.

20-20-20 को फॉलो करें

  • दिन के दौरान हमारी आंखे बहुत सारे काम करती है. 
  • खासकर जो लोग पूरे दिन कंप्यूटर पर काम करते है.
  • इस रूल का मतलब होता है कि हर 20 मिनट बाद अपने कंप्यूटर के स्क्रीन को घूरना बंद करें.
  • जिसके बाद 20 फूट दूर कम से कम 20 सेकेंड के लिए देखना चाहिए.
  • ऐसा करने से आई फ्लोटर की समस्या से निजात मिलती है और आंखों की रोशनी भी बेहतर होती है.

प्रोटेक्टिव वीयर पहनें

  • अगर आप कोई स्पोर्टस आदि खेलते है या शारीरिक क्रिया करते है तो इंजरी से बचाव के लिए चश्मा आदि पहना जा सकता है.
  • इससे आंखों में गंदगी या इंफेक्शन के कारण होन वाले दृष्टि के नुकसान से बचा जा सकता है.

हेल्दी डाइट

  • आंखों के स्वास्थ के लिए हेल्दी डाइट बहुत जरूरी है.
  • सब्जियों और प्रोटीन में मिलने वाले पोषक तत्वों जैसे – ओमेगा-3 फैटी एसिड काफी कारगर होते है.
  • इससे मैकुलर डिजनरेशन से बचा जा सकता है.
  • इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्जियाँ, साल्मन और रस वाले फल को डाइट में शामिल करना चाहिए.
  • इन फूड़्स से न केवल दृष्टि बेहतर होती है बल्कि दृष्टि की समस्या होने वाले डिस्ऑर्डर भी कम होते है.

समय पर आंखों की जांच

  • कुछ लोग जब तक आंखों की कोई समस्या नोटिस नही करते तब तक आंखों की जांच करवाने नही जाते है.
  • लेकिन हमारी आंखों के लिए जरूरी है कि हर दो साल में एक बार आंखों के डॉक्टर के पास जाकर जांच करवाए. ऐसा खासकर 65 से अधिक आयु वाले लोगों के लिए है.
  • इसके अलावा अगर आपको आंखों के समस्या होने या रिस्क फैक्टर जैसे – हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज़ है तो ऐसे में आंखों की जांच समय पर जरूर करवानी चाहिए. 

ज्यादा पानी पीएं

  • मानव शरीर के स्वास्थ के लिए पानी बहुत जरूरी होता है. 
  • पानी पीने से हमारे शरीर को न सिर्फ हाइड्रेट रखने बल्कि इससे हमारा शरीर डिटॉक्स भी होता है.
  • शरीर में टॉक्सिक बनने के कारण भी आई फ्लोटर हो जाते है.
  • पानी का सेवन ज्यादा करने से शरीर बेहतर महसूस होता है.
  • साथ ही इससे आंखों की हेल्थ अच्छी होती है.

आई फ्लोटर में कब तुरंत इलाज की जरूरत पड़ती है – when are eye floaters an emergency in hindi

निम्न कंडीशन के साथ आई फ्लोटर ज्यादा खतरनाक हो सकते है –

  • विट्रियस डिटेच होना – यह रेटिना से धीरे धीरे होता है, तेज़ी से होने पर फ्लैश और फ्लोटर इसके लक्षण होते है.
  • आंखों में ब्लीडिंग – यह इंफेक्शन, इंजरी या ब्लड वेसल लीक होने से होता है.
  • रेटिनल टियर – विट्रियस के लिक्विड हो जाने पर, जेल का सैक रेटिन से बाहर आने लगता है. इसी स्ट्रेस के कारण यह रेटिना को टियर कर देता है.
  • रेटिना डिटेच होना – जल्दी से उपचार न मिलने पर यह आंख से पूरी तरह से डिटेच हो सकता है जिससे व्यक्ति अंधा हो जाता है.

जरूरी बातें

आई फ्लोटर बहुत लोगों को परेशान कर सकते है. लेकिन यह अपने आप चले जाते है. अगर आपको कोई स्वास्थ समस्या है तो ऐसे में तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह ली जानी चाहिए. इसके अलावा भी आंखों की कई समस्या आदि स्थिति के आधार पर वह आपको उचित उपचार बताएंगे.