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खांसी के नैचुरल घरेलू उपचार – home remedies for cough in hindi

खांसी के नैचुरल घरेलू उपचार – home remedies for cough in hindi

अगर आम नज़रिए से बात करें तो खांसना एक सामान्य प्रक्रिया है. जिससे गले में फसा हुआ बलगम और अन्य दूषक बाहर आ जाते है. हालांकि, लगातार खांसी रहना कई तरह की कंडीशन के लक्षणों को दर्शाता है जैसे – एलर्जी, वायरल इंफेक्शन या बैक्टीरियल इंफेक्शन आदि.

जरूरी नही कि हर बार खांसी किसी फेफड़ों की स्थिति के कारण हो, गैस्ट्रोफेगल रिफलक्स के कारण भी खांसी हो सकती है.

सर्दी, एलर्जी और साइनस इंफेक्शन के कारण होने वाली खांसी का ओटीसी दवाओं के साथ इलाज किया जा सकता है. लेकिन बैक्टीरियल इंफेक्शन के मामलों में एंटीबायोटिक्स की जरूरत पड़ती है. लेकिन ऐसे बहुत से लोग है जो इसके इलाज के लिए केमिलकल को लेना पसंद नही करते है.

आज इस लेख में हम आपको बताने वाले है खांसी के लिए घरेलू उपाय जिनकी मदद से आपको खांसी में आराम मिलता है.

खांसी के घरेलू उपचार – natural remedies for cough in hindi

पुदीना

  • इसके पत्तों को उपचारात्मक गुणों के लिए जाना जाता है.
  • यह गले को आराम पहुँचाने और खांसी में राहत देने के लिए जाना जाता है.
  • इससे गले में जमा म्यूकस टूटने में मदद मिलती है.
  • इसका लाभ उठाने के लिए पुदीना की चाय या पुदीना की स्टीम ली जा सकती है.
  • पुदीना स्टीम के लिए 150 एमएल गर्म पानी में 2-4 बूंद पुदीना डालें.
  • इसके बाद बर्तन के ऊपर अपना सिर रखकर ऊपर से कपड़ा या तौलिया डाल लें. जिससे स्टीम बाहर न निकलें.
  • इसकी लंबी सांसे खींचे. 

शहद

प्राचीन काल से शदह को गले की समस्याओं में वरदान माना जाता रहा है. एक अध्ययन के अनुसार, यह ओटीसी दवाओं की तुलना में ज्यादा कारगर है. इसके इस्तेमाल के लिए –

  • 2 चम्मच शहद को हर्बल चाय, गर्म पानी या नींबू पानी के साथ लिया जा सकता है.
  • नींबू पानी कंजेशन से राहत देने और शहद गले को आराम पहुँचाने में मदद करता है.
  • आप एक चम्मच शहद को सीधे भी खा सकते है
  • इसके अलावा इसे ब्रेड पर स्नैक के रूप में ले सकते है.

मार्शमैलो

  • प्राचीन काल से इस्तेमाल की जा रही हर्ब में से एक मार्शमैलो को खांसी और कफ के लिए किया जाता रहा है.
  • इसको लेकर कोई अध्ययन मौजूद नही है. लेकिन इस हर्ब को सुरक्षित माना जाता है.
  • मार्शमैलो को बच्चों को नही दिया जाता है.

प्रोबायोटिक्स

  • यह बहुत छोटे माइक्रोऑर्गेनीज़म होते है जिनके काफी सारे हेल्थ बेनेफिट्स होते है.
  • यह खांसी में सीधे आराम न पहुँचाकर, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल फ्लोरा को संतुलित करते है.
  • गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल फ्लोरा हमारे इंटेस्टाइन में मौजूद बैक्टीरिया होता है.
  • यह संतुलन हमारे शरीर के इम्युन सिस्टम फंक्शन को सपोर्ट करता है.
  • इसके अलावा प्रोयबायोटिक्स को दही के साथ मिलाकर लिया जा सकता है.

अजवायन के फूल

  • काफी सारे लोगों द्वारा इसका उपयोग सांसों से संबंधित समस्याओं के लिए किया जाता रहा है.
  • एक अध्ययन की मानें तो इसके अर्क से खांसी में राहत के साथ शॉर्ट टर्म ब्रोंकाइटिस में राहत मिलती है.
  • इसमें मौजूद फ्लेवानॉइड गले की मांसपेशियों को रिलैक्स करके सूजन कम करती है.
  • अजवायन चाय बनाने के लिए 2 चम्मच अर्क को 1 कप पानी में उबालें.
  • जिसके बाद 10 मिनट तक इसे कवर करके रखें.
  • इसके बाद आप इसका सेवन कर सकते है.   

पाइनएप्पल

  • इसमें मौजूद ब्रोमेलाइन खांसी को रोककर, गले में जमा म्यूकस को ठीला करता है.
  • इसका लाभ उठाने के लिए दिन में तीन बार 1 कप ताजा पाइनएप्पल का जूस पीना चाहिए.
  • इसके अलावा यह एलर्जी के कारण होने वाले साइनस में भी कारगर है.

नमक और पानी के गरारे

  • यह उपचार बहुत आसान होता है. 
  • नमक के पानी से गरारे करने से गले क खराश के कारण होने वाली खांसी में राहत मिलती है.
  • 1 कप गर्म पानी में ½ या ¼ चम्मच नमक मिलाकर घोल तैयार करें.
  • इस पानी से गरारे करें
  • ध्यान रहें कि 6 साल से कम आयु के बच्चों को गरारे नही कराने चाहिए.

खांसी से बचाव कैसे करें – how to prevent coughing in hindi

खांसी के इलाज को जानने से बेहतर है की इसकी रोकथाम के बारे में जाना जाएं. फ्लू से बचाव के लिए –

  • बीमार लोगों के संपर्क में आने से बचें. 
  • खुद बीमार या लक्षण होने पर बाहर जाने से बचें.
  • अपने मुंह और नाक को ढ़क कर रखें.
  • खुद को हाइड्रेट रखने के लिए तरल पदार्थ लें.
  • अपने आसपास साफ सफाई रखें.
  • थोड़े थोड़े समय पर अपने हाथों को साबून या सैनिटाइज़र से साफ करें.

डॉक्टर से संपर्क कब करें – when to call your doctor in hindi

खांसी के कारण सांस की समस्या होने या खांसी में खून आने पर इमरजेंसी मेडिकल ट्रीटमेंट लेना चाहिए. सांसों के इंफेक्शन होने पर शरीर में दर्द, बुखार हो सकते है. इसके अलावा कुछ लक्षणों जैसे –

  • ठंड लगना
  • पानी की कमी
  • तेज़ बुखार
  • कमज़ोरी
  • हरे या पीला बलगम
  • बीमार महसूस करना 

इसके अलावा कोई अन्य समस्या या उपचार शुरू करन से पहले डॉक्टर से सलाह ली जानी चाहिए.