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हाइड्रोसील – कारण, लक्षण, इलाज और घरेलू उपाय – Hydrocele Causes and Treatment in Hindi

हाइड्रोसील – कारण, लक्षण, इलाज और घरेलू उपाय – Hydrocele Causes and Treatment in Hindi

हाइड्रोसील क्या है? – What is hydrocele in hindi

हाइड्रोसील, पुरूषों के अंडकोष में होने वाली एक बीमारी है. यह एक अंडकोष या दोनों अंडकोषों (टेस्टिकल्स) में भी हो सकती हैं. इसमें अंडकोष में पानी जमा हो जाता है और अंडकोष की थैली फूल जाती हैं. 

यह शिशुओं में होना आम है. करीब 10 फीसदी से अधिक पुरूष हाइड्रोसील के साथ जन्म लेते हैं. साथ ही यह किसी भी उम्र के पुरूष को हो सकता है.

आमतौर पर हाइड्रोसील से टेस्टिकल्स को कोई खतरा नही होता है. अधिकतर इसके होने पर दर्द नही होता और यह बिना इलाज के अपने आप ठीक हो जाता है. लेकिन स्क्रोटम (टेस्टिस की थैली) पर सूजन दिखने पर डॉक्टर से एक बार सलाह जरूर लेनी चाहिए जिससे वह इसके कारण के बारे में पता लगा सकें.

आज इस लेख में हम आपको बताने वाले है हाइड्रोसील क्या होता है, इसके कारण, लक्षण, प्रकार, निदान, इलाज और घरेलू उपाय –

हाइड्रोसील के कारण – hydrocele causes in hindi

  • स्क्रोटम में चोट लगने के कारण, नसों की सूजन या अन्य हेल्थ के कारणों के चलते अंडकोष में अधिक पानी भर जाता है जिसके कारण सूजन और दर्द की शिकायत होती हैं.
  • जिसके चलते अंडकोष गुब्बारे की तरह फुला हुआ दिखाई देता हैं.
  • इसके उपचार में पानी निकालने की जरूरत पड़ती हैं. इसके अलावा कुछ हाइड्रोसील के घरेलू उपचार कर के इसे रोका जा सकता हैं.
  • कुछ लोगों में हाइड्रोसील की समस्‍या जेनेटिक या जन्म से भी हो सकती हैं.
  • समय से पहले जन्म लेने वाले पुरूष शिशुओं में इसके होने के आसार ज्यादा होते है.
  • जन्म से हाइड्रोसील के साथ पैदा नवजात बच्चों में यह जन्‍म के पहले वर्ष में समाप्त हो सकता हैं.
  • वैसे तो यह समस्‍या किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन 40 वर्ष के बाद इसकी शिकायत अक्‍सर देखी जाती हैं.
  • सूजन का कारण इंफेक्शन या कोई अन्य कंडीशन जैसे स्क्रोटम को जोड़ने वाली नसों की सूजन के कारण हो सकती है.

हाइड्रोसील के लक्षण – hydrocele symptoms in hindi

  • आसपास के तरल पदार्थ के कारण अंडकोष में द्रव महसूस नहीं किया जा सकता हैं.
  • हाइड्रोसील में तरल पदार्थ का आकार पेट या अंडकोष की थैली के दबाव की वजह से कम या ज्यादा होता रहता हैं.
  • अगर शरीर में फ्लूइड के जमा होने का आकार बदलता रहता है, तो यह अधिकतम लक्षण हर्निया के साथ जुड़े होने की संभावना भी होती हैं.
  • हाइड्रोसील की समस्या के निदान के लिए अल्‍ट्रासाउंड तकनीक भी प्रयोग कर सकते हैं. 
  • अल्‍ट्रासाउंड से अंडकोष में भरा द्रव साफ नजर आता हैं.

अन्य लक्षण

  • अधिकतर हाइड्रोसील में कोई दर्द नही होता है.
  • इसका लक्षण अंडकोष की थैली की सूजन ही होता है.
  • व्यस्क पुरूषों में इसके लक्षण जैसे सुबह – शाम के समय स्क्रोटम की सूजन ज्यादा होना.
  • स्क्रोटम का भारीपन महसूस करना.
  • अचानक से स्क्रोटम में तेज़ दर्द होने पर तुरंत मेडिकल सहायता लेनी चाहिए.
  • व्यस्कों या बच्चों में अचानक से स्क्रोटम में गंभीर दर्द होना टेस्टिकुलर टॉर्शन भी हो सकता है.
  • टेस्टिकुलर टॉर्शन में किसी दुर्घटना या चोट के कारण टेस्टिस घूम जाते है.
  • इसके होने टेस्टिस तक खून की सप्लाई रूक जाती है जिसका इलाज न होने पर बांझपन हो सकता है.

हाइड्रोसील के प्रकार – types of hydrocele in hindi

इसके दो प्रकार होते है –   

  • नॉन कम्युनिकेटिंग हाइड्रोसील 
  • कम्युनिकेटिंग हाइड्रोसील

हाइड्रोसील का निदान – diagnosis of hydrocele in hindi

  • इसका पता लगाने के लिए डॉक्टर शारीरिक जांच करते है.
  • हाइड्रोसील होने पर अंडकोष की थैली की सूजन होती है लेकिन जरूरी नही कि उसमे दर्द हो ही.
  • इसके अलावा डॉक्टर फ्लूइड का पता लगाने के लिए स्क्रोटम पर लाइट डालकर प्रक्रिया को कर सकते है जिससे द्रव का पता लगाया जा सके.
  • फ्लूइड होने पर स्क्रोटम से लाइट पास हो जाती है.
  • लेकिन कैंसर के कारण सूजन होने पर लाइट पास नही होती है.
  • डॉक्टर आपके पेट पर प्रेशर डालकर हर्निया की जांच कर सकते है.
  • जिसके लिए डॉक्टर आपको खांसी करवा कर चेक कर सकते है.
  • इंफेक्शन का पता लगाने के लिए ब्लड या यूरिन टेस्ट किया जा सकता है.
  • हर्निया आदि की स्थिति में अल्ट्रासाउंड भी किया जा सकता है. 

हाइड्रोसील का इलाज – hydrocele treatment in hindi

हाल ही में जन्म लिए हुए शिशु को हाइड्रोसील होता है तो यह एक साल के अंदर अपने आप ठीक हो जाता है. जबकि अपने आप ठीक नही होने और बढ़ने पर सर्जरी की जरूरत हो सकती है. 

व्यस्कों में हाइड्रोसील 6 महीनों के अंदर अपने आप ठीक हो जाता है. इससे समस्या होने या हर्निया आदि होने पर सर्जरी की जरूरत पड़ती है.

सर्जरी

  • इसकी सर्जरी के लिए एनेस्थीसिया दिया जाता है.
  • अधिकतर मामलों में कुछ घंटों के भीतर आप घर जा सकते है.
  • हाइड्रोसील की जगह के आधार पर पेट या स्क्रोटम पर बहुत छोटा चीरा लगाया जाता है.
  • चीरे वाली जगह पर काफी बड़ी पट्टी की जाती है.
  • हाइड्रोसील की जगह और साइज के आधार पर कुछ दिनों के लिए पेशाब की नली की जरूरत पड़ सकती है.

एनेस्थीसिया से जुड़े रिस्क  –

सर्जरी से जुड़े रिस्क –

  • ब्लड क्लॉट या ज्यादा ब्लीडिंग
  • स्क्रोटल इंजरी या नसों को नुकसान
  • इंफेक्शन

इसके लिए बर्फ की सिकाई की जा सकती है. जिससे सर्जरी के बाद होने वाली परेशानी में राहत मिलती है.

नीडल का उपयोग

  • हाइड्रोसील के उपचार में यह भी ऑप्शन होता है.
  • जिसमें अंडकोष की थैली में नीडल डालकर फ्लूइड को निकाला जाता है.
  • कुछ मामलों में ड्रग को इंजेक्ट करके इसे फिर से भरने से रोका जाता है.
  • सर्जरी के दौरान जटिलताओं के अधिक आसार वाले पुरूषों को नीडल की जरूरत पड़ती है.
  • इसे साइड इफेक्ट है अस्थाई दर्द और इंफेक्शन का रिस्क रहना. 

हाइड्रोसील के घरेलू उपाय – hydrocele home remedies in hindi

  • हाइड्रोसील को बढ़ने से रोकने के लिए अंडकोष को बांधकर रखना जरूरी होता हैं.
  • अंडकोष को शारीरिक श्रम करते समय लटकने न दें और ना ही ढीला छोड़े.
  • अंडकोष की सूजन कम करने के लिए सुबह-सुबह दो रत्ती फूला हुआ सुहागा गुड लें.
  • हल्दी को पानी में पीसकर पेस्ट बना लें और उसे अंडकोष पर लगाए. इससे अंडकोष का आकार सामान्य हो जाएगा.
  • अंडकोषों में पानी भर जाने पर 10 ग्राम काटेरी की जड़ को सुखाकर उसे पीस लें.
  • इसके बाद काटेरी पाउडर को 7 ग्राम की मात्रा में पीसी हुई काली मिर्च डालकर उसे पानी के साथ लें.
  • हाइड्रोसील के घरेलू इलाज को नियम से 7 दिन तक करें. इससे यह रोग खत्म हो जाता हैं.
  • इसके अलावा 5 ग्राम काली मिर्च और 10 ग्राम जीरा लेकर पीस लें.
  • थोड़ा सरसों या जैतून का तेल मिलाएं और इसे गर्म करें.
  • फिर थोड़ा गर्म पानी मिलाकर इसे अंडकोषों पर लगाए.
  • इसे तीन से चार दिन दिन में दो बार उपयोग करें.

अंत में

वहीं हाइड्रोसील इंग्वाइनल हार्निया होने पर इसे सर्जरी द्वारा शीघ्रातिशीघ्र ठीक किया जाना आवश्यक होता हैं क्योंकि इस तरह का हाइड्रोसील महीनों और सालों तक खुद से खत्म नहीं होता हैं. वैसे तो हाइड्रोसील का इलाज एस्पिरेशन और स्क्लिरोजिंग से किया जाता हैं. लेकिन इसके कुछ खतरे हो सकते है, जिसकी वजह से अंडकोष के आसपास हल्का दर्द, इन्फेक्शन और फाइब्रोसिस की समस्‍या हो सकती हैं.

सर्जरी की स्थिति में एक हफ्ते के भीतर दर्द चला जाता है. साथ ही कुछ हफ्तों के बाद आप अपने नॉर्मल काम कर सकते है. इसके अलावा कम से कम 3 हफ्तों तक साईकिल चलाना जैसी गतिविधियों से बचना चाहिए.

टांके वाली जगहों पर डॉक्टर से समय पर जांच करवानी चाहिए. साथ ही उस एरिया को साफ रखना चाहिए जिससे इंफेक्शन आदि से बचा जा सकें.