इस लेख में आप जानेंगे इंफेक्शनों के बारे में, प्रकार, इलाज, लक्षण, फैलने के कारण और बचाव –

संक्रमण क्या होता है – all about infections?

  • जब कोई दूसरा कीटाणु आपके शरीर में प्रवेश कर रोग का कारण बनता है तो उसे इंफेक्शन कहा जाता है. (जानें – बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन में क्या अंतर होता है)
  • संक्रमणों का कारण बनने वाले कीटाणु काफी अलग हो सकते है जैसे – वायरस, बैक्टीरिया, फंगी और पैरासाइट.
  • आप संक्रमण के संपर्क में कई तरीकों से आ सकते है जैसे संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना या दूषित भोजन, पानी या किसी कीट का काटना.

इंफेक्शन के प्रकार – types of infections

प्रिऑन्स

  • यह पूर्ण रूप से ऑर्गेनिजम न होकर एक प्रोटीन होता है.
  • इसके दौरान शरीर के सामान्य प्रोटीन प्रभावित होकर उनके आकार असामान्य होने का कारण बनता है.
  • यह डिमेंशिया समेत चलने या बोलने में परेशानी का कारण बनता है.
  • यह रोग काफी रेयर है और इसका मुख्यता कारण अनुवांशिक होता है.
  • इसके अलावा दूषित भोजन खाने से भी यह हो सकता है.

पैरासाइटिक इंफेक्शन

  • यह होस्ट ऑर्गेनिज़म के ऊपर या अंदर जिंदा रहते है.
  • साथ ही यह पोषण होस्ट से प्राप्त करते है.
  • मानवों को बीमार करने वाले तीन प्रकार के पैरासाइट होते है – प्रोटोज़ोआ, हेलमिंथस, एक्टोपैरासाइट.

पैरासाइट इंफेक्शन के उदाहरण –

  • मलेरिया
  • स्कैबीज
  • रिवर ब्लाइडनैस
  • प्यूबिक या सिर पर जूं
  • टेपवॉर्म इंफेक्शन
  • टॉक्सोप्लामोसिस
  • ट्रिकोमोनियेसिस
  • राउंडवॉर्म इंफेक्शन
  • लिशमैनियेसिस

फंगल इंफेक्शन

  • फंगी विविध प्रकार के कीट है जो यीस्ट और मॉल्ड के रूप में होते है.
  • यह वातावरण, मिट्टी, बाथरूम आदि शरीर में भी नमी वाले एरिया में मिलते है.
  • इन्हें आप आंखों से नहीं देख सकते है.
  • जबकि बाथरूम में टाइल आदि पर इन्हें देखा जा सकता है.

फंगल इंफेक्शन के उदाहरणों में –

बैक्टीरियल इंफेक्शन

  • यह सिंगल सेल वाली माइक्रोऑर्गेनिजम होते है.
  • यह कई आकार और साइज के हो सकते है.
  • बैक्टीरिया सभी प्रकार के वातावरण में पाया जा सकता है जैसे मिट्टी, पानी, शरीर के अंदर या ऊपर.
  • कुछ बैक्टीरिया तीव्र गर्मी या रेडिएशन एक्सपोजर को भी झेल लेते है.
  • हमारे शरीर में कई बैक्टीरिया होते है जो कोई रोग पैदा नहीं करते है.
  • पाचन तंत्र में मौजूद बैक्टीरिया भोजन को पचाने में मदद करते है.
  • हालांकि, कुछ बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करके इंफेक्शन का कारण बन सकते है.

बैक्टीरिया इंफेक्शन के उदाहरण –

  • गला खराब होना
  • यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन
  • वैजिनॉसिस
  • फ़ूड पॉइजनिंग
  • गोनोरिया
  • क्लाइमैडिया
  • टीबी
  • निमोनिया
  • टिटनस
  • काली खांसी
  • सेल्यूलाइटिस
  • हैज़ा
  • लाइम रोग
  • बैक्टीरिल मैनिंजाइटिस
  • एंथ्राक्स

वायरल इंफेक्शन

  • वायरस छोटे संक्रमित कीटाणु होते है जो बैक्टीरिया से भी छोटे होते है.
  • वायरस एक जेनेटिक मटेरियल से बना प्रोटीन शेल से घिरा होता है.
  • कुछ वायरस में अतिरिक्त परत या सतह की विशेषताएं होती है.
  • वायरस पैरासाइट होते है जिनको जिंदा रहने के लिए होस्ट सेल की जरूरत होती है.
  • एक बार वायरस के होस्ट सेल में प्रवेश कर लेने के बाद वह खुद को विकसित करने के लिए सेलुलर तत्वों के उपयोग में सक्ष्म हो जाता है. (जानें – वायरल बुखार के बारे में)
  • नए वायरस होस्ट सेल्स से निकलते है जिस कारण कभी कभी होस्ट सेल्स की मृत्यु हो जाती है.

वायरल इंफेक्शन के उदाहरण –

  • रूबेला
  • खसरा
  • सर्दी खांसी
  • चिकनपॉक्स
  • पोलियो
  • एचपीवी
  • एचआईवी
  • फ्लू
  • हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी, ई
  • हर्पस
  • रेबीज़
  • ईबोला
  • मैनिंजाइटिस

इंफेक्शन का इलाज – infections treatment

प्रिऑन्स

  • इसका कोई स्थाई इलाज नहीं है.
  • लेकिन दवाओं की मदद से इसके बढ़ने को धीमा किया जा सकता है.

पैरासाइटिक इंफेक्शन

फंगल इंफेक्शन

  • एंटीफंगल दवाओं के साथ फंगल इंफेक्शन का इलाज किया जा सकता है.
  • फंगल इंफेक्शन के प्रकार के आधार पर दवा निर्धारित की जाती है.
  • रिंगवॉर्म या एथलीट फूट के मामलों में एंटीफंगल क्रीम निर्धारित की जाती है.
  • एंटीफंगल दवाएं इंजेक्शन और ओरल रूप से भी ली जा सकती है.

बैक्टीरियल इंफेक्शन

  • बैक्टीरियल इंफेक्शन का इलाज एंटीबायोटिक्स से किया जाता है.
  • एंटीबायोटिक्स दवाएं बैक्टीरिया की ग्रोथ को प्रभावित करती है.
  • यह बैक्टीरिया की ग्रोथ रोकती है या सीधे मारती है.
  • एंटीबायोटिक्स के कई अलग क्लास होते है जो इंफेक्शन के कारण वाले बैक्टीरियम के अनुसार प्रीस्क्राइब की जाती है.
  • ज्यादा एंटीबायोटिक्स का उपयोग करने से साइड इफेक्ट हो सकते है जैसे प्रतिरोध विकसित होना आदि.

वायरल इंफेक्शन

  • अधिकांश मामलों में वायरल इंफेक्शन का इलाज करने में लक्षणों से राहत देने पर ज़ोर दिया जाता है.
  • जिससे इम्यून सिस्टम को खुद से इंफेक्शन को दूर करने का समय मिल सके.
  • कुछ मामलों में एंटीवायरल ड्रग का उपयोग वायरल इंफेक्शन के लिए किया जाता है.
  • इसके कुछ उदाहरण जिनकी एंटीवायरल दवाएं मौजूद है – एचआईवी, हर्पस, हेपेटाइटिस सी.
  • एक बार संक्रमित हो जाने के बाद कुछ वायरस जीवनभर आपके साथ रहते है.
  • वह शरीर के अंदर रहते हुए फिर से एक्टिवेट हो सकते है जैसे एचएसवी और वैरिसेला ज़ोस्टर वायरल. (जानें – वायरल रोगों के बारे में)

इंफेक्शन के लक्षण – symptoms of infections

  • इसके लक्षण संक्रमण के प्रकार पर निर्भर करते है.
  • इसके अलावा हो सकता है इंफेक्शन बिना किसी लक्षण के हो, जैसे गोनोरिया, एचपीवी, क्लैमाइडिया के लक्षण हमेशा नहीं दिखते है.

लेकिन कुछ आम लक्षणों में –

  • बुखार
  • ठंड लगना
  • शरीर में दर्द या ऐंठन
  • थकान
  • खांसी या छींकना
  • पाचन समस्या जैसे मतली, उल्टी या दस्त

निम्न होने पर तुरंत डॉक्टर को सूचित करें

  • रैश
  • जानवरों के काटने
  • लंबे समय तक लक्षणों के रहने
  • समय के साथ लक्षणों का खराब होना
  • सांस लेने में परेशानी
  • बुखार के साथ गंभीर सिरदर्द
  • बिना कारण सूजन

इंफेक्शन फैलने के कारण – causes of infection transmission

कीट के काटने

  • मच्छर, जूं, खटमल आदि के काटने से इंफेक्शन फैल सकता है.
  • इनके कारण मलेरिया, लाइम रोग आदि हो सकते है.

दूषित पानी या भोजन

  • खराब वातावरण की कंडीशन में बने फ़ूड के कारण
  • भोजन को ठीक से स्टोर नहीं करना
  • आसपास स्वच्छता न रखने

सीधा संपर्क

  • कुछ इंफेक्शन सीधे एक से दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने से फैल सकते है जैसे छूना, किस करना या सेक्स करना आदि. (जानें – फंगल स्किन इंफेक्शन के बारे में)
  • संक्रमित व्यक्ति के शरीर के फ्लूइड से सीधे संपर्क में आने के कारण यह फैल सकता है जैसे ब्लड, सीमेन, लार, नाक बहना, योनि से स्त्राव.
  • कुछ इंफेक्शन सीधे मां से जन्म लेने वाले शिशु को हो सकते है.

संक्रमित जानवर

  • संक्रमित जानवरों के कारण कुछ इंफेक्शन फैल सकते है.
  • एक उदाहरण रैबीज वायरस जो संक्रमित जानवर के काटने से फैल सकता है.

अप्रत्यक्ष संपर्क

  • कुछ संक्रमण वातावरण में पाए जाते है.
  • आपके इनके संपर्क में आकर संक्रमण को फैला सकते है.
  • हवा में खांसी या छींकने से फैलने वाले इंफेक्शन को इसका सबसे बेहतर उदाहरण समझा जा सकता है.
  • किसी संक्रमित वस्तु को छूने के बाद चेहरा, मुंह या नाक को छू लेने से इंफेक्शन फैल सकता है.

इंफेक्शन का पता कैसे करें

  • आपकी मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच समेत लक्षणों के आधार पर डॉक्टर द्वारा इंफेक्शन के प्रकार का निदान किया जाता है.
  • अन्य मामलों में इसके प्रकार वाले कीट का पता लगाना कठिन होता है.
  • कुछ बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन के लक्षण एक जैसे होते है.
  • जिन मामलों में निदान करने में परेशानी होती है उसमें कुछ टेस्ट लिखे जा सकते है.
  • ऐसे में ब्लड, पेशाब, मल, नाक या गला, थूंक आदि का टेस्ट किया जा सकता है.
  • इसका अलावा एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई भी किए जा सकते है.

इंफेक्शन से बचाव कैसे करें – infection prevention

  • अच्छी हाइजिन बनाए रखना – भोजन खाने से पहले और बाद में हाथ धोना, सार्वजनिक स्थान पर कुछ छूने के बाद हाथ को मुंह या आंख पर न लगाए.
  • बीमार होने पर घर पर रहें.
  • निजी आइटम को साझा न करें – पानी के गिलास, टूथब्रश, रेज़र ब्लैड आदि.
  • सुरक्षित सेक्स करें.
  • जंगली जानवरों से बचें.
  • भोजन को ठीक से पकाए और पकाने से पहले ठीक से धो लें.
  • वैक्सीन लगवाना – खसरा, काली खांसी, हेपेटाइटिस बी के लिए वैक्सीन लगवाई जा सकती है.

अंत में

इंफेक्शन का कारण कई प्रकार के ऑर्गेनिजम हो सकते है जैसे बैक्टीरिया, वायरस, फंगी और पैरासाइट आदि. संक्रमित हो जाने के कई तरीके है. (जानें – एंटीवायरल हर्बस के बारे में)

कुछ इंफेक्शन घर में ठीक किए जा सकते है लेकिन लक्षण खराब होना, फिर से लौटने की कंडीशन में डॉक्टर से बात कर सलाह ली जानी चाहिए.

References –

 

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