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किडनी स्टोन (पथरी) के बारे में – kidney stones in hindi

किडनी स्टोन (पथरी) के बारे में – kidney stones in hindi

इस लेख में आप जानेंगे किडनी स्टोन (पथरी) क्या है, पथरी के प्रकार, किडनी स्टोन के कारण, किडनी स्टोन के लक्षण, किडनी स्टोन की समस्या, किडनी स्टोन का पता कैसे लगाएं, पथरी का इलाज और रोकथाम –

पथरी (किडनी स्टोन) क्या होते है? – what are kidney stones in hindi

किडनी में होने वाले ठोस क्रिस्टल जो स्टोन होते है, यह यूरिनरी ट्रैक्ट में कही भी विकसित हो सकते है. जैसे –

  • किडनी
  • ब्लैडर
  • यूरेथरा
  • यूरेटर

पथरी एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें व्यक्ति को बहुत ज्यादा दर्द महसूस होता है. किडनी स्टोन के कारण इसके प्रकार पर निर्भर करता है.

पथरी (किडनी स्टोन) के प्रकार – types of kidney stones in hindi

सभी किडनी स्टोन क्रिस्टल से बने नही होते है. इसके अलग प्रकारों में –

कैल्शियम

इससे बनने वाले स्टोन बहुत आम है. लो ऑक्सलेट रिच फ़ूड्स खाने से इस तरह के स्टोन विकसित होने का रिस्क होता है. इसके लिए हाई ऑक्सलेट फ़ूड्स खाने चाहिए.

  • आलू चिप्स
  • मूंगफली
  • चॉकलेट
  • पालक आदि

हालांकि कुछ किडनी स्टोन कैल्शियम से बनते है जिन्हें डाइट में कैल्शियम की सही मात्रा लेकर बनने से रोका जा सकता है.

यूरिक एसिड

  • इस प्रकार के किडनी स्टोन होने काफी आम है.
  • यह गाउट या कीमोथेरेपी लेने वाले लोगों में बहुत आम है.
  • ऐसा तब होता है जब यूरिन ज्यादा एसिडिक हो जाता है.
  • इसके लिए हेल्दी डाइट ली जानी चाहिए.

स्त्रावित स्टोन

  • यह अधिकतर महिलाओं में देखने को मिलता है जो यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के कारण होता है.
  • इस कंडीशन में स्टोन इतने बड़े हो सकते है जिससे पेशाब करने में समस्या होने लगे.
  • इसके होने का कारण किडनी इंफेक्शन भी होता है.
  • जिसका इलाज कर इस तरह की पथरी को बढ़ने से रोका जा सकता है.

सिस्टिन

  • इस तरह के स्टोन बहुत रेयर होते है.
  • इनके होने का कारण जेनेटिक डिसऑर्डर हो सकता है.
  • इस स्टोन के होने पर किडनी से पेशाब के जरिए शरीर से एसिड निकलता है.

पथरी (किडनी स्टोन) के कारण – kidney stone causes in hindi

  • पानी की कमी
  • मोटापा
  • हाई लेवल प्रोटीन, नमक या ग्लूकोज़ डाइट
  • हाइपरपैराथायराइड
  • गैस्ट्रिक बाइपास सर्जरी
  • इंफ्लामेटरी बाउल रोग जिससे कैल्शियम अवशोषण बढ़ जाता है
  • कुछ खास दवाएं जैसे डायरूटिक्स, दौरे पड़ने वाले दवाएं और कैल्शियम आधारित एंटासिड.

अन्य कारण

  • दिन में 1 लीटर से कम पेशाब आना.
  • किडनी की समस्या वाले समय से पहले पैदा हुए शिशुओं में पथरी आम है.
  • इनके होने के आसार 20 से 50 वर्ष की आयु के बीच ज्यादा होते है.
  • कुछ स्टडीज की माने तो सेक्स का भी इसमें अहम रोल होता है.
  • किडनी स्टोन का इतिहास इसके रिस्क को बढ़ा सकता है.

पथरी (किडनी स्टोन) के लक्षण – kidney stones symptoms in hindi

पथरी को गंभीर दर्द के लिए जाना जाता है. इसके लक्षणों के तब तक पता नही लगता जबतक स्टोन यूरेटर में ऊपर नीचे नही होते है. इस दर्द को रिनल कॉलिक भी कहा जाता है. जिसमें पीठ या पेट में एक साइड दर्द का अनुभव होता है.

पुरूषों में दर्द ग्रोइन एरिया में हो सकता है. यह दर्द आता जाता रहता है लेकिन गंभीर हो सकता है. रिनल कॉलिक वाले रोगियों को आराम नही मिल पाता है.

किडनी स्टोन के अन्य लक्षण जैसे –

  • यूरिन में ब्लड आना
  • उल्टी
  • मतली
  • पेशाब में बदबू
  • ठंड लगना
  • बुखार
  • बार बार पेशाब आना
  • कम मात्रा में पेशाब आना

छोटे किडनी स्टोन के मामलों में कोई दर्द या लक्षणों का अनुभव नही होता है या पथरी अपने आप यूरिनरी ट्रैक्ट से होकर निकल जाती है.

पथरी (किडनी स्टोन) समस्या क्यों हो सकती है – why kidney stones can be a problem in hindi

  • हमेशा पथरी किडनी में नही रहती है.
  • काफी बार यह पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाती है.
  • लेकिन स्टोन बड़े होने पर पेशाब के रास्ते निकलने में परेशानी होती है.
  • यूरेटर के रास्ते पथरी निकलने पर ऐंठन और जलन हो सकती है.
  • जिससे पेशाब में ब्लड भी नजर आ सकता है.
  • कभी कभी स्टोन के कारण यूरिन का फ्लो भी ब्लॉक हो जाता है.
  • पेशाब ब्लॉक होने पर किडनी इंफेक्शन या किडनी को नुकसान पहुँच सकता है.

किडनी स्टोन (पथरी) का पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट होते है – what test are done to diagnose kidney stones in hindi

किडनी स्टोन का पता लगाने के लिए पूरी हिस्ट्री को जानना और शारीरिक जांच करना महत्वपूर्ण है. जिसके साथ कुछ टेस्ट जैसे –

  • ब्लड टेस्ट जिससे कैल्शियम, फोस्फोरस, यूरिक एसिड और इलैक्ट्रोलाइट्स का पता लगता है.
  • ब्लड यूरिया नाइट्रोजन और किडनी फंक्शन के लिए क्रैटिनाइन देखना.
  • पेशाब की जांच जिससे क्रिस्टल, बैक्टीरिया, ब्लड और वाइट सेल्स का पता लग सके.
  • निकलने वाले स्टोन की जांच जिससे उसके प्रकार का पता लग सके.

समस्या की वजह जानने के लिए –

  • पेट का एक्स-रे
  • आईवीपी
  • किडनी का अल्ट्रासाउंड
  • पेट और किडनी की एमआरआई
  • पेट का सीटी स्कैन

टेस्ट से पहले आप जो दवाएं ले रहे हैं उनके बारे में जांच करता को बताना चाहिए.

पथरी (किडनी स्टोन) का इलाज – kidney stones treatment in hindi

  • पथरी के प्रकार के अनुसार इलाज किया जाता है. जैसे पेशाब के जरिए पथरी को निकालकर जमा किया जाता है.
  • दिन में 6 से 8 गिलास पानी पीकर पेशाब की आवृति को बढ़ाया जाता है.
  • जिन लोगों को मतली और उल्टी की समस्या रहती है या पानी की कमी होती है, उन्हें इंजेक्शन के जरिए फ्लूइड दिए जाते है.

किडनी स्टोन के लिए अन्य ट्रीटमेंट

  • दवाएँ – दर्द से राहत के लिए एंंटीबायोटिक्स दवाओं की जरूरत पड़ती है जिन्हें डॉक्टर की सलाह के बाद लिया जाना चाहिए.
  • लिथोट्रिप्सी – इसमें पथरी के बड़े होने पर उसे साउंड वेव से तोड़ा जाता है. जिसके बाद पेशाब के रास्ते छोटे छोटे टुकड़े निकल जाते है. इससे किडनी, पेट या आस-पास के अंगों में ब्लीडिंग या नुकसान हो सकता है.
  • टनल सर्जरी – इसमें पीठ पर छोटे सा छेद करके पथरी को निकाला जाता है. इसकी जरूरत तब होती है जब पथरी के कारण इंफेक्शन या किडनी को नुकसान होने या पेशाब के रास्ते निकलने में स्टोन ज्यादा बढ़ा होता है. जब व्यक्ति दर्द सहन न कर पाएं, तब इसे किया जाता है.
  • यूरेटेरोस्कोपी – जब ब्लैडर या यूरेटर में स्टोन फस जाता है तब डॉक्टर इसका उपयोग कर पथरी को हटा सकता है. इसके लिए डॉक्टर छोटी तार के साथ कैमरा लगाते है और यूरेथ्रा में प्रवेश करा कर ब्लैडर से निकालते है. जिसके बाद एक प्रोसेस के जरिए पथरी को हटा दिया जाता है.

पथरी (किडनी स्टोन) की रोकथाम – kidney stone prevention in hindi

  • इसके लिए जरूरी है कि खुद के शरीर में पानी की कमी न होने दिया जाए.
  • साथ ही दिन में कम से कम 1 लीटर से अधिक पेशाब जाना चाहिए.
  • इसके अलावा पानी की जगह आप नींबू पानी, फलों का जूस, आदि ले सकते है.
  • भोजन में हाई ऑक्सलेट फ़ूड्स खाने चाहिए.
  • ध्यान रखें कि शरीर में यूरिक एसिड और कैल्शियम जमा न हो इसके लिए दवाएं आदि भी ली जा सकती है.

इन सभी बातों के अलावा अगर कोई लक्षण या सवाल हो तो ऐसे में तुरंत डॉक्टर से सलाह ली जानी चाहिए. किसी भी दवा को शुरू करने से पहले या अपने डाइट चार्ट के बारे में जानने के लिए डॉक्टर को बताना न भूलें.