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ओवुलेशन की समस्या और घरेलू उपचार – Ovulation problem & treatment in Hindi

ओवुलेशन की समस्या और घरेलू उपचार –  Ovulation problem & treatment in Hindi

यह महिलाओं में होने वाली सामान्य प्रकिया है जिसमें ओवरी से अण्डे के बाहर आने की क्रिया को ओवुलेशन कहते हैं. यह प्रकिया महिलाओं में हर महीने मासिक चक्र के दौरान होती हैं. गर्भधारण के लिहाज से आवुलेशन का समय सबसे अच्‍छा माना जाता हैं. यह क्रिया पीरियड शुरू होने के 12वें से 16वें दिन होती हैं. लेकिन कुछ महिलाओं को रेगुलर मासिक नही होते है जिसके कारण उनमें ओवुलेशन का टाइम अलग होता हैं. इसलिए आज हम आपको बताएंगे ओवुलेशन के घरेलू उपचार, कारण और लक्षण, जो इस प्रकार हैं.

ओवुलेशन के कारण

ओवुलेशन में होता यह है कि एक के बाद एक ओवरी में अण्डे मेच्‍योर होते हैं और हार्मोन में वृद्धि के साथ परिपक्व होकर अण्डे बाहर आते हैं. परिवक्व अण्डे फैलोपियन ट्यूब से होते हुए यूटरस की तरफ आते हैं और ट्यूब में रुककर निषेचित होने के लिए शुक्राणु की प्रतीक्षा करते हैं. जिसका सही पता चलने का फायदा यह होता है कि गर्भधारण करने और बर्थ कंट्रोल करने में आसानी हो जाती हैं. आइए हम आपको बताते हैं कि आप कैसे आवुलेशन का पता आसानी से लगा सकते हैं.

ओवुलेशन के लक्षण

  • जिन महिलाओं का पीरियड रेगुलर होता है उनमें ओवुलेशन का दिन निश्चित होता हैं क्योंकि उस चक्र में एक तारीक निश्चित होती हैं.
  • मासिक चक्र 28 दिन में होता है तो 12वें और 16वें दिन के लक्षणों को पहचाने क्योंकि इसी दिन ओवुलेशन प्रक्रिया होने की संभावना ज्‍यादा होती हैं.
  • जिन महिलाओं में रेगुलर पीरियड नही होते है उनमें ओवुलेशन का समय बदल जाता हैं. अगर 12वें और 16वें दिनों के बीच आपका शरीर कुछ संकेत दे तो इसका मतलब आप फर्टाइल फेज में हैं. इस प्रक्रिया के दौरान सर्विकल म्‍यूकस में बदलाव होने के साथ योनि स्राव की मात्रा में गाढ़ापन और स्‍पस्‍ट तौर पर अंतर दिखता हैं.
  • अन्‍य दिनों में योनि स्राव चिपचिपा होता है जबकि ओवुलेशन के समय यह ज्‍यादा चिकनाईयुक्‍त और छूने पर तनाव प्रतीत होता हैं.
  • अन्‍य दिनों की तुलना में शरीर का तापमान बढ़ जाता हैं.
  • ओवुलेशन प्रक्रिया के दौरान सेक्‍स की इच्‍छा बढ़ जाती हैं.
  • इस प्रक्रिया के दौरान स्‍तन ज्‍यादा संवेदनशील हो जाते हैं.
  • ओवुलेशन का पता लगाने वाले उपकरण से इसकी जांच कर सकते हैं. इस उपकरण से 12 से 24 घंटे पहले ओवुलेशन का पता लगाया जा सकता हैं.

ओवुलेशन के घरेलू उपचार

ग्रीन टी – इसके दर्द से लड़ने के लिए हर रोज़ ग्रीन टी पीने की जरूरत होती हैं. यह एक अच्छे ओवुलेशन के घरेलू उपचार के रूप में गिना जाता हैं.

तरल पदार्थ लें – इस प्रकिया के दौरान शरीर निर्जलित हो जाता हैं. जिसके चलते ऐंठन की समस्या देखी जाती हैं. ऐसे में शरीर में द्रव स्तर को बनाए रखने के लिए पानी पीना चाहिए. इससे ओवुलेशन के दर्द से लड़ने में मदद मिलती हैं.

पाल्मेटा – यह जड़ीबूटी दर्दनाक ओवुलेशन के दौरान आराम देती हैं. साथ ही यह जड़ी बूटी ओवुलेशन प्रक्रिया को उत्तेजित करती है और स्थिति से निपटने में आपकी मदद करती हैं.

एक्सरसाइज़ – ओवुलेशन के दर्द में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले प्राकृतिक उपचारों में से एक हैं. व्यायाम शरीर में हार्मोन उत्पादन सुनिश्चित करता है और दर्द को कम करता हैं.

लाल तिपतिया घास – इसके दर्द को रोकने के लिए अपने आहार में एसिड और क्षार का संतुलन बनाए रखना होता हैं. लाल तिपतिया घास इस उद्देश्य के लिए आदर्श हैं.

सिकाई – पेट की मांसपेशियों में ओवुलेशन के दौरान दर्द और ऐंठन होता हैं. ऐसे में पेट की सिकाई करने से रक्त के संचलन को बढ़ने में मदद मिलती हैं.

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Ankita Singh

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