इस लेख में आप जानेंगे स्किन रैश क्या होता है, इसके कारण, कब मदद लें, क्या उम्मीद रखें और अगले स्टेप्स –

स्किन रैश क्या होता है – what is skin rash?

स्किन रैश एक नोटिस किए जाने वाला बदलाव होता है जिसमें स्किन का रंग या टेक्सचर का बदलाव देखेने को मिलता है. रैश के कई कारण हो सकते है. साथ ही इसके कई प्रकार भी है –

हैंड फूट एंड माउथ डिजीज

  • 5 साल से कम आयु के बच्चों को प्रभावित करती है.
  • दर्दनाक, लाल उभार मसूड़े, मुंह और जीभ के आसपास हो जाते है.
  • हथेलियों, पैरों के तलवों पर लाल स्पॉट दिखने लगते है.
  • स्पॉट नितंबू या जनानंग के आसपास भी दिख सकते है.

कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस

  • संक्रमण के संपर्क में आने के कुछ घंटों से लेकर दिनों के बाद यह दिखता है.
  • इसके बॉर्डर देखे जा सकते है और यह स्किन को छूने पर उत्तेजित करने वाला तत्व देखा जा सकता है.
  • स्किन खुजली, लाल, स्कैली या कच्ची दिखती है.
  • फुंसियां जिसमें से पस बहता दिख सकता है.

ड्रग एलर्जी

  • इसमें तुरंत मेडिकल सहायता की जरूरत होती है.
  • हल्का, खुजली वाला, लाल रैश ड्रग लेने के दिन या हफ्ते बाद दिख सकता है.
  • कई ड्रग एलर्जी जीवन हानि का कारण बन सकती है. (जानें – हेल्दी स्किन के लिए फ़ूड्स के बारे में)
  • इसके लक्षणों में हाइव्स, तेज धड़कन, सूजन, खुजली, सांस लेने में परेशानी शामिल है.
  • अन्य लक्षणों में बुखार, पेट खराब होना, स्किन पर छोटा, नीला या लाल डॉट दिखना हो सकता है. 

डाइपर रैश

  • डायपर के संपर्क में आए एरिया में यह दिखने लगते है.
  • स्किन लाल, सूखी या उत्तेजित दिखने लगती है.
  • इसे छुने पर गर्मी महसूस होती है.

सोरायसिस

  • स्कैली, सिल्वर, नुकीले स्किन पैच होते है.
  • यह खोपड़ी, कोहनी, घुटने और कमर के निचले हिस्से में होते है.
  • यह खुजली वाले हो सकते है. 

स्कैबीज

  • लक्षणों को दिखने में 4 से 6 हफ्तों का समय लग सकता है.
  • तीव्र खुजली वाला रैश पस से बना हुआ और स्कैली हो सकता है.
  • जिसमें सफेद या फ्लेश टोन्ड लाइन उभरी हुई होती है.

चेहरा लाल होने (रोजेशिया)

  • क्रोनिक स्किन रोग जो ठीक होकर फिर से आने की साईकल चलती रहती है.
  • तीखा भोजन, शराब वाले पेय पदार्थ, सूर्य की रोशनी, तनाव, इंटेस्टाइनल बैक्टीरिया के कारण फिर से कंडीशन ट्रीगर हो सकती है.
  • रोजेशिया के प्रकार में कई तरह के लक्षण होते है.
  • आम लक्षणों में चेहरे की फ्लशिंग, लाल उभार, चेहरा लाल होना, स्किन ड्राई होना, स्किन की संवेदनशीलता.

एलर्जिक एक्जिमा

  • यह फोड़े जैसा दिखता है.
  • अधिकांश रूप से फोरआर्म और हाथों पर दिखते है.
  • स्किन लाल, स्कैली, खुजली और कच्ची हो सकती है.
  • ब्लिस्टर से पस निकलने के बाद सूख सकता है.

चिकनपॉक्स

  • पूरे शरीर पर खुजली वाले, लाल, पस भरे दाने हो जाते है जो कई स्टेज में होते है.
  • रैश के साथ बुखार, शरीर में ऐंठन, गले में खराश, भूख की कमी होती है.
  • सभी दानों के जाने तक यह संक्रमित रह सकते है.

खसरा

  • लक्षणों में बुखार, गले में खराश, लाल या आंखों से पानी आना, भूख न लगना, खांसी और नाक बहना शामिल है.
  • लाल रैश चेहरे से होते हुए पूरे शरीर में फैल जाते है, पहला लक्षण 3 से 5 दिनों में दिखता है.
  • छोटा लाल स्पॉट ब्लू वाइट सेंटर मुंह के अंदर दिखता है. 

सेल्यूलाइटिस

  • इसे मेडिकल इमरजेंसी वाली कंडीशन माना जाता है जिसमें तुरंत सहायता की जरूरत होती है.
  • इसका कारण बैक्टीरिया या फंगस हो सकता है जो स्किन में क्रेक या कटने पर प्रवेश कर सकता है. (जानें – बैक्टीरिया बनाम वायरल इंफेक्शन के बारे में)
  • लाल, दर्द भरा, स्किन सूजन जो तेज़ी से फैलती है.
  • छुने पर लाल और ऐंठन हो सकती है.
  • बुखार, ठंड लगना आदि गंभीर इंफेक्शन का संकेत हो सकता है जिसमें तुरंत मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ती है.

इम्पेटिगो

  • यह बच्चों और शिशुओं में आम है.
  • यह मुंह, चिन, नाक के आसपास होता है.
  • खुजली वाला रैश जो पस से भरा होता है और आसानी से पस निकलने लगता है. 

फिफ्थ डिजीज

  • सिरदर्द, थकान, हल्का बुखार, गले की खराश, नाक बहना, दस्त, मतली.
  • व्यस्कों की तुलना में बच्चों को इस तरह के रैश के आसार ज्यादा होते है.
  • गोल, लाल ब्राइट रैश गालों पर हो जाते है.
  • हाथ, पैर, शरीर के ऊपरी हिस्से पर पैटर्न में रैश दिखने लगते है जो नहाने या गर्म पानी के टब में बैठने पर अधिक दिखते है.

रिंगवॉर्म

  • गोल आकार का स्कैली रैश जिसके बॉर्डर होते है.
  • रिंग के बीच की स्किन साफ और हेल्दी दिखती है, इसके किनारे गोल आकार के होते है.
  • इसमें खुजली भी होती है.

लुपस

  • यह एक ऑटोइम्यून रोग होता है जिसमें शरीर और अंगों में की तरह के लक्षण होते है.
  • कई प्रकार की स्किन और म्यूकस मेमब्रेन लक्षण रैश से लेकर अल्सर हो सकते है.
  • तितली के आकार के चेहरे पर रैश दोनों गालों से लेकर नाक तक पर होते है.
  • सूर्य की रोशनी के संपर्क में आने से रैश खराब हो सकता है.

एक्जिमा

  • पीला या सफेद स्कैली पैच जिन पर पपड़ी पड़ जाती है.
  • प्रभावित एरिया लाल, खुजली वाला, ग्रीसी या ऑयली होता है.
  • रैश वाले स्थान पर हेयर लॉस दिख सकता है.

दाद

  • इसमें जलन, टिंगल, खुजली के अलावा फुंसी हो सकती है जिसमें तेज़ दर्द होता है.
  • काफी सारे दाने जिनमें पस भरा होता है और आसानी से बहने लगता है.
  • रैश व्यक्ति के धड़ से शुरू होकर चेहरे तक आ सकता है.
  • साथ ही इसमें हल्का बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, थकान भी हो सकते है.

फ्ली बाइट

  • पैरों और तलवों के कलस्टर पर यह स्थित होता है.
  • इसमें खुजली, लाल उभार जो लाल घेरे से घिरा होता है.
  • यह कीड़े के काटने के तुरंत बाद दिखने लगते है.

रैश के कारण क्या होते है?

दवाएं

  • किसी दवा से एलर्जिक रिएक्शन
  • किसी दवा का साइड इफेक्ट
  • फोटोसेंसिटिविटी

कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस

  • इसे रैश के सबसे आम कारणों में से एक माना जाता है.
  • इस प्रकार के रैश स्किन के किसी बाहरी चीज़ के संपर्क में आने पर रिएक्शन के कारण रैश दिखने लगते है.
  • रैश खुजली वाला, लाल या इंफ्लेमड हो सकता है.
  • कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस के संभावित कारणों में साबुन, डिटर्जेंट, केमिकल के संपर्क में आना, जहरीले पौधों को छूना आदि.

डॉक्टर से कब मदद लें

  • घरेलू उपाय करने के बाद भी रैश के न जाने.
  • रैश के साथ अन्य लक्षणों का अनुभव करने.
  • जबकि सांस लेने में परेशानी, गले में टाइटनेस, रैश एरिया में दर्द बढ़ने, चेहरे पर सूजन, भ्रम, चक्कर आना, गंभीर सिर या गर्दन का दर्द, उल्टी या दस्त होने पर तुरंत मेडिकल सहायता लें.
  • रैश के साथ अन्य समस्याओं के लक्षण जैसे गले में खराश, जोड़ों में दर्द, हल्का बुखार, हाल ही किसी कीट के काटने आदि पर डॉक्टर को दिखाए.

रैश का निदान कैसे होता है?

डॉक्टर द्वारा शारीरिक परिक्षा के बाद कुछ सवाल पूछे जा सकते है –

  • मेडिकल हिस्ट्री
  • हाइजीन
  • किसी प्रोडक्ट या दवा का हाल में उपयोग
  • डाइट

इसके अलावा –

  • तापमान
  • कंपलीट ब्लड काउंड या एलर्जी टेस्ट
  • स्किन बायोप्सी
  • किसी स्किन विशेषज्ञ को रेफर किया जा सकता है.

अंत में

  • माइल्ड संपर्क रैश को घरेलू उपायों से ठीक किया जा सकता है.
  • रैश के संभावित ट्रिगर के कारणों को जानना और उनसे बचना.
  • रैश के बने रहने और उपाय के बाद न जाने पर डॉक्टर से बात करें.

किसी अन्य समस्या या सवाल के लिए डॉक्टर से बात कर सलाह लें.

References –

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