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वायरल बुखार – viral fever in hindi

वायरल बुखार – viral fever in hindi

वायरल बुखार क्या होता है – what is viral fever in hindi

हम में से अधिकतर लोगों के शरीर के तापमान 98.6 डिग्री फेरानाइट रहता है. इसमें से एक डिग्री ऊपर हो जाने को बुखार की श्रेणी में रखा जाता है. बुखार एक संकेत होता है कि हमारा शरीर किसी प्रकार के बैक्टीरिया या वायरल इंफेक्शन से लड़ रहा है.

जबकि वायरल फीवर एक बुखार का प्रकार है जो चल रही किसी वायरल समस्या के कारण हो सकता है. सर्दी खांसी से लेकर फ्लू तक इंसानों को कई तरह के वायरल इंफेक्शन से प्रभावित होना पड़ता है. हल्का बुखार होना कई तरह के वायरल इंफेक्शन के लक्षणों की ओर संकेत करता है जैसे डेंगू बुखार जिसमें तेज़ बुखार होता है.

वायरल बुखार के लक्षण – viral fever symptoms in hindi

वायरल बुखार के दौरान शरीर का तापमान 99 डिग्री फेरानाइट से लेकर 103 डिग्री फेरानाइट तक रह सकता है. जबकि वायरल फीवर के आम लक्षणों में –

  • भूख कम लगना
  • सिरदर्द
  • मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन
  • पानी की कमी
  • पसीना आना
  • ठंड लगना
  • कमज़ोरी महसूस होना

इस तरह के लक्षण कुछ दिनों तक रहते है.

वायरल बुखार के कारण – viral fever causes in hindi

वायरस के कारण होने वाले इंफेक्शन से वायरल फीवर हो सकता है. वायरस बहुत ही ज्यादा सूक्ष्म होने के अलावा शरीर में इंफेक्ट होने के साथ मल्टीप्लाई होते है. जबकि बुखार उस वायरस से लड़ने का तरीका होता है. काफी सारे वायरस तापमान को लेकर संवेदनशील होते है, शरीर का तापमान बढ़ने यानि बुखार आने से उनके शरीर में बने रहने के मौके कम हो जाते है.

वायरस से संक्रमित होने के कई कारण हो सकते है जैसे –

  • शरीर द्रव (फ्लूइड) – वायरल से संक्रमित व्यक्ति से बॉडी फ्लूइड ट्रांसफर होने से बिमारी हो सकती है. उदाहरण के लिए हेपेटाइटिस बी और एचआईवी जैसे वायरल इंफेक्शन.
  • बाइट्स – इंसेक्ट समेत दूसरे जानवर भी वायरस का कारण बन सकते है. उनके काटने पर आपको इंफेक्शन हो सकता है. उदाहरण के लिए – डेंगू बुखार और रेबीज़.
  • सांस लेने – वायरल इंफेक्शन से संक्रमित व्यक्ति के आपके आस पास खांसने व छींकने से इंफेक्शन हो सकता है. जैसे फ्लू या सर्दी खांसी का हो जाना.
  • संक्रमित चीज़ें – फ़ूड्स और ड्रिंक्स जो वायरस से संक्रमित होते है. जिनको खाने से इंफेक्शन का विकास होता है. उदाहरण के लिए दूषित फ़ूड्स खाने से नोरोवायरस या एंटरोवायरस जैसे इंफेक्शन का होना.

वायरल बुखार का निदान कैसे होता है – how is viral fever diagnosed in hindi

  • वायरल और बैक्टैरियल इंफेक्शन के लक्षण लगभग एक जैसे होते है.
  • वायरल बुखार का पता लगाने के लिए डॉक्टर आपको बैक्टरिया इंफेक्शन न होने की पुष्टि करेंगे.
  • ऐसा करने के लिए वह आपके लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और बैक्टीरिया के सैंपल का टेस्ट कर सकते है.
  • गले की खराश होने पर वह स्वैब से आपके गले में मौजूद बैक्टीरिया का टेस्ट कर सकते है. जिसके नेगेटिव आने पर वायरल इंफेक्शन की पुष्टि होती है.
  • इसके अलावा वह आपके ब्लड का सेंपल और शरीर के अन्य फ्लूइड आदि को लेकर वाइट ब्लड सेल काउंट से वायरल इंफेक्शन का पता लगा सकते है.

वायरल बुखार का इलाज – how are viral fevers treated in hindi

काफी सारे मामलों में वायरल बुखार में किसी खास उपचार की जरूरत नही पड़ती है. जैसे बैक्टीरियल इंफेक्शन पर एंटीबायोटिक्स का कोई खासा प्रभाव नही पड़ता है.

इसके उपचार के लिए लक्षणों से राहत देने के लिए उपचार दिया जाता है जिसमें –

  • बुखार कम करने के लिए डॉक्टर द्वारा बताई गई ओटीसी ली जा सकती है.
  • ज्यादा से ज्यादा आराम करें.
  • गुनगुने पानी से नहाएं या बैठे जिससे शरीर का तापमान कम हो जाए.
  • खुद को हाइड्रेट रखने के लिए पानी पीते रहें.
  • डॉक्टर द्वारा बताई गई एंटीवायरल दवाएं लें.

डॉक्टर को कब दिखाए

अधिकतर मामलों में, वायरल फीवर होने पर घबराने की जरूरत नही होती है. लेकिन बुखार 103 डिग्री फेरानाइट या ज्यादा होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है. 

बुखार होने पर निम्न लक्षणों पर ध्यान रखना जरूरी होता है जैसे –

  • गंभीर सिरदर्द
  • चेस्ट मेंं दर्द
  • उल्टी आना
  • रैश जो खराब होते जाते है
  • गर्दन में ऐंठन और मोड़ने पर दर्द
  • भ्रम
  • दौरे पड़ना
  • पेट में दर्द
  • सांस लेने में समस्या

अंत में

वायरल इंफेक्शन के कारण होने वाले बुखार जैसे फ्लू या डेंंगू को वायरल फीवर कहा जाता है. अधिकतर वायरल बुखार अपने आप एक या दो दिन में ठीक हो जाते है लेकिन कुछ को ठीक करने के लिए मेडिकल उपचार की जरूरत पड़ती है.

103 डिग्री फैरानाइट या इससे अधिक बुखार रहने पर डॉक्टर से सलाह ली जानी चाहिए. साथ ही खुद को पानी की कमी न होने दें और अधिक से अधिक आराम करें.