इस लेख में आप जानेंगे स्ट्रेचिंग करने के फ़ायदे, प्रकार, शुरू कैसे करें और सुरक्षा टिप्स –

स्ट्रेचिंग के फ़ायदे – benefits of stretching

नियमित रूप से स्ट्रेचिंग करने के कई सारे लाभ होते है. इससे न केवल आपको लचीलापन बढ़ाने बल्कि फिटनेस में भी यह अहम भूमिका निभाती है. साथ ही स्ट्रेचिंग से पोस्चर को बेहतर करने, तनाव, शरीर की ऐंठन आदि को बेहतर करने में मदद मिलती है.

टेंशन सिरदर्द कम करने

  • टेंशन और तनाव के कारण होने वाला सिरदर्द आपके रोज़मर्रा के जीवन को प्रभावित कर सकता है.
  • सही डाइट, खूब सारे रेस्ट, शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना और स्ट्रेचिंग करने से आपको टेंशन को कम करने में मदद मिल सकती है.

पोस्चर को बढ़िया करने

  • मांसपेशियों में असंतुलन काफ़ी आम है जिससे खराब पोस्चर हो सकता है.
  • एक अध्ययन के अनुसार, कुछ विशेष मांसपेशियों को ध्यान में रखते हुए स्ट्रेच करने से मसक्यूलोस्केलेटल दर्द को कम करके सही एलाइनमेंट में मदद मिलती है.
  • जिससे पोस्चर को सही करने में मदद मिलती है.

तनाव से राहत पाने

  • तनाव का अनुभव होने पर मांसपेशियों के ऐंठन के मौके अधिक हो जाते है.
  • ऐसा इसलिए क्योंकि शारीरिक और भावनात्मक तनाव का अनुभव करने से मांसपेशियों की ऐंठन और कठोरता आती है. (जानें – उल्टे हाथ और कंधे में दर्द होने के बारे में)
  • ऐसे में गर्दन, कंधे, कमर के ऊपरी हिस्सों जैसे तनाव को होल्ड करने वाले एरिया पर फोकस करना चाहिए.

शारीरिक गतिविधियों में क्षमता अच्छी करने

  • किसी भी शारीरिक एक्टिविटी को करने से पहले स्ट्रेचिंग करने से आपकी मांसपेशियों को एक्टिविटी के लिए तैयार होने में मदद मिलती है.
  • इससे आपको एक्सरसाइज या एथलेटिक इवेंट में क्षमता बेहतर करने में मदद मिलती है.

कमर दर्द में राहत

  • मांसपेशियों के टाइट होने के कारण गतिविधि की सीमा सीमित हो जाती है.
  • जिसके हो जाने पर कमर में मांसपेशी तनाव बहुत ज्यादा हो जाता है.
  • स्ट्रेचिंग करने से हाल में चल रही कमर की इंजरी को ठीक करने में मदद मिलती है और कमर की मांसपेशियाँ मजबूत होती है.
  • नियमित स्ट्रेचिंग रूटीन से भविष्य में होने वाले कमर दर्द, ऐंठन को कम किया जा सकता है

दिमाग को शांत करने

  • नियमित रूप से स्ट्रेचिंग करने से लचीलापन बढ़ने के साथ ही दिमाग को शांत करने में मदद मिलती है.
  • स्ट्रेचिंग के दौरान मेडिटेशन और दिमाग की एक्सरसाइज की जानी चाहिए.
  • इससे दिमाग को मेंटल ब्रेक मिलता है.

मोशन की रेंज बेहतर करने

  • शरीर के किसी भी जॉइंट को पूरी सीमा तक ले जाने वाले मोशन से आपको हर तरह के मूवमेंट में मदद मिलती है.
  • रोजाना स्ट्रेचिंग करने से इस मोशन की रेंज को बेहतर किया जा सकता है.
  • एक अध्ययन के अनुसार मांसपेशियों को एक सीमा तक स्ट्रेचिंग करना अधिक प्रभावी और तुरंत लाभ देता है.

मांसपेशियों तक ब्लड फ्लो को बढ़ाने

  • रोजाना स्ट्रेचिंग करने से ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करने और मांसपेशियों तक ब्लड फ्लो बढ़ाने में मदद मिलती है.
  • साथ ही इससे रिकवरी के समय को कम करके, मांसपेशियों के दर्द को कम करने में मदद मिलती है.

लचीलापन बढ़ाने

  • नियमित रूप से स्ट्रेचिंग करने से न केवल लचीलापन बढ़ाने में मदद मिलती है बल्कि यह हमारे संपूर्ण हेल्थ के लिए जरूरी है.
  • स्ट्रेचिंग से लचीलापन आने के अलावा रोज़मर्रा के कामकाज में आसानी होने और आयु बढ़ने के साथ गतिविधियों के धीमे होने को कम किया जा सकता है.

स्ट्रेचिंग के प्रकार या तकनीक

  • डाइनेमिक
  • स्टेटिक
  • पीएनएफ
  • पेसिव
  • एक्टिव स्ट्रेचिंग
  • बैलिस्टिक

सबसे आम प्रकार

  • स्टेटिक स्ट्रेच – इसके दौरान आरामदायक पोजीशन में स्ट्रेच को 10 से 30 सेकेंड तक होल्ड करें. इस तरह की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज के बाद अधिक लाभ देती है.
  • डाइनेमिक स्ट्रेच – यह एक्टिव मूवमेंट होते है जिसमें मांसपेशियाँ स्ट्रेच हो जाती है. यह स्ट्रेच अंत की पोजीशन में नहीं होते है. इस तरह के स्ट्रेच एक्सरसाइज से पहले किए जाते है.

स्ट्रेचिंग को शुरू कैसे करें

  • अगर आप स्ट्रेचिंग शुरू करने जा रहे है तो धीरे धीरे शुरू करें.
  • किसी अन्य प्रकार की शारीरिक एक्टिविटी के जैसे ही शरीर को स्ट्रेचिंग करने का आदि होने में समय लगता है.
  • आप एक्सरसाइज वाले दिन किसी भी समय स्ट्रेच कर सकते है.
  • दिन में 5 से 10 मिनट डाइनेमिक स्ट्रेचिंग करने का लक्ष्य रखें.
  • जबकि वर्कआउट के बाद 5 से 10 मिनट स्टेटिक या पीएनएफ स्ट्रेचिंग करें.
  • जिन दिनों पर आप एक्सरसाइज नहीं करते है उन दिनों पर 5 से 10 मिनट स्ट्रेचिंग का समय निकालें.
  • इससे मांसपेशी दर्द, कठोरता को कम करके लचीलापन बेहतर करने में मदद मिलती है.
  • शरीर के मुख्य एरिया जैसे पिंडली, हैमस्ट्रिंग, हिप फ्लैक्सर, क्वाड्रीसेप्स को स्ट्रेचिंग फोकस करती है.
  • ऊपरी शरीर के हिस्से में राहत के लिए, गर्दन, लोवर बैक, कंधे को स्ट्रेच करने वाले मूव करने चाहिए.
  • हर स्ट्रेच को कम से कम 30 सेकेंड के लिए होल्ड करें और बाउंस करने से बचें. (जानें – फुट आर्क में दर्द के बारे में)
  • आप रोजाना मांसपेशियों के वार्मअप, किसी एथलेटिक इवेंट या वर्कआउट के बाद स्ट्रेच कर सकते है.

रिस्क

  • किसी एक्यूट या पहले से इंजरी के होने पर आपको डॉक्टर से सलाह के बाद ही स्ट्रेच करना चाहिए.
  • पुरानी या टीस उठने वाली इंजरी होने पर किसी स्पोर्ट्स मेडिसन विशेषज्ञ या थेरेपिस्ट से सलाह लें.
  • शारीरिक रूप से सीमितता होने के कारण पूरी स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज न करने के मामलों में डॉक्टर से सलाह के बाद विकल्प जानें जिससे आपके शरीर का लचीलापन बेहतर हो सकें. (जानें – दौड़ने के दौरान इंजरी से बचाव के तरीके)

सुरक्षा टिप्स

  • ज्यादा न करें – दूसरी एक्सरसाइज की ही तरह स्ट्रेचिंग भी आपके शरीर पर तनाव डालती है. अगर आप दिन में एक ही मांसपेशी को अधिक बार स्ट्रेच करते है तो इससे नुकसान होने का खतरा अधिक रहता है.
  • बाउंस न करें – सालों पहले बैलिस्टिक स्ट्रेचिंग को लचीलापन बढ़ाने के बेहतर तरीको में से एक माना जाता था. लेकिन अब एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह के स्ट्रेच में बाउंस करने से बचा जाना चाहिए.
  • मांसपेशियों के ठंडे होने पर स्ट्रेच न करें – मांसपेशियों के ठंडे होने पर स्ट्रेचिंग करना काफी कठिन होता है. इसलिए वर्कआउट के बाद स्ट्रेच करना बेहतर रहता है. एक्सरसाइज न करने के मामलों में 5 से 10 मिनट हल्का कार्डियों जैसे वाल्क करना या जॉगिंग की जा सकती है.
  • सहजता के पॉइंट से आगे स्ट्रेच न करें – मांसपेशियों के स्ट्रेच के दौरान कुछ तनाव महसूस करना आम है. लेकिन इसके दौरान दर्द नहीं होना चाहिए. स्ट्रेचिंग करने पर दर्द होने लगे तो इससे बचें.

अंत में

अगर आप एक्सरसाइज के लिए नए है या मौसमी एथलीट है, आप नियमित रूप से स्ट्रेचिंग करने से लाभ उठा सकते है. रोजाना अपने वर्कआउट में 5 से 10 मिनट की स्टेटिक या डाइनेमिक स्ट्रेच को शामिल करने से मोशन को बढ़ाने, पोस्चर को बेहतर करने और दिमाग को राहत पहुंचाने में मदद मिलती है. (जानें – स्टैमिना कैसे बढ़ाएं)

References –

 

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