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ट्राइग्लिसराइड लेवल कम कैसे करें – how to reduce triglycerides naturally in hindi

ट्राइग्लिसराइड लेवल कम कैसे करें – how to reduce triglycerides naturally in hindi

हमारे ब्लड में पाए जाने वाले एक प्रकार के फैट को ट्राइग्लिसराइड्स कहा जाता है.

भोजन खाने के बाद हमारा शरीर उसे कैलोरी में बदलता है और जिन कैलोरी की जरूरत हमारे शरीर को नही पड़ती है उसे ट्राइग्लिसराइड्स में बदलकर फैट सेल्स में स्टोर कर देता है. जिसे जरूरत पड़ने पर एनर्जी के लिए बाद में प्रयोग किया जाता है.

जैसा कि हम जानते है कि शरीर में एनर्जी के लिए ट्राइग्लिसराइड्स की जरूरत पड़ती है. लेकिन बहुत ज्यादा ट्राइग्लिसराइड्स होने पर हार्ट रोग का खतरा बढ़ जाता है.

इसके अलावा अध्ययनों में पाया गया है कि मोटापा, डायबीटिज़ का स्तर, रोजाना शराब पीने और हाई कैलोरी डाइट लेने से हाई ट्राइग्लिसराइड्स लेवल हो सकते है.

आज इस लेख में हम आपको बताने वाले है कि प्राकृतिक रूप से ट्राइग्लिसराइड्स कैसे कम करें या ट्राइग्लिसराइड्स कम करने के उपाय –

प्राकृतिक रूप से ट्राइग्लिसराइड्स कैसे कम करें – how to reduce triglycerides naturally in hindi

शुगर को सीमित करना

  • ज्यादा चीनी का सेवन करना काफी सारे रोगों को न्यौता देना जैसा है.
  • सॉफ्ट ड्रिंक, सोडा या बाजार में मिलने वाले जूस में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है.
  • डाइट में यही एक्सट्रा चीनी पीने से यह ट्राइग्लिसराइड्स में बदल जाती है जिससे इसके लेवल बढ़ जाते है. 
  • साथ ही हार्ट रोग का खतरा भी बढ़ता है.
  • कोशिश करनी चाहिए कि जूस आदि फलों और अपने घर में बनाया हुआ बिना चीनी वाला ही पीएं.
  • फलों, शहद आदि में मिलने वाली नैचुरल शुगर से कोई नुकसान नही होता है.

वजन घटाना

  • जब आप जरूरत से ज्यादा कैलोरी खाते है तो ऐसे में शरीर उसे ट्राइग्लिसराइड्स में बदलकर फैट सेल्स में स्टोर कर देता है.
  • ऐसी स्थिति में वजन कम करना बहुत प्रभावी माना जाता है.
  • अध्ययनों में लंबे समय तक वजन घटने के बाद देखा गया है कि इससे ब्लड ट्राइग्लिसराइड्स लेवल पर काफी गहरा प्रभाव होता है.
  • इसलिए वजन कम करने को ट्राइग्लिसराइड्स कम करने के तरीको में काफी अच्छा माना जाता है.

लो कार्ब डाइट

  • ज्यादा चीनी की ही तरह ज्यादा कार्ब्स खाने से वह ट्राइग्लिसराइड्स में बदलकर फैट सेल्स में जमा हो जाते है.
  • लो कार्ब डाइट लेने से ब्लड में ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल कम हो जाते है.
  • अध्ययनों में देखा गया है कि लो कार्ब डाइट खाने से ब्लड में ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल कम होता है.  

ज्यादा फाइबर खाएं

  • फलों, सब्जियों और पूर्ण अनाज में पाए जाने वाला फाइबर, पाचन के लिए बहुत जरूरी होता है.
  • डाइट में फाइबर की मात्रा ज्यादा लेने से फैट के साथ छोटी आंत में शुगर अवशोषण कम हो जाता है.
  • जिससे ब्लड में ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल कम हो जाता है.
  • साथ ही लो फाइबर डाइट से ब्लड में ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल बढ़ जाता है.
  • लेकिन हाई फाइबर डाइट लेने से ट्राइग्लिसराइड्स लेवल कम हो जाता है.

ट्रांस फैट से दूर रहें

  • प्रोसेस्ड फ़ूड में मिलने वाला ट्रांस फैट एक प्रकार का फैट होता है.
  • जो अधिकतर बाजार में मिलने वाले तले हुए भोजन, बिस्कुट आदि में मिलता है, जिन्हें हाइड्रोजिनेटिड ऑयल में पकाया जाता है.
  • इंफ्लामेटरी गुणों के कारण ट्रांस फैट को कई रोगों में सहायता देने से जोड़ा जा सकता है.
  • जिसमें से एक ही ‘खराब’ एलडीएल कोलेस्ट्रोल और हार्ट रोग का खतरा होना.
  • ट्रांस फैट काने से ब्लड में ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल बढ़ जाते है.
  • इसलिए बाजार से कुछ भी खाने की वस्तु खरीदते समय उसपर लिखी सामग्री पढ़नी चाहिए.

रोज़ाना एक्सरसाइज

  • ‘अच्छा’ कोलेस्ट्रोल यानि एचडीएल लेवल ज्यादा होने पर ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल कम हो जाते है.
  • एरोबिक एक्सरसाइज करने से ब्लड में एचडीएल कोलेस्ट्रोल के लेवल बढ़ते है जिसके परिणामस्वरूप ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल में कमी आती है. 
  • एरोबिक एक्सरसाइज में वाल्क करना, दौड़ना, साईकल चलाना और स्विमिंग की जा सकती है.
  • हफ्ते में कम से कम 5 दिन तक हर रोज़ 30 मिनट की एक्सरसाइज की जानी चाहिए.
  • लंबे समय के प्रभावों की बात करें तो एक्सरसाइज का फायदा, ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल कम होने पर दिखता है.

शराब का सेवन न करना

  • शराब में शुगर और कैलोरी का लेवल हाई होता है.
  • इन कैलोरी का उपयोग न होने पर वह ट्राइग्लिसराइड्स में बदलकर फैट सेल्स में जमा हो जाते है.
  • काफी सारी रिसर्च का मानना है कि हल्के से मध्यम अल्कोहल पीने से हार्ट रोग के रिस्क को कम किया जा सकता है.

ओमेगा- 3 फैटी एसिड

  • डाइट में जरूरी तत्वों में से एक ओमेगा-3 फैटी एसिड के कई हेल्थ बेनेफिट्स होते है.
  • इससे ब्लड में ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल कम होता है.
  • साथ ही कई तरह के रोगों जैसे हार्ट रोग आदि के रिस्क को कम करता है.
  • इसका सेवन ट्राइग्लिसराइड्स कम करने तरीकों में काफी प्रभावी है.

अनसैचुरेटिड फैट

  • अध्ययनों में देखा गया है दूसरे फैट के स्थान पर मोनोअनसैचुरेटिड फैट और पॉलीअनसैचुरेटिड फैट से ब्लड में ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल कम हो जाते है.
  • मोनोअनसैचुरेटिड फैट – ऑलिव ऑयल, नट्स और एवोकाडो में मिलते है.
  • पॉलीअनसैचुरेटि़ड फैट – वेजीटेबल ऑयल और फैटी फिश में मौजूद होते है.
  • रिसर्च के अनुसार सैचुरेटिड फैट लेने से ब्लड में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ जाता है.
  • जबकि पॉलीअनसैचुरेटिड फैट से ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल कम होता है.
  • ट्राइग्लिसराइड्स लेवल कम करने के प्रभावी तरीकों में से एक है कि भोजन को ऑलिव ऑयल या वेजीटेबल ऑयल से पकाया जाएं.

समय से भोजन खाना

  • हाई ट्राइग्लिसराइड्स लेवल का एक कारण इंसुलिन संवेदनशीलता भी होता है.
  • भोजन खाने के बाद सेल्स पेनक्रियाज़ को सिग्नल भेजते है जिसके बाद ब्लड में इंसुलिन रिलीज होती है.
  • जिसके बाद एनर्जी के लिए सेल्स तक ग्लूकोज को पहुँचाने में इंसुलिन का रोल होता है.
  • ब्लड में ज्यादा इंसुलिन होने पर हमारा शरीर उसके लिए रसिसटेंट (आदत हो जाना) हो जाने पर इंसुलिन ठीक से काम नही कर पाती है.
  • इससे ब्लज में ग्लूकोज और ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल बढ़ जाता है.
  • नियमित रूप और हेल्दी भोजन से इंसुलिन संवेदनशीलता को कम किया जा सकता है.
  • इससे हार्ट रोग का खतरा कम होने और खराब कोलेस्ट्रोल का लेवल कम होता है.
  • समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लेकर रूटीन बनाना चाहिए.

ड्राई फ़्रूट्स खाना

  • इनमें फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड और अनसैचुरेटिड फैट मौजूद होते है जो ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल को कम करते है.
  • ड्राई फ़्रूट्स जैसे – बादाम, भिदुरकाष्ट, अखरोट, बादाम, पिसता, मैकाडमिया, ब्राजील नट्स आदि.
  • इनके नियमित सेवन करने से ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल कम होता है.

डाइट में सोयाप्रोटीन

  • यह प्रोटीन से भरपूर होते है जिनके कई हेल्थ बेनेफिट्स होते है.
  • ऐसा खासकर एलडीएल कोलेस्ट्रोल के लेवल को कम करने में होता है.
  • सोयाबीन में मौजूद प्रोटीन से ब्लड में ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल कम होते है.
  • सोयाप्रोटीन – सोयीबीन, टोफू और सोया दूध में मिलता है.

नैचुरल सप्लीमेंट

  • फिश ऑयल – हार्ट की हेल्थ पर इसके लाभों के लिए इसे जाना जाता है. इसे लेने से ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल कम होता है.
  • मेथी – इसे दूध के प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जाता है जिससे ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल कम होते है.
  • लहसुन का अर्क – इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लामेटरी गुण ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल को कम करने के लिए जाने जाते है.
  • गुगल – हाई कोलेस्ट्रोल वाले लोगों में इसका उपयोग किया जाता है, साथ ही इसे ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल को कम करने में प्रभावी माना जाता है.
  • करक्यूमिन – हल्दी में मौजूद तत्वों में से एक करक्यूमिन को ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल कम करने में प्रभावी उपाय माना जाता है.

अंत में

ब्लड में ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल कम या ज्यादा होने का कारण हमारी डाइट और लाइफस्टाइल होते है. हेल्दी, अनसैचुरेटिड फैट के सेवन के साथ कार्ब्स कम लेना और रेगुलर एक्सरसाइज करने जैसे लाइफस्टाइल बदलाव करके ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल को कम किया जा सकता है. साथ ही इससे पूरे स्वास्थ को अच्छा बनाया जा सकता है.

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Kartik bhardwaj

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