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लुपस के बारे में – lupus in hindi

लुपस के बारे में – lupus in hindi

इस लेख में आप जानेंगे लुपस क्या होता है, इसके लक्षण, कारण, रिस्क फ़ैक्टर, प्रकार, जटिलताएं, इलाज, डाइट, निदान और बचाव –

लुपस क्या होता है? – what is lupus in hindi

  • लुपस एक क्रोनिक ऑटोइम्यून कंडीशन होती है जिसके दौरान पूरे शरीर पर इंफ्लामेशन हो जाती है.
  • हालांकि, यह मुख्यता एक एरिया पर होने वाली कंडीशन है जो हमेशा सिस्टमेटिक नहीं होती है.
  • ऑटोइम्यून रोग वह होते है जिनमें हमारा अपने शरीर का इम्यून सिस्टम सेल्स के इंफ्लामेशन और नुकसान के लिए जिम्मेदार होते है.
  • लुपस से ग्रसित काफी सारे लोगों को इसका माइल्ड अनुभव होता है, लेकिन बिना इलाज के यह गंभीर हो सकती है.
  • अभी इस रोग को कोई इलाज नहीं है परंतु ट्रीटमेंट में लक्षणों से राहत और इंफ्लामेशन कम की जा सकती है.

लुपस के लक्षण – what are the symptoms of lupus?

  • इसके लक्षण आपके शरीर के प्रभावित हिस्सों पर निर्धारित हो सकता है.
  • लुपस के कारण होने वाली इंफ्लामेशन शरीर के काफी सारे अंगों और टिश्यू को प्रभावित कर सकते है.
  • शरीर के इन हिस्सों में जॉइंट, स्किन, हार्ट, फेफड़े, दिमाग, किडनी, ब्लड आदि शामिल है.
  • लक्षण एक से दूसरे व्यक्ति पर अलग हो सकते है जैसे स्थाई, अचानक से लक्षण गायब हो जाना, कभी कभी लक्षणों का उभरना हो सकता है.
  • लुपस के दो मामले एक जैसे नहीं होते है. लुपस के कारण होने वाली इंफ्लामेशन से किडनी, ब्लड फेफड़ो समेत कई अंगो की जटिलताएं हो सकती है.

सबसे आम संकेत और लक्षणों में –

  • तेज़ बुखार
  • थकान
  • जोड़ों में दर्द
  • सांस न आना
  • रैश
  • सिरदर्द
  • शरीर में ऐंठन
  • ड्राई आंखे
  • स्किन का छिलना
  • भ्रम की स्थिति
  • मुंह सूखना
  • सीने में दर्द
  • मेमोरी लॉस

लुपस के शुरूआती लक्षण

  • इसके लक्षण व्यस्क होने पर शुरू हो सकते है.
  • इसके अलावा 13 से लेकर 30 साल की आयु के बीच कभी भी हो सकते है.
  • शुरूआती संकेतों में रैश, जोड़ों की सूजन, बुखार, थकान, हेयर लॉस, थायराइड, फेफड़े, किडनी की समस्या, आंखों और मुंह का ड्राई होना या गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट की परेशानी आदि हो सकते है.
  • यह लक्षण अन्य कंडीशन से मिलते जुलते होते है. इसका मतलब यह नहीं होता है कि आपको लुपस है.
  • कोई भी सवाल या समस्या होने पर डॉक्टर से बात कर सलाह लेनी चाहिए.

लुपस फोटो सेंसिटिविटी

  • सूर्य की रोशनी में बहुत अधिक बैठना किसी के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है.
  • लुपस वाले काफी सारे लोगों को फोटो सेंसिटिविटी होती है.
  • फोटो सेंसिटिविटी का मतलब होता है कि आपको यूवी रेडिएशन के प्रति संवेदनशीलता है.
  • लुपस वाले कुछ लोगों को सूर्य की लाइट के एक्सपोजर से रैश, थकान, अंदरूनी सूजन, जोड़ों में दर्द आदि हो सकता है.
  • लुपस होने पर बाहर निकलते समय सनस्क्रीन का उपयोग करें और बचाव करने वाले कपड़े पहनें.

लुपस के कारण क्या है? – what are the causes of lupus?

  • जेनेटिक्स – लुपस से जुड़े हुए 50 से अधिक जिन्स की पहचान हो चुकी है. इसके अलावा फैमिली हिस्ट्री आदि होने पर कंडीशन का अनुभव करना पड़ सकता है.
  • इंफेक्शन – हालांकि इस पर अभी अध्ययन जारी है लेकिन काफी सारे इंफेक्शन को इसका कारण माना गया है.
  • दवाएं – कुछ रोगों की दवाएं जैसे इंफ्लामेट्री बाउल रोग, एंकोलॉजिंग स्पॉडिलाइसिस, रूमेटॉइड अर्थेराइटिस आदि दवाओं के लंबे समय से इस्तेमाल के कारण यह हो सकता है.
  • वातावरण – तनाव, स्मोकिंग, टॉक्सिन एक्सपोजर आदि लुपस को ट्रिगर कर सकते है.
  • हार्मोन – असामान्य हार्मोन लेवल जैसे ऐस्ट्रोजन लेवल का बढ़ना लुपस का कारण बन सकता है.

लुपस के रिस्क फ़ैक्टर – risk factors of lupus

  • लिंग – पुरूषों की तुलना में महिलाओं को लुपस होने का रिस्क अधिक होता है.
  • आयु – लुपस किसी भी आयु में हो सकता है लेकिन इसका अधिकांश निदान 15 से लेकर 44 आयु के बीच होता है.
  • फैमिली हिस्ट्री – लुपस की फैमिली हिस्ट्री होने पर आपको कंडीशन विकसित होने का रिस्क बढ़ जाता है.
  • ध्यान रहें कि रिस्क फैक्टर होने का मतलब यह नहीं होता कि आपको भी यह होगा. आपको रोग पाने के मौके अधिक होते है.

क्या लुपस को ठीक किया जा सकता है?

  • इसे ठीक नहीं किया जा सकता है लेकिन ऐसे कई तरीके है जिनसे इसे मैनेज किया जा सकता है.
  • लुपस के ट्रीटमेंट में कई सारे फ़ैक्टर पर फोकस होता है.
  • जिसमें लक्षण दिखने पर उनका इलाज करना.
  • लुपस के बार बार उभार होने पर उनसे बचाव करना.
  • अंगों और जोड़ों पर होने पर नुकसान को कम किया जा सकता है.
  • डॉक्टर द्वारा बताया गया ट्रीटमेंट प्लान को फॉलो करना चाहिए.

लुपस के प्रकार – types of lupus

नियोनेटल लुपस

  • यह कंडीशन काफी रेयर होती है और दुधमुहे बच्चों को प्रभावित करती है जिनकी माताओं के अंदर ऑटोइम्यून एंटीबॉडी होती है.
  • यह ऑटोइम्यून एंटीबॉडी मां से गर्भ में पल रहे शिशु में ट्रांसमिट हो जाती है.
  • इसमें जन्म के बाद लिवर समस्या, लो ब्लड सेल काउंट, स्किन रैश आदि होते है.

कुटेनियस लुपस

  • इस प्रकार का लुपस आपकी स्किन तक सीमित होता है.
  • इसके कारण रैश या छिलने के कारण निशान पड़ सकता है.

सिस्टमेटिक लुपस

  • यह लुपस का सबसे आम प्रकार है इसे एसएलई (SLE) कहा जाता है.
  • यह कंडीशन का प्रकार किडनी, स्किन, जोड़े, हार्ट, फेफड़े, नर्वस सिस्टम आदि.
  • यह हल्के से लेकर गंभीर हो सकते है जो समय के साथ खराब हो सकते है.
  • लक्षणों के खराब होने को फ्लेअरअप कहा जाता है.

लुपस की जटिलताएं – lupus complications

  • किडनी – इससे किडनी को नुकसान हो सकता है जिससे किडनी फेलियर भी हो सकता है.
  • हार्ट – इससे हार्ट के आसपास टिश्यू में इंफ्लामेशन के कारण हार्ट रोग, हार्ट अटैक या स्ट्रोक हो सकता है.
  • ब्लड वैसल्स – लुपस के कारण ब्लड वैसल्स इंफ्लेमड हो सकती है. जिससे ब्लीडिंग या ब्लड क्लॉटिंग भी हो सकती है.
  • फेफड़े – फेफड़ों में सूजन हो जाने के कारण सांस लेने में दर्द हो सकता है.
  • नर्वस सिस्टम – लुपस की कंडीशन दिमाग को प्रभावित कर सकती है जिससे सिरदर्द, चक्कर आना, दौरे आदि पड़ सकते है.

लुपस का इलाज – lupus treatment

  • लक्षणों के आधार पर लुपस उभरने का इलाज किया जाता है.
  • इसके लिए नियमित रूप से डॉक्टर से बात करती रहनी चाहिए.
  • इससे डॉक्टर को आपकी सेहत की जानकारी और ट्रीटमेंट प्लान काम कर रहा है या नहीं, जाननें में मदद मिलेगी.
  • आपके लुपस के लक्षण समय के साथ बदल सकते है जिसके लिए समय के साथ दवाओं का बदलाव करना जरूरी होता है.
  • दवाओं के अलावा हेल्दी डाइट लेना, विटामिन डी, कैल्शियम, फिश ऑयल जैसे सप्लीमेंट मदद कर सकते है.
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज करना, स्मोकिंग बंद करना, यूवी लाइट का एक्सपोज़र मदद कर सकता है.

लुपस की डाइट – lupus diet

  • ओमेगा-3 फैटी एसिड का सेवन करने से लाभ मिलता है.
  • हाई कैल्शियम फ़ूड जो लो फैट डेयरी प्रोडक्ट से बने होते है.
  • साबुत अनाज वाले कार्ब्स खाने से लाभ मिलता है.
  • फल और सब्जियों का सेवन करने के साथ संतुलित डाइट खानी चाहिए.

इन फ़ूड्स से बचें

  • शराब – यह दवाओं के साथ इंटरैक्ट कर सकती है जिससे एनएसएड्स लेने वाले लोगों को गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग हो सकती है. साथ ही इंफ्लामेशन का अंदेशा बढ़ जाता है.
  • हाई नमक और कोलेस्ट्रोल वाले फ़ूड्स – ऐसे भोजन से बचना चाहिए, इससे पेट फूलना, हाई ब्लड प्रेशर से बचा जा सकता है.

लुपस का निदान – lupus diagnosis

  • इसके लिए डॉक्टर द्वारा कई ब्लड टेस्ट और इमेजिंग टेस्ट किए जाते है.
  • संकेत और लक्षणों के आधार पर दूसरी कंडीशन को ध्यान रखते हुए निदान किया जाता है.
  • रिसर्च के अनुसार लुपस वाले लोगों के शरीर में एंटीबॉडी होती है.
  • मेडिकल हिस्ट्री आदि की जानकारी ली जाती है.
  • इसके अलावा ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, चेस्ट एक्स-रे, टिश्यू बायोप्सी की जाती है.
  • किडनी नुकसान होने पर किडनी बायोप्सी की जाती है.

लुपस से बचाव – lupus prevention

  • सीधे सूर्य की रोशनी से बचें.
  • तनाव को मैनेज करने वाली तकनीक का उपयोग करें.
  • खुद को इंफेक्शन से बचाव करने वाली तकनीक इस्तेमाल करें.
  • पूरा रेस्ट लें जिससे शरीर को हील होने में मदद मिलें.

अंत में

ट्रीटमेंट प्लान से बने रहें और दवाओं का सेवन समय से करें, इससे फ्लेअर अप से बचाव के साथ साथ अंदरूनी अंगो को होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है.

दवाओं से आराम न मिलने पर अपने डॉक्टर को सूचित कर उचित उपचार लें.

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Kartik bhardwaj

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