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एक्जिमा का होम्योपैथिक उपचार – atopic dermatitis homeopathy treatment

एक्जिमा का होम्योपैथिक उपचार – atopic dermatitis homeopathy treatment

इस लेख में आप जानेंगे एक्जिमा क्या होता है और इसका होम्योपैथी उपचार –

एक्जिमा का होम्योपैथिक उपचार – atopic dermatitis homeopathy treatment

हीपर सल्फ्यूरिस कल्केरियम

  • जिन लोगों का एक्जिमा तीव्र और आसानी से संक्रमित हो जाता है उनको काफी मदद करती है.
  • इस तरह की स्किन परेशानी में क्रैक काफी गहरे हो जाते है जिससे उनके ठीक होने में समय लगता है.

कैलकेरिया कार्ब

  • ठंड के समय में हाथ, पैर और स्किन पर क्रैक आदि आना खराब हो जाता है जिससे एक्जिमा विकसित होता है.
  • ऐसी कंडीशन में कैलकेरिया कार्ब दवा काफी असर करती है.

सल्फर

  • तीव्र जलन, खुजली आदि जो गर्मी लगने पर खराब हो सकती है ऐसे में नहाने की सलाह दी जाती है.
  • जो लोग एक्जिमा की दवा बिना किसी लाभ के इस्तेमाल करते है उनको काफी लाभ देती है.

मेजेरियम

  • इस दवा का उपयोग करने वाले लोगों को तेज़ घबराहट जो पेट में महसूस होती है.
  • साथ ही एकदम से खुजली वाली फुंसियां जिससे स्किन पतली हो सकती है.
  • ठंडी सिकाई से काफी मदद मिल सकती है.

ग्रैफाइटिस

  • लंबे समय से चले आ रहे स्किन डिसऑर्डर वाले लोगों पर यह दवा काफी असरदार होती है.
  • इस दवा के उपयोग के बाद सुबह उठने के बाद एकाग्रता की कमी हो सकती है.

रस टॉक्स

  • एक्जिमा के साथ फुंसियां निकलने जो लाल और सूजन वाली दिखती है, ऐसे लोगों में यह दवा मदद करती है.
  • इस दवा के सेवन के बाद असहजता, चिड़चिड़ापन और घबराहट हो सकती है.
  • मांसपेशियों की जकड़न जो गर्मी और मोशन के साथ ठीक हो जाती है.

आर्सेनिक एल्बम

  • स्किन का ड्राई, खुजली वाला और तीव्र जलन के साथ खुजाने पर खुजली खराब हो सकती है.
  • इस पर गर्मी को अप्लाई करने से राहत महसूस हो सकती है.
  • घबराहट, रेस्टलेस आदि जैसी कंडीशन इस दवा के सेवन के बाद हो सकती है.
  • साथ ही पेट में जलन के अलावा अपच भी हो सकती है.

अन्य दवाएं

  • एण्टिमानियम क्रूडम
  • एरम ट्रिफाइलम
  • केलैन्डयुला
  • पेट्रोलियम

एक्जिमा क्या होता है – what is atopic dermatitis in hindi

  • यह क्रोनिक कंडीशन में से एक है जो बच्चों और नवजातों को प्रभावित करती है.
  • इसके दौरान ड्राई और खुजली वाली स्किन होती है.
  • कुछ मामलों में खुजलाने पर स्किन लाल, पस निकलना, फुंसियां आदि हो सकती है.
  • लंबे समय के क्रोनिक मामलों में स्किन ड्राई होने के बाद पपड़ी पड़ने लगती है.

References –



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Kartik bhardwaj

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