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असुरक्षित स्कूल – Unsafe School in Hindi

असुरक्षित स्कूल – Unsafe School in Hindi

गुरुग्राम के ‘रेयान इंटरनेशनल स्कूल’ में सात साल के छात्र प्रद्युम्न की हत्या का मामला आपको याद ही होगा, जिसके बाद राज्य के पानीपत के ‘द मिलेनियम स्कूल’ में कक्षा चार की एक छात्रा के साथ हुई छेड़छाड़ हुई थी और हमले की घटना ने आम लोगों को एक बार फिर झकझोर कर रख दिया. जिसके बाद स्वभाविक ही अभिभावकों में तीखा आक्रोश देखा गया था. इसके खिलाफ बड़ी संख्या में लोगों ने स्कूल के बाहर एकजुट होकर प्रदर्शन किया था. साथ ही स्कूल के आला अधिकारीयों की गिरफ़्तारी के अलावा घटना की सीबीआइ जांच कराने की मांग भी की गई थी.

अगर याग न हो तो फिर से बता देते है कि पानीपत के स्कूल में परीक्षा चल रही थी. जिसकें चलते कक्षा चार में पढ़ रही बच्ची स्कूल में पेपर देने गई थी. जिसके दौरान वह टॉयलेट गई, लौटनें पर बच्ची के शरीर पर नोचने और काटने के घाव मिले. इसके बाद यह भी पता चला, कि हरे रंग की टी-शर्ट पहने किसी व्यक्ति ने उसे पकड़ लिया था. साथ ही जान से मारने की धमकी भी दी. जाहिर है, कि इस हादसे के बाद बच्ची बेहद डर गई और परीक्षा तक नहीं दे पाई. लेकिन स्कूल मैनेजमेंट ने इस घटना पर परदा डालने की कोशिश की थी.

स्कूल मैनेजमेंट ने बच्ची के अभिभावकों को बुलाया कहा कि बच्ची की तबियत खराब हो गई है. स्कूल ने सही जानकारी नहीं दी. लेकिन जब बच्ची घर गई तो उसने अपने परिजनों को सारी हकीकत बताई. जिसके बाद परिजनों ने देर ना करते हुए महिला थाने में इस मामले की शिकायत दर्ज की.

पुलिस ने प्रबंधतंत्र से पूछताछ की जिसमें स्कूल की चालाकी की बात सामने आई हैं. लेकिन अभी तक अभियुक्त की गिरफ्तारी नहीं हुई है. देखा जाए तो इस पूरे प्रकरण में ‘रेयान स्कूल’ की ही तरह मैनेजमेंट की चालाकी सामने आई है. प्रद्युम्न हत्याकांड में भी स्कूल मैनेजमेंट ने हत्या के सबूतों को मिटाने की कोशिश की थी. काफी देर तक तो बच्चे के माता-पिता को भी अंधेरे में रखा गया था.

चिंता करने वाली बात यह हैं कि जिस तरह स्कूलों में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और यौन-दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आ रही हैं, वह बेहद विडंबना की बात है. पिछले दिनों ऐसी ख़बरें दिल्ली और राजस्थान से भी आई थीं, जहाँ दिल्ली के शाहदरा इलाके में एक स्कूल में पांच साल की बच्ची के साथ बलात्कार की घटना सामने आई थी. जिसमें पुलिस ने स्कूल मैं ही काम करने वाले चालीस वर्षीय चपरासी को गिरफ्तार किया था.

उसी प्रकार राजस्थान के सीकर के एक स्कूल टीचर और मैनेजमेंट ने एक छात्रा के साथ महीनों तक बलात्कार किया. जब वह गर्भवती हो गई तो, एक निजी अस्पताल की मिलीभगत से उसका गर्भपात कराया. लेकिन छात्रा ने साहस दिखाते हुए अस्पताल में जाने के बाद सभी की असलियत सामने रख दी.

आखिरकार सभी के मन में बड़ा सवाल यही हैं कि, अगर स्कूल भी बच्चों-बच्चियों के लिए सुरक्षित नहीं तो फिर ऐसी कौन सी जगह होगी जहां सुरक्षा की उम्मीद की जाए? अब समय आ गया है कि केंद्र और राज्य की सरकारें मिलकर कोई ऐसी नियमावली तैयार करें, जिससे स्कूलों के माहौल को सुरक्षित और भयरहित बनाया जा सके. उसका पालन सुनिश्चित करना भी सरकारों की ही ज़िम्मेदारी हैं.

सरकारों को ऐसे शिक्षा बोर्ड पर भी नकेल कसनी चाहिए जो मानक पूरे न करने वाले ऐसे प्रबंधतंत्रों को भी स्कूल चलाने की अनुमति दे देता है. इसके अलावा प्रशासन द्वारा इन स्कूलों की समय-समय पर जांच-पड़ताल होनी चाहिए. जो कि नहीं की जाती. यही कारण है, कि स्कूल परिसरों में ऐसी घटनाएं होती रहती हैं और इनपर लगाम नहीं लग पाती. लेकिन अब समय आ गया है कि जल्द से जल्द इस दिशा में कुछ सार्थक कदम उठाए जाएं और स्कूलों में बच्चे-बच्चियों को सिक्यूरिटी मिले और आगे ऐसी घटनाए ना हो ऐसा सुनिश्चित करना चाहिए.

लेकिन हमारे देश में पत्रकारों के अंदर यही कमी है कि वे फिर से मामलों को फॉलों अप नही लेते है. ऐसा क्यूँ? पूछे जाने पर कई प्रकार के तर्क आदि प्रस्तुत करते है. जो मीडिया न्यायव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लोगों को जागरूक कर सकता है वे आपनी टीआरपी का रोना रोने और बिना सिरपैर की बहस दिखाने में व्यस्त रहता है. सिर्फ इतना ही नही जबरदस्ती का शोर आजकल ट्रैंड बन गया है.

आशा है कि इस लेख को पढ़कर शायद कुछ लोगों की आँखे खुले और वे इन मामलों की सुध ले लें.

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