Select Page

एवरेज टेस्टिकल साइज कितना होता है – what is the average testicle size in hindi

एवरेज टेस्टिकल साइज कितना होता है – what is the average testicle size in hindi

पुरूषों के शरीर में टेस्टिकल्स को मेल सेक्स हार्मोन और स्पर्म विकसित करने के लिए जाना जाता है. पुरूषों के टेस्टिकल्स का एवरेज साइज़ तकरीबन 4 x 3 x 2 सेंटीमीटर होता है. यह ओवल शेप के होते है.

पुरूषों के शरीर में 2 टेस्टिकल्स होते है जिन्हें अंडकोष या टेस्टिस भी कहा जाता है. दोनों टेस्टिकल्स में से एक का बड़ा होना और दूसरे का थोड़ा छोटा होना आम है. यह स्क्रोटम के अंदर स्पर्मेटिक कॉर्ड से जुड़े हुए होते है.

आज इस लेख में टेस्टिकल से जुड़ी समस्याओं और एवरेज टेस्टिकल साइज के जवाब देने वाले है. जिससे आप इनसे जुड़ी बातें जान जाएं.

क्या टेस्टिकल्स के साइज से फर्क पड़ता है – does size of testicals matter in hindi

  • टेस्टोस्टेरोन और स्पर्म का हेल्दी प्रोडक्शन टेस्टिकुलर वॉल्यूम पर निर्भर करता है.
  • कुछ अध्ययनों के अनुसार बड़े टेस्टिकल्स वाले जानवरों में हाई टेस्टोस्टेरोन लेवल होते है.
  • जबकि छोटे टेस्टिकुलर वॉल्यूम पर लो स्पर्म प्रोडक्शन होता है.
  • कुछ विशेष कंडीशन जैसे क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम होने पर टेस्टोस्टेरोन के लेवल को लेकर चिंता हो सकती है.
  • इन कंडीशन के लक्षणों में टेस्टिस छोटे होना, गुप्तवृषणता या कुछ महिला गुण जैसे शरीर व चेहरे पर कम बाल होना और पुरूषों में ब्रेस्ट टिश्यू की ग्रोथ होना हो सकता है.
  • इन सभी के अलावा क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम होने पर इनफर्टिलिटी हो सकती है.

असामान्य रूप से टेस्टोस्टेरोन के लेवल कम होने पर हाइपोगोनाडिज्म हो सकता है जिसके लक्षण –

  • एवरेज साइज से छोटे टेस्टिकल्स
  • ब्रेस्ट टिश्यू ग्रोथ
  • दूसरे पुरूषों की तुलना में शरीर व चेहरे पर कम बाल होना
  • क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम जैसे दूसरे लक्षण

हाइपोगोनाडिज्म का इलाज टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी से किया जाता है और काफी बार यह प्यूबर्टी के समय शुरू होता है. इसके अलावा जेनेटिक कारण भी इसमें बहुत बड़े फैक्टर होते है.

अगर आपके अपने अंडकोष पर सूजन आदि महसूस होती है तो ऐसे में तुरंत डॉक्टर से सलाह ली जानी चाहिए. इसके अलावा टेस्टिस का साइज ज्यादा बड़ा होना टेस्टिकुलर कैंसर या कोई अन्य हेल्थ समस्या की तरफ ईशारा करता है.

टेस्टिकल्स की ग्रोथ कब शुरू और कब बंद होता है – when do testicles start and stop growing in hindi

  • जन्म के समय एक पुरूष का टेस्टिकल 1 क्यूबीक सेंटीमीटर होता है.
  • टेस्टिकल्स का यह साइज करीब 8 वर्ष की आयु तक रहता है.
  • 8 वर्ष के बाद प्यूबर्टी आने तक धीरे से बढ़ते है.
  • प्यूबर्टी के ही दौरान शरीर और प्यूबिक जगह पर बाल आना शुरू होते है.
  • टेस्टिकल्स भी उसी ग्रोथ रेट से बढ़ते है और एक अंडकोष का साइज थोड़ा बड़ा और छोटा होना आम होता है.

क्या टेस्टिकल्स सिकुड़ जाते है – can testicles shrink in hindi

  • आयु बढ़ने के साथ ही टेस्टोस्टेरोन के लेवल कम होने लगते है और टेस्टिकल सिकुड़ने लगते है. इस स्थिति को टेस्टिकुलर अट्रॉफी कहते है.
  • यह बदलाव समय के साथ होते है और हो सकता है कि आप इन्हें नोटिस भी न कर पाएं.
  • प्राकृतिक रूप से टेस्टिस सिकुड़ने पर कोई जीवन की कोई समस्या नही होती है.
  • टेस्टोस्टेरोन लेवल कम होने से लिबीदो की कमी और मांसपेशियाँ कम बनती है. यह एजिंग का प्रकृतिक पार्ट है.
  • इन सभी के अलावा टेस्टिकल्स सिकुड़न का कारण ज्यादा ठंडा तापमान या पानी हो सकते है.

टेस्टिकुलर अट्रॉफी के कारण कुछ हेल्थ समस्याएं जैसे –

  • एसीटीडी जैसे गोनोरिया और साइफिल्स
  • टीबी, टेस्टिकल्स का कुछ वायरल इंफेक्शन आदि
  • टेस्टिस को क्षति होना

क्या टेस्टिकल्स का साइज छोटा-बड़ा होना आम है – is it normal for one testicle to be smaller than my other testicle in hindi

  • ऐसा होता है और इसके कारण को लेकर कोई भी मेडिकल जानकारी नही है.
  • हालांकि, एक या दोनों टेस्टिकल्स के साइज और शेप में कुछ बदलाव नोटिस करने पर डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए.
  • अगर एक टेस्टिकल में भारीपन, उभार या साइज में बदलाव दिखें तो यह ट्यूमर या टेस्टिकुलर कैंसर हो सकता है.
  • टेस्टिकुलर कैंसर का इलाज संभव है लेकिन इसका शुरूआत में पता लगना जरूरी है.
  • इस कंडीशन में स्पर्मेटिक कॉर्ड को क्षति होती है जिसमें दर्द और सूजन होती है.
  • ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से सलाह ली जानी चाहिए.

टेस्टिकल हेल्थ – testicle health in hindi

  • टेस्टिकल्स हेल्थ को जानने के लिए हर महीने खुद से टेस्टिकल्स की जांच कर सकते है.
  • सुबह तैयार होने से पहले या नहाने के बाद इसकी जांच की जा सकती है.
  • खुद से जांच करन के लिए एक मिनट हल्के हाथों से अपने टेस्टिकल्स को अंगूठे और अंगुलियों के बीच रोल करें.
  • इस दौरान साइज, शेप या कठोरता की जांच होनी चाहिए.
  • शीशे में देखकर ऐसा करने पर आप पता लगा सकते है कि आप क्या कर रहें हैं.
  • इस दौरान कोई दर्द महसू होने, उभार, सूजन या कोई अन्य बदलाव दिखने पर डॉक्टर से तुरंत मिलें.
  • इसके अलावा कोई भी समस्या आदि होने पर बिना देर करें डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

अंत में 

जनानंग का हेल्दी और फंक्शन करते रहना साइज के मुकाबले ज्यादा बेहतर होता है. अगर आपको लगता है कि आपके टेस्टिकल्स ज्यादा छोटे है या आपको कोई दूसरे लक्षण जैसे लिबीदो की कमी, ब्रेस्ट टिश्यू बढ़ना या बांझपन होने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

इसके लिए टेस्टोस्टेरोन थेरेपी काफी कारगर है. स्पर्म प्रोडक्शन पर असर होने पर फर्टिलिटी स्पेशिलिष्ट से मिलना चाहिए जिससे वह आपको प्रेगनेंट होने के तरीके बता सकें.