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janta curfew Lockdown stories #1

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वैसे तो पिछले कुछ महीनों से मंदी का आलम कुछ ज्यादा ही थी कि कोविड-19 जिसे नोवल कोरोना वायरस के नाम से भी जाना जाता है. यह महामारी पूरे विश्व में फैल गई. अब हम लेखों की कड़ी के जरिए ऐसी ही जनता कर्फ्यु के कारण हो रही परेशानी और साहस की कहानियां साझा करेंगे –

यह कहानी है “ज्वाला” बदला हुआ नाम के व्यक्ति की, जो नोएडा में एक कंपनी में काम कर रहा था और रोज़ाना फ़रीदाबाद से नोएडा अप-डाउन करता था.

शाहीन बाग के धरने के चलते उसे दूसरे रूट से ऑफिस जाना पड़ता था. जब ज्यादा ट्रैफिक जाम से परेशान हुआ तो उसने मैट्रो से आना जाना शुरू किया. लेकिन उसमें उसका समय और पैसा अधिक लगने लगा, वह अपने घर में अकेला कमाने वाला इंसान है.

बीते महीने फ़रवरी में हुआ यह कि वे अपने ऑफिस जाने के लिए थोड़ा जल्दी निकला ताकि उसे ट्रैफिक न मिलें और उसका हाल्फ-डे न लगें.

3 फ़रवरी की उस सुबह हुआ ऐसा कि उसका बाइक पर एक्सीडेंट हुआ जिसके बाद उसकी अंगुलियों में प्लेट डली और उसे डॉक्टर दारा उसे बताया गया कि 1 महीने का टाइम लगेगा. क्योंकि उसके पास अपना हेल्थ इंश्योरेंस था इसलिए अस्पताल का खर्चा बच गया.

चूंकि वे अपने घर की स्थिति जानता था कि अगर वह कमाएंगा नहीं तो खाएगा क्या.

इसलिए 100 फीसदी फिट महसूस न करने पर भी उसने इंटरव्यू देने शुरू किए, एक-दो जगह वह शोर्टलिस्ट भी हुआ.

लेकिन इसके बाद लॉकडाउन हो गया. जो अब 21 दिनों के लिए बढाया जा चुका है.

समस्या और सवाल यह है कि अब वे कैसे मैनेज करेगा? जब लॉकडाउन खत्म होगा तब उसे फिर से नौकरी की तलाश में इधर-उधर घूमना पड़ेगा. इस बीच जो उसका गैप होगा, उसका क्या होगा? अभी के महामारी फैलने के ख़तरे वाले समय में वह अपना व अपने घर वालों का पेट कैसे पालेगा?

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Ankita Singh

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