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अबोरशन के बाद कैसा महसूस करती है महिलाएं, जानें

अबोरशन के बाद कैसा महसूस करती है महिलाएं, जानें

वैसे तो दुनिया में कई तरह के शोध आदि होते रहते है. ऐसी ही रिसर्च पिछले कुछ सालों से की जा रही है जहां महिलाओं से अबोरशन या गर्भपात के बाद का अनुभव और इसे लेकर सबसे अधिक मिले जवाब आपको चौका सकते है.

  • 99 फीसदी महिलाओं ने अबोरशन के 5 साल बाद माना की उनका फैसला सही था.
  • जबकि कुछ महिलाओं ने गर्भपात कराने से पहले सोचने का समय लिया.
  • हालांकि, ऐसे समाज में रहने वाली महिलाएं जहां अबोरशन को गलत समझा जाता है वहां कुछ महिलाएं ऐसी भी रही जिन्हें इसका पछतावा और दुख है.

जनवरी 12 को सोशल साइंस एंड मेडिसन नाम के जर्नल में छपी रिसर्च के मुताबिक अबोरशन के 5 साल बीत जाने के बाद अपनी मर्जी से या सोच विचार कर गर्भपात कराने वाली अधिकत्तर महिलाओं का कहना था कि उन्हें इसके बाद काफी राहत मिली.

आपको बता दें कि दुनिया में ऐसे बहुत से देश है जहां अबोरशन को अच्छा नही माना जाता है. जबकि कुछ देशों में इसपर पाबंदी है. कुछ वर्ष पहले यूरोप के एक देश में अबोरशन पर पाबंदी होने के कारण एक भारतीय यूवती को अपनी जान गंवानी पड़ी थी.

उस केस में हुआ ये था कि महिला का शरीर बच्चे को जन्म देने के लिए स्वस्थ नही था. जिसके बाद डॉक्टर ने गर्भपात की सलाह दी, लेकिन कानून के अनुसार ऐसा करना जुर्म था. जिसके बाद पेट में पल रहे बच्चे की गर्भ में मृत्यु हो गई और अबोरशन न करा पाने के कारण महिला को भी अपनी जान गंवानी पड़ी. इसके बाद वहां काफी बड़ी तदाद में जन आक्रोश देखने को मिला था.

जब महिलाओं से पूछा गया कि क्या यह फैसला सही था?

अमेरिका में हुए सर्वे में पता चला कि महिलाओं ने माना की फैसला सही था. आपको बता दें कि यहां जिन महिलाओं पर यह सर्वे किया गया उनकी औसत आयु 25 वर्ष थी. जबकि 10 में से 6 महिलाएं पहले से ही एक बच्चे की मां थी.

जबकि आधे से ज्यादा महिलाओं को फैसला लेने में कठिनाई हुई. अबोरशन होने के एक हफ्ते बाद उनको लगा कि यह सही था.

5 साल बाद बीत जाने के बाद महिलाओं ने माना की उनका यह फैसला सही था.

अबोरशन से जुड़ी समाज की भावना, महिलाओं को कैसी महसूस हुई?

जब प्रतिभागीयों से पूछा गया कि 6 पैमानो पर कैसा महसूस हुआ जिसमें –

  • राहत महसूस करना
  • खुशी
  • अफसोस
  • दुख
  • गुस्सा
  • पछतावा

50 प्रतिशत से ज्यादा महिलाओं ने माना उन्हें सकारात्मक महसूस हुआ. जबकि 20 फीसद कोई इमोशन महसूस नही कर पाई. 29 फीसदी महिलाओं ने अबोरशन के हफ्ते भर के अंदर मिली-जुली या नकारात्मकता महसूस करी.

कुछ महिलाओं, जिन्होने समाज की प्रतिक्रिया को गंभीरता से लिया और सोचा की समाज क्या कहेगा, वे इससे काफी आहत हुई. जिसके बाद उन्होनें दुख, पछतावा या गुस्से जैसी प्रतिक्रियाएं महसूस की. लेकिन समाज उनके फैसले पर उनके आत्मविश्वास को नही हिला सका.

84 फीसदी महिलाएं जिन्हें 5 साल से अधिक हो गए थे वे अपने फैसले को लेकर पोजीटिव महसूस करती है.

अबोरशन से जुड़ा विज्ञान भविष्य में काफी कानूनों पर असर डाल सकता है

विश्व की बात करें तो ऐसे बहुत से देश है जहां गर्भपात को लेकर सख्त कानून है. अकेले अमेरिका के 34 ऐसे राज्य है जहां अबोरशन से पहले किसी को भी काउंसलिंग के लिए जाना पड़ता है. जिससे अपने फैसले पर अमल के लिए इंतजार करना पड़ता है.

अगर भारत की बात करें तो आपको बता दें कि अबोरशन और मसिकैरेज में अंतर होता है. इसके अलावा हमारे देश में अबोरशन से जुड़े सबसे आम कुछ सवाल और उनके जवाब-

अबोरशन के बाद ब्लीडिंग कब होती है? abortion ke baad bleeding kab tak hoti hai

अबोरशन के बाद पेट के निचले हिस्से में दर्द के साथ पीरियडस के मुकाबले थोड़ी ज्यादा ब्लीडिंग होती है. काफी सारे केस में देखा गया है कि ब्लीडिंग 15 दिनों तक भी रह सकती है. लेकिन ब्लीडिंग बहुत अधिक होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

अबोरशन के बाद पेट दर्द का इलाज – abortion ke baad pet dard ka ilaj

आज के समय में बढ़ती तकनीक के साथ अबोरशन के नए नए तरीके सामने आए है. जिसमें से एक अबोरशन के लिए गोली लेना है. जिसके बाद हैवी ब्लीडिंग होती और पेट में दर्द महसूस होता है. आमतौर पर यह एक हफ्ते तक रहता है लेकिन इसके पीछे का कारण शरीर से भ्रूण का ब्लीडिंग के जरिए निकलना होता है. अगर दर्द ब्लीडिंग लंबे समय तक रहे तो जल्दी से जल्दी डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए.

अबोरशन के बाद पीरियड कब होता है? abortion ke baad period kab hota hai

महिलाओं में पीरियडस की साईकल 3 से 4 हफ्ते के बीच की ही रहती है. ब्लीडिंग बंद होने के बाद नार्मल पीरियड्स की साईकल शुरू हो जाती है. जबकि पीरियड अनियमित होने पर डॉक्टर से अनियमित पीरियड के कारण और इलाज जानने के लिए सलाह लेनी चाहिए.

अबोरशन के बाद क्या खाएं? abortion ke baad kya khaye in hindi

अबोरशन के बाद शरीर में कमज़ोरी आ जाती है. ऐसे में खुद को ताकत देने वाले फूड खाने चाहिए और अपने भोजन में प्रोटीन, आयरन, फोलेट और कैलशियम से भरपूर भोजन लेना चाहिए.

  • हरी पत्तेदार सब्जियां, मेवा, मूंग-मसूर की दाल, फलियां, तिल के बीज और कद्दू के बीज आदि में आयरन होता है.
  • जबकि कैल्शियम फूड के लिए खजूर, दूध से बने प्रोडक्ट, ड्राई फ्रूटस् आदि का सेवन किया जा सकता है.
  • शतावरी, ब्रोकोली, नींबू-संतरा आदि फल, मूंग-मसूर की दाल, मटर, एवोकैडो, पालक, भिंडी, आदि फोलेट युक्त व्यंजनों के उदाहरण हैं.
  • प्रोटीन प्राप्त करने के लिए आप दूध की बनी चीज़े, पनीर और दाले आदि खा सकती है.

अंत में

भारत के परिपेक्ष में बात करें तो यहां कानूनी रूप से 24 हफ्ते से पहले की प्रेगनेंसी को अबोरट किया जा सकता है. इसका कारण है देश की आबादी का पहले से ही काफी ज्यादा होना.

इसके अलावा 24 हफ्ते से अधिक की गर्भावस्था को बिना किसी मेडिकल इमेरजेंसी के खत्म नही किया जा सकता है. ऐसा करने के लिए कोर्ट से स्पेशल परमीशन लेनी पड़ती है.