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कान में इंफेक्शन – ear infection in hindi

कान में इंफेक्शन – ear infection in hindi

कान में इंफेक्शन क्या होता है – what is ear infection in hindi

हमारे शरीर में अलग – अलग इंद्रियां (सेंस) होती है जिसमें से एक कान है. इनमें से किसी भी इंद्री में समस्या होना हमारे लिए बहुत कष्टकारी हो सकता है. अगर बात करें सुनने वाली इंद्री की तो कान में इंफेक्शन होने के पीछे बैक्टीरिया या वायरल संक्रमण हो सकता है जो कान के मध्य भाग (मिडल ईयर) को प्रभावित करता है.

इसी मिडल ईयर में संक्रमण के कारण होने वाली सूजन, जलन और मवाद आदि के स्वरूप कान में इंफेक्शन की स्थिति बहुत दर्द भरी हो सकती है.

कान का इंफेक्शन स्थाई (क्रोनिक) या तीव्र (एक्युट) हो सकता है –

क्रोनिक ईयर इंफेक्शन – यह समय के साथ दोबारा हो सकते है और ज्यादा गंभीर होने पर मिडल ईयर और इंनर ईयर को हमेशा के लिए खराब कर सकते है.

एक्युट इंफेक्शन – इसमें तेज़ दर्द होता है लेकिन यह थोड़े समय के लिए होता है.

कान में इंफेक्शन के कारण – what causes ear infection in hindi

कान में इंफेक्शन तब होता है जब कान में मौजूद यूस्टेशियन ट्यूब्स ब्लॉक हो जाती है या उनमें सूजन आ जाती है. जिस कारण मिडल ईयर में मवाद बनने लगता है. यूस्टेशियन ट्यूब्स बहुत छोटी और हमारे दोनों कानों से सीधे गले के पीछे से जाती है.

यूस्टेशियन ट्यूब्स के ब्लॉक होने के कारण –

  • एलर्जी
  • जुखाम
  • साइनस इंफेक्शन
  • ज्यादा म्यूकस बनना
  • स्मोकिंग
  • संक्रमित या सूजी हुई एडेनॉइड
  • एयर प्रेशर में बदलाव

कान में इंफेक्शन होने का जोखिम – risk factors of ear infections in hindi

यह अधिकतर छोटे बच्चों में देखने को मिलता है क्योंकि उनकी यूस्टेशियन ट्यूब्स बहुत छोटी और संकीर्ण होती है. दूधमुहे बच्चों को भी कान का इंफेक्शन होने का रिस्क काफी अधिक होता है.

इसके अलावा कान का इंफेक्शन बढ़ाने वाले रिस्क –

  • मौसम में बदलाव
  • अल्टीट्यूड में बदलाव
  • स्मोकिंग करना
  • हाल ही में हुआ इंफेक्शन या रोग

कान में इंफेक्शन के लक्षण – what are the symptoms of ear infections in hindi

  • कान के अंदर परेशानी या हल्का दर्द महसूस होना
  • लगातार कान के अंदर प्रेशर महसूस होने की भावना होना
  • शिशु का बिना भूख के भी तेज़ रोना
  • कान की नली में पस का होना
  • सुनने की हानि होना

ऐसा देखने को मिला है कि बहुत से लोगों में यह लक्षण या तो बने रहते है या आते जाते रहते है. यह लक्षण एक या दोनों कानों में देखने को मिल सकते है. दोनों कानों में इंफेक्शन होने पर दर्द ज्यादा तेज़ हो सकता है.

ऐसे में पुराने ईयर इंफेक्शन के लक्षण तीव्र संक्रमण की तुलना में कम होते है. 6 महीने से अधिक आयु वाले शिशुओं को बुखार या कान दर्द होने पर डॉक्टर को दिखाना चाहिए.

कान में इंफेक्शन का पता कैसे लगाएं – how to diagnose ear infection in hindi

अपने डॉक्टर के पास जाएं, वह ओटोस्पोक का इस्तेमाल कर पता लगाएंगे कि कान में –

  • एयर बबल या मिडल ईयर में पस तो नही है
  • मिडल ईयर में नली में कोई पस तो नही पड़ गया
  • ईयरड्रम पर कोई छिद्र तो नही हो गया
  • उभरा हुआ या खराब हो चुका ईयरड्रम

अगर इंफेक्शन ज्यादा हो चुका है तो डॉक्टर आपके कान के अंदर से पस का सैंपल लेकर टेस्ट भी कर सकते है. जिससे पता लग सके कि कही कोई किसी प्रकार का कोई एंटी बायोटिक -रसिस्टेंट बैक्टीरिया तो मौजूद नही है.

साथ ही पता लगाने के लिए की कही इंफेक्शन मिडल ईयर से बाहर तो नही फैल गया, सिर का सीटी स्कैन किया जा सकता है.

इसके अलावा पुराने कान के इंफेक्शन का पता करने के लिए सुनने की क्षमता का टेस्ट भी किया जा सकता है.

कान के इंफेक्शन का इलाज – ear infection treatment in hindi

मिडल ईयर इंफेक्शन को कुछ तरीकों से साफ किया जा सकता है जिससे संक्रमण के लक्षणों में राहत मिलती है इसके लिए –

  • प्रभावित कान पर गर्म कपड़ा लगाएं.
  • इसके अलावा दर्द के लिए ओटीसी दवाएं भी ली जा सकती है – इबुप्रोफेन या टायलेनॉल.
  • कान में डालने के लिए ईयर ड्रॉप्स भी ली जा सकती है.

अगर लक्षण और अधिक खराब होते है या कोई आराम नही मिलता है तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. स्थिति के आधार पर वह आपको कान में इंफेक्शन के लिए एंटी बायोटिक्स प्रीस्काइब कर सकते है.

2 वर्ष से कम आयु के शिशुओं को कान में इंफेक्शन होने पर डॉक्टर उन्हें भी एंटी बायोटिक्स दे सकते है.

अगर ईयर इंफेक्शन आम उपचार से नही निकल पा रहा है या कुछ समय में कानों का इंफेक्शन ज्यादा हो रहा है तो ऐसे में सर्जरी भी की जा सकती है. कानों में मौजूद ट्यूब मवाद को कान से बाहर निकाल देती है लेकिन इनके सूजन की स्थिति में सर्जरी की जरूरत पड़ती है.

लंबे समय तक इंफेक्शन रहने पर –

वैसे तो कान का संक्रमण बिना किसी सफाई के निकल जाता है और आ भी जाता है. लेकिन बहुत ही जटिल मामलों में –

  • सुनने की हानि
  • बच्चों में बोलने की देरी
  • मेस्टॉइडाइटस
  • मेनिनजाइटिस
  • ईयरड्रम खराब होना

कान के संक्रमण से बचाव – ear infection preventions in hindi

निम्न तरीको से ईयर इंफेक्शन के खतरे को कम किया जा सकता है –

  • अपने हाथ धोते रहना
  • ज्यादा भीड़ – भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना
  • शिशुओं को स्तनपान कराने
  • अपनी इम्युनिटी को बेहतर रखने 

बताई गई बातों को ध्यान में रखकर बचाव कर सकते है, इन सभी के अलावा अपनी लाइफस्टाइल का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी होता है. अगर आप किसी कान के संक्रमण की समस्या से पीड़ित है तो आप स्वत: वायरल को ठीक कर सकते है और समस्या के जटिल हो जाने पर डॉक्टर से सलाह ले सकते है.