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सिबेसियस सिस्ट के बारे में – sebaceous cyst in hindi

सिबेसियस सिस्ट के बारे में – sebaceous cyst in hindi

इस लेख में आप जानेंगे सिबेसियस सिस्ट क्या होता है, इसके कारण, लक्षण, निदान और इलाज के बारे में –

सिबेसियस सिस्ट क्या होता है – what is sebaceous cyst in hindi

  • स्किन पर होने वाले गैर कैंसर गांठों को सिबेसियस सिस्ट कहा जाता है.
  • सिस्ट या कहे गांठे, शरीर में होने वाली असामान्यता होती है जिनमें गांठे लिक्विड या सेमिलिक्विड होती है.
  • अधिकतर सिबेसियस सिस्ट चेहरे, गर्दन या टोरसो पर होते है जो धीरे धीरे बढ़ते है.
  • इनसे जान को कोई नुकसान नही होता है लेकिन चेक न करने पर इनसे असहजता महसूस होती है.
  • डॉक्टरों द्वारा सिस्ट का निदान शारीरिक जांच और मेडिकल हिस्ट्री जानने के बाद ही होता है.
  • कुछ मामलों में कैंसर की पहचान करने के लिए इसे गहराई से जांचा जाता है.

सिबेसियस सिस्ट के कारण क्या है – what are the causes of sebaceous cyst in hindi

  • सिबेसियस सिस्ट के बनने का कारण सिबेसियस ग्लैंड होता है.
  • सिबेसियस ग्लैंड हमारी स्किन और बालों को कोट करने के लिए सेबम नाम का ऑयल बनाता है.
  • वहीं सिबेसियस ग्लैंड के ब्लॉक या डैमेज होने पर सिस्ट बनना शुरू हो जाता है.
  • यह जगह पर क्षति पहुँचने के कारण हो सकता है.
  • क्षति अनेक प्रकार जैसे खरोंच, सर्जरी के कारण घाव या स्किन कंडीशन हो सकती है जैसे एक्ने आदि.
  • सिबेसियस सिस्ट धीरे से विकसित होता है जिससे सिस्ट को नोटिस करने से हफ्तों या महीनों पहले क्षति हुई होती है.

सिबेसियस सिस्ट के अन्य कारण 

  • सर्जरी के कारण सेल्स को नुकसान होना
  • जेनेटिक कंडीशन जैसे गार्डनर सिंड्रोम आदि
  • किसी दुर्घटना के कारण शेप बदलना

सिबेसियस सिस्ट के लक्षण – sebaceous cyst symptoms in hindi

  • आमतौर पर सिस्ट में कोई दर्द नही होता है.
  • जबकि बड़े सिस्ट के कारण असहजता से लेकर दर्द हो सकता है.
  • चेहरे और गर्दन पर बड़े सिस्ट के कारण प्रेशर और दर्द हो सकता है.
  • इस तरह के सिस्ट कैराटिन के वाइट फ्लैक से भरे हुए होते है जो स्किन और नाखुन को बनाने वाला मुख्य तत्व होता है.
  • काफी सारे सिस्ट छूने में सॉफ्ट होते है.

शरीर के हिस्सों पर पाए जाने वाले सिस्ट –

  • कमर
  • गर्दन
  • चेहरा
  • स्कैल्प

गांठ के निम्न रूप होने पर वह कैंसर भी हो सकता है जिसमें –

  • लाल होना, दर्द या पस निकलना इंफेक्शन की ओर इंगित करता है.
  • 5 सेंटीमीटर से अधिक डायामीटर वाली गांठ
  • एक बार हटाने के बाद गांठ का फिर से जल्दी से बनना

सिबेसियस सिस्ट का निदान – how to diagnose sebaceous cyst in hindi

अधिकतर मामलों में डॉक्टर सिबेसियस सिस्ट का निदान शारीरिक जांच के बाद ही कर लेते है. सिस्ट के असामान्य होने पर डॉक्टर आपके कुछ टेस्ट करवा सकते हैं. जबकि सिस्ट हटवाने से पहले भी यह टेस्ट करवाने पड़ते है.

सिबेसियस सिस्ट का पता लगाने के लिए निम्न टेस्ट किए जाते है –

  • अल्ट्रासाउंड – जिससे सिस्ट के कंटेट का पता लग जाता है.
  • सीटी स्कैन – इससे डॉक्टर को सर्जरी करने के रूट के बारे में पता लगता है. जिससे असमानता का पता लगे.
  • पंच बायोप्सी – इसमें सिस्ट में से थोड़े से टिश्यू लिए जाते है और उनकी जांच होती है.

सिबेसियस सिस्ट का इलाज – what is the treatment of sebaceous cyst in hindi

  • डॉक्टर द्वारा इसे ड्रेन या सर्जरी करके हटाया जा सकता है.
  • आमतौर पर कॉस्मेटिक कारणों के चलते सिस्ट अपने आप हट जाते है
  • अधिकतर सिस्ट नुकसानदायक नही होते है लेकिन डॉक्टर से बात करके विकल्पों को जान सकते है.
  • हमेशा याद रखें कि सर्जरी की मदद से हटाए बिना सिस्ट फिर से वापस आ सकते है.

सिस्ट हटाने के लिए डॉक्टर निम्न विकल्प बता सकते हैं जैसे –

  • छोटा चीरा – छोटी से स्कैरिंग के साथ इसे हटा सकते है लेकिन सिस्ट फिर से आ सकता है.
  • चौड़ा चीरा – इससे सिस्ट हट जाता है लेकिन लंबे निशान पड़ सकता है.
  • लेज़र – इसमें पंच बायोप्सी चीरा लगाया जाता है जिसमें लेजर से छोटा छेद करके सिस्ट के कंटेट को बाहर कर दिया जाता है.

सिस्ट हटा देने के बाद डॉक्टर आपको एंटीबायोटिक ऑइंटमेंट आदि दे सकते है जिससे इंफेक्शन को रोका जा सके. इसे घाव भरने तक इस्तेमाल किया जाता है. सर्जरी के निशान को हटाने के लिए स्कार क्रीम का उपयोग हो सकता है.

अंत में

अधिकतर सिबेसियस सिस्ट गैर कैंसर कारक होते है लेकिन सिस्ट या कहे गांठ का इलाज न करने पर वह बड़ी हो सकती है जिससे परेशानी होने पर अंत में सर्जरी की जरूरत पड़े.

सर्जरी से हटाने के मामलों में गांठ के फिर से होने के मौके बहुत कम होते है. जबकि रेयर मामलों में गांठ के बाद खाली हुई जगह में इंफेक्शन हो सकता है. स्किन पर किसी प्रकार के इंफेक्शन जैसे लाल होने या दर्द होना, बुखार आदि महसूस करने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. अधिकतर इंफेक्शन एंटीबायोटिक्स की मदद से ठीक हो जाते है.