Select Page

ओवेरियन सिस्ट – प्रकार, लक्षण, जटिलताएं, पता कैसे लगाए, उपचार और बचाव – ovarian cyst in hindi

ओवेरियन सिस्ट – प्रकार, लक्षण, जटिलताएं, पता कैसे लगाए, उपचार और बचाव – ovarian cyst in hindi

आज के परिपेक्ष में बात करें तो पूरे विश्व में कैंसर का रोग बहुत तेज़ी से बढ़ा हैं. जिसमें भारत भी पीछे नही रहा है. कैंसर से ग्रसितों की संख्या में महिलाओं की गिनती भी कम नही हैं. महिलाओं में सबसे अधिक होने वाले कैंसर में पहले पायदान पर ब्रेस्ट कैंसर, दूसरे पर सर्वाइकल कैंसर और तीसरे नंबर पर ओवेरियन यानी यूटेरस कैंसर आता हैं.

रोगों और लक्षणों की पूरी जानकारी न होना, इस समस्या की गंभीरता को और बढा देता हैं. इसलिए आज हम आपको बताएंगे ओवरियन सिस्ट के घरेलू उपचार और इसके कुछ लक्षण, लेकिन उससे पहले ओवेरियन सिस्ट के बारे में कुछ जानकारी जो इस प्रकार हैं.

ओवेरियन सिस्ट क्या है? – what is ovarian cyst in hindi

  • महिलाओं के शरीर में प्रजनन सिस्टम होता है जो पेट के निचले हिस्से में यूटेरस के दोनों तरफ होता है. 
  • महिला शरीर में दो ओवरी होती है जिनसे महिला हार्मोन – एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के अलावा अंडे भी प्रोड्यूस होते है.
  • कभी कभी इन दोनों में से किसी एक ओवरी में फ्लूइड भरी हुई गांठ बनने को सिस्ट कहा जाता है.
  • काफी सारी महिलाएं अपनी पूरी लाइफ में कम से कम एक बार सिस्ट बनना देखती है.
  • अधिकतर मामलों में सिस्ट में दर्द नही होता और न ही कोई लक्षण होता है.

ओवेरियन सिस्ट के प्रकार – types of ovarian cyst in hindi 

इसके कई प्रकार होते है जैसे – डर्मोइड सिस्ट और एंडोमेट्रीओमा सिस्ट आदि. हालांकि, फंक्शनल सिस्ट इसके सबसे आम प्रकार है जिसमें –

फॉलिकल सिस्ट

  • पीरियड्स साईकल के दौरान महिलाओं की ओवरी में थैली के अंदर अंडे की ग्रोथ को फॉलिकल कहते है.
  • अधिकतर मामलों में यह थैली खुल जाती है और अंडा रिलीज होता है.
  • लेकिन थैली न खूलने पर फॉलिकल के अंदर फ्लूइड बन जाता है जिसे सिस्ट यानि गांठ कहा जाता है.

कॉर्पस लूटेम सिस्ट

  • अंडे के रिलीज होने के बाद फॉलिकल थैली अपने आप घूल जाती है.
  • जबकि इसके न घूलने पर थैली के अंदर फ्लूइड का विकास हो सकता है.
  • जिस कारण कॉर्पस लूटेम सिस्ट बनता है.

अन्य प्रकार के ओवेरियन सिस्ट

  • डर्मोइड सिस्ट – ओवरी के अंदर थैली का विकास होता है जिसमें हेयर, फैट और अन्य टिश्यू होते है.
  • सिस्टाडेनोमास – यह ग्रोथ ओवरी के बाहरी भाग में होती है लेकिन यह कैंसर नही होता है.
  • एंडोमेट्रीओमास – यह गर्भाशय के अंदर विकास होने वाले टिश्यू है जो गर्भाशय के बाहर तक विकसित हो सकते है. ओवरी से जुड़े होने के कारण इन्हें सिस्ट कहा जाता है.
  • पॉलीसिस्टीक ओवरी सिंड्रोम – कुछ महिलाओं को यह कंडीशन हो सकती है जिसमें ओवरी में काफी सारे छोटे सिस्ट हो जाते है. उपचार न किए जाने पर यह इनफर्टिलिटी की समस्या पैदा कर सकती है.

ओवेरियन सिस्ट के लक्षण – ovarian cyst symptoms in hindi

हालांकि इसके कोई खास लक्षण नही होते है लेकिन समस्या गंभीर होने पर सिस्ट के विकास के साथ निम्न लक्षण देखने को मिलते है –

ओवेरियन सिस्ट के गंभीर लक्षण जिनमें तुरंत चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है –

  • तेज़ या तीव्र श्रोणी दर्द (पेल्विक)
  • बुखार
  • बेहोशी
  • चक्कर आना
  • सांसे तेज़ होना

ऐसी किसी भी स्थिति का समय से उपचार न लेने पर गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते है.

ओवेरियन सिस्ट से जुड़ी जटिलताएं – ovarian cyst complications in hindi

  • आमतौर पर ओवेरियन सिस्ट बिना किसी उपचार के ही नैचुरली चले जाते है.
  • लेकिन लक्षण दिखने पर या गंभीर कंडीशन होने पर डॉक्टर सलाह जरूर लेनी चाहिए.
  • ओवेरियन टॉर्शन ऐसी ही गंभीर कंडीशन में से एक है जो बहुत ही कम देखने को मिलती है लेकिन होती बहुत गंभीर है.
  • जिसके दौरान अपनी असली जगह से खिसक जाती है जिससे ओवरी तक खून की सप्लाई बाधित हो जाती है.
  • उपचार न मिलने पर ओवेरियन टिश्यू खराब होना देख जाता है जबकि ज्यादा गंभीर मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ती है.

ओवेरियन सिस्ट का पता कैसे लगाएं – how to diagnose ovarian cyst in hindi

  • डॉक्टर द्वारा रूटीन पेल्विक परीक्षण करके ओवेरियन सिस्ट का पता लगाया जा सकता है.
  • जिसके दौरान ओवरी की सूजन देखने पर अल्ट्रासाउंड करके सिस्ट का पता लगाया जा सकता है.
  • इससे सिस्ट का साइज, जगह और वह गांठ है या फ्लूइड वाली गांठ है आदि पता किया जा सकता है.

ओवेरियन सिस्ट का पता लगाने के लिए –

  • सीटी स्कैन – इससे इंटरनल ऑरगन की इमेज लेकर पता लगाया जा सकता है.
  • एमआरआई – इसमें मैगनेटिक फिल्ड की मदद से अंग की गहरी तस्वीरे ली जाती है.
  • अल्ट्रासाउंड डिवाइस – इसमें हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड वैवस से अंगों की इमेज लेकर पता लगाया जा सकता है.  

वैसे तो अधिकतर सिस्ट हफ्ते या कुछ हफ्तों में गायब हो जाते है. उपचार के बाद डॉक्टर कुछ हफ्तों बाद फिर से टेस्ट करवा सकते है जिससे सिस्ट का पता लगाया जा सके. जबकि सिस्ट का साइज बढ़ने पर डॉक्टर अन्य टेस्ट जैसे –

  • प्रेगनेंसी टेस्ट
  • हार्मोन लेवल टेस्ट
  • ओवेरियन कैंसर का टेस्ट करवा सकते है

ओवेरियन सिस्ट का उपचार – ovarian cyst treatment in hindi

सिस्ट को छोटा करने या हटाने के लिए डॉक्टर आपको निम्न उपचार दे सकते है जैसे –

गर्भनिरोधक गोलियां

  • ओवेरियन सिस्ट होने पर डॉक्टर ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स प्रीस्क्राइब कर सकते है.
  • ऐसा करने से ओव्यूलेशन को रोककर नए सिस्ट बनने से रोका जाता है.
  • कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स के उपयोग से ओवेरियन कैंसर के रिस्क को भी कम किया जा सकता है.
  • मेनोपोज़ के बाद महिलाओं में ओवेरियन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.

लेप्रोस्कोपी

  • अगर आपका सिस्ट छोटा है और टेस्ट में कैंसर निकलता है तो इस प्रक्रिया से सिस्ट को हटा दिया जाता है.
  • इसकी सर्जरी के लिए योनिमुख से ऊपर एक छोटा सा कट लगाकर सिस्ट को निकाल दिया जाता है.

लैप्रोटॉमी

  • बड़ा सिस्ट होने पर, बड़ा कट किया जाता है जिसके जरिए सिस्ट को हटाते है.
  • जिसकेे बाद बायोप्सी कर पता लगाया जाता है कि सिस्ट कही कैंसर तो नही था.
  • कैंसर वाला सिस्ट होने पर हिस्टेरेक्टॉमी करके ओवरी और यूटेरस को हटा दिया जाता है.

ओवेरियन सिस्ट से बचाव – ovarian cyst prevention in hindi

इससे बचाव किया जा सकता है, इसके लिए रूटीन चेकअप की जरूरत पड़ती है. जिसके जरिए सिस्ट का पता लगाया जा सकता है. हालांकि ओवेरियन कैंसर के लक्षण ओवेरियन सिस्ट जैसे हो सकते है लेकिन जरूरी है कि लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह ली जाएं. इस समस्या के होने पर लक्षण जैसे –

  • मासिक धर्म चक्र में बदलाव
  • पेल्विक में दर्द
  • भूख न लगना
  • बिना वजह वजन कम हो जाना
  • पेट फूलना

जरूरी बांते –

ओवेरियन सिस्ट का समय पर इलाज न कराने से इनफर्टिलिटी की समस्या हो सकती है. साथ ही पीसीओएस जैसी समस्याओं के अलावा ऊपर कई तरह के कारण आदि बताए गए है. जिनका अनुभव करने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह ली जानी चाहिए.