Select Page

निमोनिया से खुद को बचाने के आसान सूझाव – Pneumonia se kaise baache

निमोनिया से खुद को बचाने के आसान सूझाव – Pneumonia se kaise baache
  1. निमोनिया का मतलब हैं फेफड़ो का संक्रमण, जिसके कारण फेफड़ो पर सूजन आ जाती हैं. यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता हैं और हवा में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस के सांस के माध्यम से यह फेफड़ों तक पहुंचने की वजह होता हैं. इसके अलावा देखा जाता है कि कई बार फंफूद की वजह से भी इंफेक्शन हो जाता हैं.
  2. अगर कोई व्यक्ति पहले से किसी फेफड़ों के रोग, हृदय रोग से ग्रसित है तो उन्हें गंभीर फेफड़ो का संक्रमण यानि गंभीर निमोनिया होने का खतरा रहता हैं. आमतौर पर निमोनया में होता यह है कि फेफड़े में तरल पदार्थ भर जाते है, जिसके चलते ऑक्सीजन लेने में कठिनाई होने लगती हैं.
  3. निमोनिया का इंफेक्शन होने पर यह दो से चार सप्ताह में ठीक हो जाता है, जबकि वायरस से होने वाले निमोनिया को ठीक होने में अधिक समय लग जाता हैं. यह कोई नजरअंदाज कर देने वाली बीमारी नहीं है. सर्दीयों में अक्सर निमोनिया होने का डर बना रहता है, खसतौर पर बच्चों को इसका डर ज्यादा बना रहता हैं. इनके अलावा कुछ रसायनों और फेफड़ों पर लगी चोट के कारण भी निमोनिया हो सकता हैं.
  4. फेफड़ो का संक्रमण होने पर मरीज को पानी ज्यादा पीना चाहिए और भोजन सादा ही खाना चाहिए. इसके रोगी को तेल, मसालेदार और बाहर के खाद्य पदार्थों का सेवन बिल्कुल भी नहीं करने की सलाह दी जाती हैं. निमोनिया होने पर सर्दी, तेज बुखार, कफ, कंपकंपी, शरीर में दर्द, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द आदि होते हैं. हालांकि छोटे या नवजात बच्चों में कोई विशेष लक्षण दिखाई नहीं देते। बच्चे देखने में बीमार लगें तो उन्हें निमोनिया हो सकता है। निमोनिया के अन्य लक्षण कुछ निम्न प्रकार से हैं –

निमोनिया के लक्षण

  • छोटे या नवजात बच्चों में कोई विशेष लक्षण दिखाई नहीं देता हैं.
  • बच्चे देखने में बीमार लगें तो उन्हें निमोनिया हो सकता हैं.
  • सर्दी, हाई फीवर, कफ, कंपकपी, शरीर में दर्द, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द आदि.
  • इसकी मुख्य वजह सर्दी को माना जाता है, लेकिन निमोनिया होने के कुछ अन्य कारण भी होते हैं.

निमोनिया होने के कुछ कारण

  • बैक्टीरिया
  • वायरस
  • फंगस
  • कुछ रसायनों और फेफड़े में लगी चोट

निमोनिया के इंफेक्शन से बचाव और रोकथाम

  • इससे पीड़ित व्यक्ति को एक स्वच्छ कमरे में रखना चाहिए. इस बात का ध्यान रखे कि रोगी के कमरे में सूरज की रोशनी आती हो. सबसे जरूरी है कि रोगी के कमरे और शरीर, खासकर छाती और पैरों को गर्म रखें, साथ ही रोगी को अच्छी तरह से ढकें. निमोनिया में सीने में दर्द और बेचैनी से राहत पाने के लिए, एक चम्मच लहसुन का रस लिया जा सकता हैं.
  • तुलसी भी निमोनिया में बहुत उपयोगी साबित होती हैं. तुलसी के कुछ ताजे पत्तों का रस लेकर उसमें काली मिर्च पीस कर मिला लें और यह रस हर छह घंटे के अंतराल पर रोगी को देंने से आराम मिलता हैं.
  • इसके अलावा निमोनिया का इलाज, चिकित्सक की सलाह से बिना अस्पताल में दाखिल हुए हो सकता हैं. आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं, ठीक से आराम, तरल पदार्थ और घर पर देखभाल पूर्ण स्वास्थ्य लाभ के लिए पर्याप्त हैं.