इस लेख में आप जानेंगे अरंडी के तेल के फ़ायदे और उपयोग के बारे में –

अरंडी का तेल – castor oil

  • कई सारे कामों के लिए उपयुक्त वेजिटेबल ऑयल अरंडी के तेल का उपयोग सदियों से होता आ रहा है.
  • इसे एक पौधे के बीज के अर्क से बनाया जाता है. इन सीड्स को अरंडी के बीज कहा जाता है जिसमें टॉक्सिक एंजाइम राइसिन होते है. (जानें – शरीर को डिटॉक्स कैसे करें)
  • हालांकि, तेल बनाने के लिए इसे हीटिंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है जो टॉक्सिक एंजाइम को बेअसर कर देता है.
  • अरंडी के तेल का उपयोग उघोगों, दवा निर्माताओं और औषधी रूप में किया जाता है.
  • अधिकांश रूप से इसे भोजन में अतिरिक्त स्वाद के लिए उपयोग किया जाता है.
  • जबकि दवा और स्किन केयर प्रोडक्ट के अलावा इसे बायोडिजल फ्यूल कंपोनेंट में लूब्रिकेंट के लिए इस्तेमाल में किया जाता है.
  • प्राचीन मिस्त्र में अरंडी के तेल को घरों में लैंम्प जलाने के लिए उपयोग किया जाता था.
  • जबकि आंखों की खुजली समेत गर्भवती महिलाओं में प्रसव को कराने के लिए दिया जाता था.
  • आज के समय में अरंडी का तेल सामान्य कंडीशन जैसे कब्ज और स्किन के लिए ब्यूटी प्रोडक्ट में किया जाता है.

अरंडी के तेल के लाभ और उपयोग – benefits and uses of castor oil

बालों और खोपड़ी को हेल्दी रखने

  • काफी सारे लोग अरंडी के तेल को नैचुरल हेयर कंडीशनर के रूप में उपयोग करते है.
  • सूखे या नुकसान हो चुके बालों को अरंडी के तेल को लगाकर मॉइस्चराइज करने में लाभ मिलता है.
  • अरंडी के तेल जैसे फैट को बालों पर नियमित रूप से लगाने से इनके टूटने के मौके कम हो जाते है.
  • डैंड्रफ का अनुभव के अलावा सूखी, पपड़ी पड़ने वाली कंडीशन होने पर अरंडी के तेल को लगाने से लाभ मिलता है.
  • सिर पर अरंडी का तेल लगाने से ड्राईनेस से बचाव के साथ पपड़ी पड़ना आदि स्किन समस्याओं से बचाव किया जा सकता है.

एंटी इंफ्लामेटरी प्रभाव

  • अरंडी के तेल में मौजूद मुख्य फैटी एसिड में अच्छे एंटी इंफ्लामेटरी गुण होते है.
  • अध्ययनों में देखने को मिला है कि अरंडी के तेल को लगाने से इंफ्लामेशन और दर्द से राहत मिलती है.
  • दर्द कम करने वाली और एंटी इंफ्लामेटरी गुण होते है जो सोरायसिस या रूमेटाइड अर्थेराइटिस जैसे रोगों में राहत मिलती है.

नैचुरल मॉइस्चराइजर

  • अरंडी का तेल मोनोअनसैचुरेटिड फैट से भरपूर होता है.
  • इस तरह के फैट को स्किन पर मॉइस्चराइज करने के लिए लगाया जा सकता है.
  • यह स्किन की बाहरी लेयर से पानी के लॉस से बचाव करता है जिससे स्किन मॉइस्चराइज रहती है.
  • अरंडी के तेल का अधिकतर उपयोग कॉस्मेटिक में हाइड्रेशन को बढ़ाने और लोशन, मेकअप, क्लीनजर आदि में किया जाता है.
  • इसे दूसरे ऑयल जैसे बादाम तेल, ऑलिव ऑयल, नारियल तेल के साथ मिलाकर भी उपयोग किया जा सकता है.
  • अरंडी के तेल को स्किन पर लगाना सुरक्षित रहता है लेकिन कुछ लोगों को यह एलर्जिक रिएक्शन कर सकता है.

एक्ने

  • यह स्किन कंडीशन होती है जिसमें ब्लैकहेड, पस भरे मुंहासे जो बड़े और चेहरे, शरीर के दूसरे हिस्से में उभार के साथ हो सकते है. (जानें – नाक से ब्लैकहेड कैसे हटाएं)
  • यह किशोरों और युवा व्यस्कों में आम है इसका असर नकारात्मक रूप से आत्मविश्वास पर पड़ता है.
  • अरंडी के तेल में कई गुण होते है जो एक्ने के लक्षण को कम करने में मदद करते है.
  • एक्ने के विकसित होने में इंफ्लामेशन को एक फ़ैक्टर माना जाता है इसलिए स्किन पर अरंडी के तेल को लगाने से लाभ मिलता है.
  • मुंहासे को स्किन पर कुछ प्रकार के बैक्टीरिया असंतुलन से जोड़कर देखा जाता है.
  • अरंडी के तेल में एंटीमाइक्रोबायल गुण होते है जो स्किन पर बैक्टीरियल ओवरग्रोथ को रोकते है.

घावों को भरने में मदद

  • घावों पर अरंडी के तेल को लगाने से घाव के आसपास नमी वाला वातावरण बनता है जिससे घाव को ठीक होने और सूखकर छाला आदि होने से बचाव होता है.
  • अरंडी का तेल टिश्यू की ग्रोथ को उत्तेजित करके घाव और वातावरण के बीच में बैरियर के रूप में काम करता है जिससे इंफेक्शन का रिस्क कम हो जाता है.
  • साथ ही इससे डैड स्किन सेल्स का बनना लेट होता है जिससे घाव बेहतर होता है.

फंगल को दूर करने

  • यह फंगल के कारण डेंटल मुद्दे जैसे प्लेग ज्यादा बनना, मसूड़ों का इंफेक्शन और रूट कैनाल इंफेक्शन हो सकता है.
  • अरंडी के तेल में एंटीफंगल गुण होते है जो कैंडिडा जैसे फंगल से लड़कर मुंह को हेल्दी रखने में मदद मिलती है.
  • मुंह में फंगल संबंधी समस्याओं में अरंडी का तेल काफी मदद करता है. विशेषकर से वृद्ध लोगो में जो दांतों को क्राउन पहनते है.

ताकतवर लैक्सेटिव

  • इसके सबसे बेहतर उपयोगों में से एक इसके पाचन लाभ है.
  • इसे आंतों की गतिविधि को बेहतर करके बाउल को क्लीयर करने में मदद करने के लिए जाना जाता है.
  • यह तेज़ी से काम करके अस्थाई रूप से कब्ज से राहत देने में मदद करता है.
  • मौखिक रूप से सेवन करने पर यह छोटी आंतों में जाकर अरंडी के तेल में मौजूद फैटी एसिड को रिलीज करता है.
  • जिससे लैक्सेटिव प्रभाव मजबूत होते है.
  • कई अध्ययनों में देखने को मिला है कि अरंडी के तेल से कब्ज से राहत देने में मदद मिलती है.
  • अरंडी के तेल को सुरक्षित माना जाता है लेकिन छोटी मात्रा में, जबकि ज्यादा मात्रा में लेने से पेट में ऐंठन, मतली, उल्टी और दस्त हो सकते है.
  • इसे कभी कभी कब्ज से राहत के लिए उपयोग किया जा सकता है लेकिन इसका उपयोग ट्रीटमेंट के रूप में लंबे समय तक नहीं किया जाना चाहिए.

अरंडी के तेल की सावधानियां

कई लोग अनेक प्रकार की समस्याओं में अरंडी के तेल का उपयोग सेवन कर या स्किन पर लगाकर करते हैं.

सामान्यतः अरंडी के तेल को सुरक्षित माना जाता है लेकिन कुछ लोगों पर इसके प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं जैसे –

  • प्रसव को उत्तेजित करने – इसे मेडिकल प्रोफेशनलों द्वारा प्रसव को उत्तेजित करने के लिए उपयोग में लिया जाता है. इसी कारण गर्भावस्था के किसी भी चरण में आपको अरंडी के तेल से बचना चाहिए.
  • दस्त हो सकते है – कब्ज की समस्या में राहत के लिए इसे प्रभावी माना जाता है. लेकिन अधिक सेवन से आपको दस्त भी लग सकते है. दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है.
  • एलर्जिक रिएक्शन – स्किन पर लगाने पर कुछ लोगों को स्किन रिएक्शन हो सकता है. सबसे पहले स्किन के छोटे हिस्से पर इसे लगाए जिससे यह पता लगाया जा सके कि आपका शरीर इसके प्रति कैसे रिएक्ट करता है.

अंत में

लोगों द्वारा अरंडी के तेल का उपयोग कई हजार वर्षों से अनेक समस्याओं के लिए एक ताकतवर ट्रीटमेंट के रूप में किया जाता रहा है. (जानें – ऑयल पुल्लिंग के लाभों के बारे में)

इसे स्किन को मॉइस्चराइज करने, कब्ज से राहत देने समेत कई अन्य मुद्दों के लिए उपयोग में लिया जाता रहा है.

अगर आप एक उपयुक्त, काफी सारे उपयोग में लिए जाने वाली मेडिकल रूप से प्रभावी चीज़ खोज रहे है तो अरंडी का तेल एक अच्छी चॉइस हो सकता है.

References –

 

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