इस लेख में आप जानेंगे पित्त की पथरी से बचने के उपाय, लाभ, प्रभावशिलता और साइड इफेक्ट –

पित्त की थैली को साफ करना क्या होता है? – what is gallbladder cleanse

  • पित्त की थैली को साफ करने के लिए एक विशेष प्रकार की डाइट का उपयोग करके व्यक्ति को पित्त की पथरी होने या इससे बचाव किया जा सकता है. (जानें – पित्त की थैली हटाने के साइड इफेक्ट)
  • कुछ लोग पित्त की थैली को साफ करने की प्रक्रिया को लिवर फ्लश भी बोलते है.
  • पित्त की थैली में बनने वाले पत्थरो को पथरी कहा जाता है.
  • पित्त की पथरी को गॉलब्लैडर स्टोन भी कहा जाता है.
  • किसी एक भी पत्थर के होने से दर्द, मतली और उल्टी जैसे लक्षणों का अनुभव होता है.
  • हमारे शरीर में पित्त की थैली लिवर द्वारा बनने वाले कठोर कणों को स्टोर करने के लिए जिम्मेदार होती है.
  • यह फ्लूइड भोजन में से फैट को अच्छे से पचाने में मदद करता है.
  • हालांकि, पित्त की थैली पाचन में मदद करती है लेकिन आपको जिंदा रहने के लिए जरूरी नहीं कि इसकी आवश्यकता हो.
  • पित्त की पथरी के मामलों में डॉक्टर द्वारा बताए गए लक्षण होने पर अधिकांश मामलों में सर्जरी की जाती है जिसके दौरान गॉलब्लैडर को हटा दिया जाता है.
  • लेकिन कुछ लोग सर्जरी से बचाव करने के लिए गॉलब्लैडर क्लीनज़ को आज़मा सकते है.
  • हालांकि, पित्त की थैली को साफ करने के लिए कोई विशेष प्रक्रिया नहीं है जिसे सभी के द्वारा फॉलो किया जाए.
  • इसके बारे में थोड़ी बहुत रिसर्च मौजूद है जो मेडिकल ट्रीटमेंट के विकल्प के रूप में है.

पित्त की थैली साफ करने के फ़ायदे

  • पित्त की पथरी को कम करने के लिए कुछ नैचुरल और वैकल्पिक दवाएं अनुशंसित की जा सकती है.
  • इन चिकित्सा प्रक्रियाओं का मानना है कि इससे पित्त की थैली को साफ करने के साथ ही पित्त की पथरी को निकालने में मदद मिलती है.
  • जिसके बाद स्टोन मल के रास्ते बाहर निकल जाते है.
  • ऐसा होने पर पित्त की थैली में स्टोन कम हो जाते है जिससे अप्रत्याशित लक्षण कम हो जाते है.
  • साथ ही ऐसा होने पर सर्जरी से बचाव हो सकता है.
  • गॉलब्लैडर साफ करने के कई अलग प्रकार उपलब्ध है.

ऐसी कई सारी रेसिपी और उपाय है जो मदद कर सकते है

नींबू जूस और ऑलिव ऑयल

  • इस प्रक्रिया के दौरान आपको 12 घंटों तक कुछ नहीं खाना होता है.
  • उदाहरण के लिए सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक भूखे रहना.
  • शाम 7 बजे के बाद 4 चम्मच ऑलिव ऑयल और 1 चम्मच नींबू जूस को हर 15 मिनट के अंतराल पर पीएं. 

सेब जूस और सब्जी जूस

  • इस प्रक्रिया में सेब का जूस और सब्जी के जूस को शाम 5 बजे तक पीना है.
  • जबकि 5 बजे के बाद 18 एमएल ऑलिव ऑयल और 9 एमएल नींबू जूस को हर 15 मिनट में पीनी है.
  • हर 15 मिनट में तब तक पीते रहें जबतक कि आप 1 कप ऑलिव ऑयल का सेवन न कर लें.

अन्य

  • बाउल मूवमेंट को बढ़ाने के लिए बहुत सारे लोग एनिमा के साथ ऑलिव ऑयल और नींबू जूस को पीते है.
  • एनिमा में मौजूद तत्वों के साथ अधिक पानी पीने से बाउल मूवमेंट जल्दी होता है.
  • इन प्रक्रियाओं को पित्त की थैली साफ करने वाली प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है.
  • इनके दौरान मल त्याग को प्रोमोट किया जाता है जिससे दस्त भी हो सकते है.
  • इस तरह के डाइट बदलाव एक या दो रात से अधिक नहीं किए जाने चाहिए.

प्रभावशिलता

  • इसके लेकर काफी कम रिसर्च मौजूद है.
  • लेकिन विशेषज्ञों की माने तो व्यक्ति को अपने मल में गॉलस्टोन दिखने चाहिए.
  • इस पित्त की थैली को साफ करने की प्रक्रिया के बाद लोगों को एक्स-रे या एमआरआई करवाकर पता लगाना चाहिए कि कितनी पथरी बची है.

पित्त की थैली साफ करने के साइड इफेक्ट

  • इसके साइड इफेक्ट आपके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली रेसिपी पर निर्भर करते है.
  • उदाहरण के लिए काफी सारे लोग इस प्रक्रिया में ऑलिव ऑयल का उपयोग करते है.
  • जबकि इसकी ज्यादा मात्रा लेने पर लैक्सेटिव प्रभाव हो सकते है.
  • कुछ लोगों द्वारा इस प्रक्रिया के बाद दस्त, मतली या उल्टी जैसे लक्षणों का अनुभव हो सकता है.
  • इसके अलावा अन्य साइड इफेक्ट में हर्ब्स के उपयोग के अनुसार हो सकते है.
  • इस प्रक्रिया के बाद यह भी संभव है कि पित्त की थैली से पथरी बाहर ही न निकले.
  • ऐसे में आपको सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है. (जानें – पित्त की थैली हटाने के बाद डाइट)
  • जिसके न होने पर लक्षण खराब होने के साथ ही पित्त की थैली संक्रमित भी हो सकती है.

अंत में

इन प्रक्रियाओं को लेकर कोई बड़े अध्ययन नहीं हुए है. लेकिन पथरी से बचाव के लिए आपको हाई फ़ाइबर फ़ूड्स, हेल्दी फैट सोर्स जैसे ऑलिव ऑयल, हाई फैट फ़ूड जैसे तले हुए कुकीज आदि को खाने से बचना चाहिए.

जबकि बहुत कम कैलोरी वाली डाइट का सेवन पित्त की पथरी का रिस्क बढ़ा सकते है. ऐसे में हेल्दी और संतुलित डाइट का सेवन करना चाहिए.

किसी भी प्रक्रिया को आज़माने से पहले डॉक्टर से बात कर सलाह ली जानी चाहिए. इसके अलावा बड़े पत्थर होने पर जो कोलेस्ट्रोल से नहीं बने होते है उनपर दवाएं काम नहीं करती है. ऐसे मामलों में डॉक्टर सर्जरी की सलाह दे सकते है.

References –

 

Share: