दुनियाभर में सबसे ज्यादा खाएं जाने वाले अनाजों में से एक चावल है. अगर एशिया की बात करें तो यहां पर चावल लोगों का मुख्य भोजन है.

चावल कई तरह के रंग, आकार, साइज में उपलब्ध है लेकिन सबसे अधिक पॉपुलर ब्राउन चावल और सफेद चावल है. वाइट राइस यानि सफेद चावलों का भोजन में विस्तृत रूप से उपयोग किया जाता रहा है लेकिन ब्राउन राइज को बड़े पैमाने पर हेल्दी ऑप्शन माना जाता रहा है.

जबकि काफी सारे लोग जो अपने स्वास्थ को लेकर जागरूक है, वह ब्राउन राइज का उपयोग करते है. आज इस लेख में हम आपको बताने वाले है ब्राउन राइस और वाइट राइस में अंतर –

ब्राउन राइस और वाइट राइज में क्या अंतर है – brown rice and white rice difference in hindi

  • सभी प्रकार के चावलों में कार्ब्स अधिक होने के साथ साथ कम मात्रा में प्रोटीन और फैट की मात्रा नही के बराबर होती है.
  • ब्राउन राइस एक पूर्ण अनाज होता है जिसमें पूर्ण अनाज के सारे गुण मौजूद होते है.
  • ब्राउन राइस में फाइब्रस ब्रान, पोषक जर्म और कार्ब रिच एंडोस्पर्म होते है.
  • वाइट राइस में ब्रान और जर्म नही होते है जिसके चलते इनमें अनाज के पोषक तत्व नही होते है. 
  • वाइट राइस पूर्ण अनाज नही होता है. इसलिए ब्राउन राइज को अधिक हेल्दी माना जाता है.

ब्राउन राइस बनाम वाइट राइस – brown rice vs white rice in hindi

ब्राउन राइस में फाइबर, विटामिन और मिनरल की मात्रा हाई होती है

  • जब पोषक तत्वों की बात आती है तो ब्राउन राइस में इनकी मात्रा ज्यादा होती है.
  • ब्राउन राइस में अधिक फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट के साथ ही जरूरी विटामिन और मिनरल की मात्रा होती है.
  • वाइट राइस में खाली कैलोरी और कुछ जरूरी तत्वों के साथ कार्ब्स होते है.
  • 100 ग्राम पके हुए ब्राउन राइस में 1.8 ग्राम फाइबर होती है.
  • जबकि 100 ग्राम पके हुए वाइट राइस में 0.4 ग्राम फाइबर होता है.

ब्राउन राइस में आर्सेनिक की मात्रा ज्यादा होती है

  • प्लांट कंपाउंड में कुछ गैर पोषक तत्व होते है जो हमारे शरीर की पोषक तत्वों को अवशोषित करने की क्षमता को प्रभावित करते है.
  • ब्राउन राइस में इसी प्रकार के गैर पोषक तत्व – फायटिक एसिड या फाइटेट मौजूद होते है.
  • साथ ही इनमें टॉक्सिक केमिकल आर्सेनिक की मात्रा अधिक होती है.

फायटिक एसिड

  • इसके कुछ हेल्थ बेनेफिट्स होते है.
  • साथ ही यह डाइट से आयरन और जिंक को अवशोषित करने की हमारे शरीर की योग्यता को प्रभावित करती है.
  • लंबे समय तक भोजन में फायटिक एसिड खाने से मिनरल की कमी हो सकती है.

आर्सेनिक

  • ब्राउन राइस में इस टॉक्सिक केमिकल की मात्रा अधिक होती है.
  • हमारे वातावरण में मौजूद इस भारी मेेटल का कारण बढ़ता हुआ प्रदूषण है.
  • आर्सेनिक एक टॉक्सिक है जिसका लंबे समय तक इस्तेमाल करने से क्रोनिक रोग जैसे कैंसर, हार्ट रोग और टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है.
  • वाइट राइस की तुलना में ब्राउन राइस में इसकी मात्रा अधिक होती है.
  • रोजाना न खाकर हफ्ते में कुछ दिन खाने से इसके नुकसान से बचा जा सकता है.

ब्लड शुगर और डायबिटीज़ रिस्क

  • बाउन राइस में हाई मैग्नीशियम, फाइबर होता है जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करता है.
  • रिसर्च के अनुसार, नियमित रूप से ब्राउन राइस जैसे पूर्ण अनाज खाने से ब्लड शुगर लेवल कम करने और टाइप 2 डायबिटीज़ के रिस्क को कम किया जा सकता है.
  • जबकि सफेद चावलों के अधिक सेवन से मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है.
  • वाइट राइस में ग्लाइसैमिक इंडेक्स हाई होता है जिससे ब्लड शुगर लेवल तेज़ी से बढ़ जाता है.
  • ब्राउन राइस का ग्लाइसैमिक इंडेक्स 50 और वाइट राइस का ग्लाइसैमिक इंडेक्स 89 होता है.
  • वाइट राइस का ग्लाइसैमिक इंडेक्स अधिक होने से ब्लड शुगर लेवल तेज़ी से बढ़ता है.
  • हाई ग्लाइसैमिक फ़ूड्स खाने से कई हेल्थ कंडीशन समेत टाइप 2 डायबिटीज़ का रिस्क बढ़ जाता है. 

वाइट राइस और ब्राउन राइस के अन्य हेल्थ इफेक्ट – other health effects of white and brown rice in hindi

वाइट और ब्राउन राइस हमारी हेल्थ पर कई रूप से असर करते है जैसे हार्ट रोग का रिस्क, एंटीऑक्सीडेंट लेवल और वजन कंट्रोल करना.

हार्ट रोग का रिस्क

  • ब्राउन राइस में लिगनान नाम का प्लांट कंपाउंड होते है जो हार्ट रोग से हमें बचाते है.
  • लिगनान से ब्लड में मौजूद फैट की अमाउंट कम होती है, ब्लड प्रेशर कम होता है और आर्टरिज़ की इंफ्लामेशन कम होती है.
  • अध्ययनों के अनुसार ब्राउन राइस खाने से कई तरह के हार्ट रोग के रिस्क फैक्टर कम होते है.
  • ब्राउन राइस जैसे पूर्ण अनाज से एलडीएल कोलेस्ट्रोल का लेवल कम होता है और अच्छा एचडीएल कोलेस्ट्रोल का लेवल बढ़ता है.

एंटीऑक्सीडेंट

  • ब्राउन राइस के ब्रान में बहुत ही पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट होते है.
  • अध्ययनों के मुताबिक एंटीऑक्सीडेंट लेवल के कारण, ब्राउन राइस जैसे पूर्ण अनाज की मदद से हार्ट रोग, कैंसर और टाइप 2 डायबिटीज़ से बचा जा सकता है.
  • अध्ययनों में यह भी देखा गया है कि ब्राउन राइस से मोटापा से पीड़ित महिलाओं के ब्लड में एंटीऑक्सीडेंट का लेवल बढ़ जाता है.

वजन कंट्रोल करने

  • वाइट के स्थान पर ब्राउन राइस खाने से वजन कम करने, बीएमआई के साथ कमर और हिप्स के आकार को कम करने में मदद मिलती है.
  • एक अध्ययन के अनुसार, वाइट राइस की तुलना में ब्राउन राइस खाने वाले लोगों में शरीर को वजन कम करने और कमर का साइज कम करने में मदद मिलती है.

अंत में

पोषक तत्वों की गुणवत्ता समेत हेल्थ बेनेफिट्स के लिए ब्राउन राइस का सेवन करना चाहिए. हालांकि हर प्रकार के चावल को खाया जा सकता है लेकिन वाइट राइस खाने में कुछ नुकसान नही है.

References –

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