इस लेख में आप जानेंगे स्तन (ब्रेस्ट) कैंसर क्या होता है, लक्षण, प्रकार, स्टेज, निदान, इलाज, रिस्क फ़ैक्टर और बचाव –

Table of Contents

स्तन कैंसर क्या होता है? – what is breast cancer?

  • जब सेल्स की ग्रोथ को रेगुलेट करने वाले जिन्स में परिवर्तन होने लगता है तो उसे कैंसर के रूप में जाना जाता है. (जानें – नैचुरल तरीके से ब्रेस्ट का साइज कम कैसे करें)
  • इस तरह का परिवर्तन अनियंत्रित तरीके से सेल्स को विभाजित होकर कई गुना बढ़ने देता है.
  • जबकि स्तनों के सेल्स में विकसित होने वाले सेल्स को ब्रेस्ट कैंसर के रूप में जाना जाता है.
  • इस तरह का कैंसर स्तनों की नलिकाओं या खण्डों से मिलकर (लोबूल्स) बन सकता है.
  • लोबूल्स स्तनों में मौजूद ग्लैंड होते है जो दूध बनाते है और नलिकाओं के जरिए इस दूध को ग्लैंड से निप्पल तक पहुंचाते है.
  • कैंसर फैटी टिश्यू या स्तन में मौजूद फाइब्रोस कनेक्टिव टिश्यू में हो सकता है.
  • अनियंत्रित कैंसर सेल्स हेल्दी स्तनों के टिश्यू तक पहुंच जाते है और बगल के लिम्फ नॉड्स तक ट्रेवल कर सकते है.
  • कैंसर सेल्स का शरीर के अन्य भागों तक पहुंचने का मुख्य रास्ता लिम्फ नॉड्स होते है.

स्तन कैंसर के लक्षण क्या होते है? – what are the symptoms of breast cancer?

  • ब्रेस्ट कैंसर के शुरूआती स्टेज में कोई लक्षण नहीं दिखते है.
  • अधिकतर मामलों में ट्यूमर छोटा महसूस हो सकता है. (जानें – सिबयेसिस सिस्ट के बारे में)
  • लेकिन मेमोग्राम में असामान्यता देखी जा सकती है.
  • ट्यूमर को महसूस करने के मामलों में पहला संकेत नए उभार को देखना होता है जो पहले नहीं दिखता है. हालांकि, सभी उभार कैंसर नहीं होते है.
  • हर प्रकार के ब्रेस्ट कैंसर के कई लक्षण हो सकते है. काफी सारे लक्षण एक जैसे होने के अलावा कुछ अलग हो सकते है.
  • नीचे दिए गए लक्षणों में से किसी का होना जरूरी नहीं कि आपको स्तन कैंसर है.
  • स्तन में दर्द या उभार बेनिग्न सिस्ट के कारण हो सकता है.
  • कोई सवाल आदि होने पर डॉक्टर से मिलकर जानकारी लेनी चाहिए.

स्तन कैंसर के सामान्य लक्षणों में –

  • स्तन पर उभार
  • हाल ही में विकसित हुआ टिश्यू जो आसपास के टिश्यू की तुलना में पतला महसूस होता है.
  • स्तन में दर्द
  • पूरे स्तन की स्किन का लाल रहना
  • पूरी ब्रेस्ट या कुछ भाग पर सूजन रहना
  • ब्रेस्ट से दूध के अलावा निप्पल डिस्चार्ज
  • निप्पल से खून डिस्चार्ज
  • अचानक से बिना किसी वजह स्तन का आकार बदल जाना
  • इवर्टेड निप्पल (जानें – ब्रेस्ट से ऑर्गेज़म के टिप्स)
  • बगल में सूजन या उभार महसूस होना
  • स्तन की स्किन के दिखने में बदलाव
  • स्तन या निप्पल की स्किन पर पपड़ी पड़ना, निशान आदि होना.

स्तन कैंसर के प्रकार – what are the types of breast cancer?

  • स्तन कैंसर के कई प्रकार होते है जिसमें से मुख्य दो होते है – इंवेसिव और नॉनइंवेसिव.
  • इंवेसिव कैंसर स्तन के दूसरे हिस्सों तक फैल जाता है जबकि नॉनइंवेसिव कैंसर अपने असली टिश्यू से बाहर नहीं फैलता है.

दो मुख्य रूप अधिकतर स्तन कैंसर प्रकारों के बारे में बता देते है –

  • डक्टल कार्सिनोमा
  • लोबुलर कार्सिनोमा
  • इंवेसिव डक्टल कार्सिनोमा
  • इंवेसिव लोबुलर कार्सिनोमा

स्तन कैंसर के सबसे कम आम प्रकार –

  • निप्पल का पेजट रोग
  • फिल्लोड्स ट्यूमर
  • एंजियोसारकोमा

मेटास्टेटिक ब्रेस्ट कैंसर

  • यह स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर का अन्य नाम होता है.
  • इसके दौरान कैंसर स्तन से शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल जाता है जैसे फेफड़ो, लिवर, हड्डी आदि.

इंफ्लामेटरी ब्रेस्ट कैंसर

  • यह काफी रेयर लेकिन कैंसर के आक्रामक प्रकारों में से एक है. (जानें – लटके हुए स्तनों के बारे में)
  • इस कंडीशन के दौरान स्तन के नज़दिक लिम्फ नॉड्स को सेल्स ब्लॉक कर देते है.
  • जिस कारण स्तन में मौजूद लिम्फ वैस्लस ठीक से खाली नहीं हो पाती है.
  • ट्यूमर न बनकर इस कंडीशन के कारण लाल, सूजन, गर्म महसूस करना हो सकता है.
  • यह प्रकार अक्रामक होने के साथ ही बहुत तेज़ी से बढ़ता है. इसलिए लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से बात कर सलाह लेनी चाहिए.

मेल ब्रेस्ट कैंसर

  • महिलाओं की ही तरह पुरूषों में भी ब्रेस्ट टिश्यू होते है.
  • इसलिए पुरूषों को भी स्तन कैंसर हो सकता है लेकिन यह बहुत ही रेयर है.

ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर

  • यह भी काफी रेयर प्रकार का स्तन कैंसर है.
  • इसके होने पर ट्यूमर की तीन विशेषताएं होती है – एस्ट्रोजन रिसेप्टर, प्रोजेस्ट्रोन रिसेप्टर की कमी और अतिरिक्त HER2 प्रोटीन का सतह पर न होना होता है.
  • ट्यूमर में इन तीन मानदंड के होने पर इसे ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर कहा जाता है.
  • इस प्रकार के स्तन कैंसर में अन्य प्रकारों की तुलना में तेज़ी से बढ़ने के आसार होते है.

स्तन कैंसर की स्टेज – what are the stages of breast cancer?

ट्यूमर के साइज और फैलने के आधार पर इसकी स्टेज को अलग किया जा सकता है. इसके अलावा हाई स्टेज में कैंसर के अन्य हिस्सों तक फैलने के मौके अधिक होते है. इसकी स्टेज को बताने के लिए डॉक्टर द्वारा पता किया जाता है कि – (जानें – स्तनपान कराने के दौरान वजन कम कैसे करें)

  • कैंसर इंवेसिव है या नॉनइंवेसिव
  • ट्यूमर का आकार कितना है
  • क्या लिम्फ नॉड्स शामिल है
  • कैंसर के आसपास स्थित दूसरे टिश्यू या अंगो तक फैलने

इसके अलावा स्तन कैंसर की पांच स्टेज होती है –

स्टेज 0

  • डक्टल कार्सिनोमा को स्टेज 0 कहा जाता है जिसके दौरान कैंसर सेल्स आसपास के टिश्यू में नहीं फैलते है.

स्टेज 1

  • स्टेज 1ए – यह ट्यूमर 2 सेंटिमीटर चौड़ा या छोटा होने के अलावा इसमें लिम्फ नॉड्स प्रभावित नहीं होते है.
  • स्टेज 1बी – कैंसर लिम्फ नॉड्स के पास पाया जाता है, ब्रेस्ट में कोई ट्यूमर नहीं होता या 2 सेंटिमीटर से भी छोटा होता है.

स्टेज 2

  • स्टेज 2ए – ट्यूमर 2 सेंटिमीटर से भी छोटा और लिम्फ नॉड्स के पास 1 से 3 सेंटिमीटर या 2 से 5 सेंटिमीटर होकर किसी लिम्फ नॉड्स तक नहीं फैला हो सकता है.
  • स्टेज 2बी – ट्यूमर 2 से 5 सेंटिमीटर होकर बगल के पास 1 से 3 सेंटिमीटर तक फैला हो सकता है या 5 सेंटिमीटर से बढ़ाकर किसी लिम्फ नॉड्स तक फैला नहीं हो सकता है.

स्टेज 3

  • स्टेज 3ए – ट्यूमर का साइज कुछ भी हो सकता है जो इंटरनल मैमरी लिम्फ नॉड्स तक फैला हो सकता है.
  • स्टेज 3बी – यह ट्यूमर स्किन या चेस्ट वॉल तक पहुंच सकता है.
  • स्टेज 3 सी – इसमें कैंसर 10 या उससे अधिक लिम्फ नॉड्स, कॉलरबोन या इंटरनल मेमरी नॉड्स तक पहुंच सकता है.

स्टेज 4

  • इस स्टेज में किसी भी आकार का ट्यूमर होने के साथ कैंसर सेल्स दूर के अंगो तक फैल सकता है.
  • इसमें डॉक्टर टेस्ट करने के बाद ही स्तन कैंसर की स्टेज बता पाते हैं.

स्तन कैंसर का निदान कैसे होता है? – how to diagnose breast cancer?

  • ब्रेस्ट कैंसर के कारणों के लक्षण या स्तन में गांठ आदि के होने पर शारीरिक जांच जरूरी है.
  • इसके लिए एक या उससे अधिक टेस्ट कर लक्षण का निदान किया जा सकता है.
  • टेस्टों में मैमोग्राम, अल्ट्रासाउंड आदि करके निदान किया जा सकता है.
  • इसके अलावा ब्रेस्ट की बायोप्सी कर कैंसर का पता लगाया जा सकता है.
  • बाोयप्सी के दौरान डॉक्टर द्वारा स्तन से टिश्यू का सैंपल लिया जा सकता है. (जानें – घर पर पीरियड्स को लेट कैसे करें)
  • जिसके बाद सैंपल की जांच लैब में करके पता लगाया जाता है.

स्तन कैंसर का इलाज – what are the treatment of breast cancer?

  • सर्जरी
  • रेडिएशन थेरेपी
  • कीमोथेरेपी
  • हार्मोन थेरेपी
  • दवाएं

स्तन कैंसर के रिस्क फ़ैक्टर क्या होते है? – what are the risk factors of breast cancer?

  • आयु
  • शराब पीना
  • स्तन टिश्यू की घनत्वता
  • जिन्स
  • पीरियड्स जल्दी शुरू होना
  • अधिक आयु में शिशु को जन्म देना
  • हार्मोन थेरेपी
  • लिंग
  • इंहेरिटेड डिस्क
  • मेनोपॉज लेट होना
  • कभी गर्भधारण न करना
  • पहले स्तन कैंसर होना

स्तन कैंसर से बचाव

  • लाइफ़स्टाइल फ़ैक्टर – मोटापा वाली महिलाओं को इसका रिस्क अधिक होता है तो हेल्दी डाइट के साथ एक्सरसाइज करने से लाभ मिलता है. (जानें – महीला सेक्स हार्मोन के बारे में)
  • स्क्रीनिंग – नियमित रूप से 50 की आयु के बाद हर साल मैमोग्राम करवाना.
  • प्रीएम्पटिव ट्रीटमेंट – फैमिली हिस्ट्री आदि होने पर डॉक्टर से बात कर लक्षणों के आधार पर ट्रीटमेंट लिया जा सकता है.
  • ब्रेस्ट एक्जाम – यह खुद घर पर या डॉक्टर द्वारा की जा सकती है.

अंत में

स्तन पर कोई स्पॉट या उभार महसूस होने या दिखने, कोई अन्य लक्षण दिखने पर डॉक्टर से बात कर सलाह ली जानी चाहिए. स्तन पर उभार के कई सारे कारण हो सकते है, लेकिन समस्या के कैंसर निदान करने पर ट्रीटमेंट जल्दी से जल्दी लेना चाहिए. (जानें – नैचुरल तरीके से ब्रेस्ट का साइज कैसे बढ़ाए)

शुरूआती स्टेज में निदान करने पर इलाज संभव है और रोग को जल्दी से ठीक किया जा सकता है. जबकि स्तन कैंसर के विकसित हो जाने पर ट्रीटमेंट काफी मुश्किल हो जाता है.

References –

 

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